लेबनान में कोहराम, क्या फेल हो रही है ट्रंप की ‘पीस डील’?

अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 दिवसीय युद्धविराम (Ceasefire) के दावों के बीच मध्य पूर्व में तनाव कम होने के बजाय और बढ़ गया है। एक तरफ ट्रंप प्रशासन शांति की बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ इजरायल ने लेबनान में हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर अब तक का सबसे भीषण हमला बोल दिया है।

शर्तों का ‘घोटाला’ और जलता लेबनान

ट्रंप की इस ‘शांति’ में युद्ध के शोले साफ नजर आ रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा विवाद शर्तों की व्याख्या को लेकर है। अमेरिका का तर्क है कि लेबनान इस सीजफायर की शर्तों का हिस्सा नहीं था, जबकि ईरान का दावा है कि समझौते में पूरे क्षेत्र, विशेषकर लेबनान में शांति की शर्त शामिल थी।

10 मिनट में 100 हमले: हिज्बुल्लाह की ज़ूम मीटिंग पर बमबारी

इजरायली डिफेंस फोर्सेस (IDF) ने लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को तेज कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार

  • इंटेलिजेंस स्ट्राइक: IDF ने दावा किया है कि उन्होंने हिज्बुल्लाह के अधिकारियों की एक Zoom Meeting को ट्रेस किया और उस पर सटीक हमला किया। इस मीटिंग में 100 से ज्यादा लड़ाके शामिल थे।
  • भारी गोलाबारी: पिछले 24 घंटों में 250 से अधिक लोग मारे गए हैं। अकेले राजधानी बेरूत में 91 लोगों की जान गई है।
  • निशाने पर कमांड सेंटर्स: इजरायल ने मात्र 10 मिनट में हिज्बुल्लाह के 100 से अधिक ठिकानों, जिनमें इंटेलिजेंस सेंटर, मिसाइल यूनिट्स और कमांड ऑफिस शामिल हैं, को तबाह कर दिया।

Ceasefire खतरे में क्यों? ये हैं 5 मुख्य कारण

अमेरिका-ईरान शांति समझौता टूटने की कगार पर है, जिसके पीछे ये 5 बड़ी वजहें मानी जा रही हैं:

  1. शर्तों पर विरोधाभास: अमेरिका का कहना है कि सीजफायर लेबनान पर लागू नहीं होता, जबकि ईरान इसे पूरे क्षेत्र के लिए मान रहा है।
  2. क्षेत्रीय युद्ध का विस्तार: ईरान के लवान द्वीप पर UAE की बमबारी के जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत पर हमले किए हैं, जिससे तनाव और गहरा गया है।
  3. होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का ताला: सीजफायर के बावजूद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज का रास्ता नहीं खुला है, जिसे लेकर अमेरिका लगातार सैन्य धमकी दे रहा है।
  4. परमाणु कार्यक्रम का पेच: ईरान का कहना है कि उसे यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) का अधिकार नहीं दिया गया है, जो समझौते की एक बड़ी बाधा है।
  5. भड़काऊ बयानबाजी: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की चेतावनी और ईरान के कड़े तेवरों ने बातचीत की मेज पर कड़वाहट घोल दी है।

दो नावों पर सवार ट्रंप प्रशासन?

विश्लेषकों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ अगली उच्च-स्तरीय बैठक की तैयारी कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ इजरायल की कार्रवाई पर मौन सहमति दे रहे हैं। लेबनान के हर्मेल में पेट्रोल पंप से लेकर बेरूत के रिहाइशी इलाकों तक बरसते बम इस तथाकथित ‘शांति काल’ की पोल खोल रहे हैं।

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