जुबिली स्पेशल डेस्क
ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की महत्वाकांक्षा एक बार फिर चर्चा में है। ट्रंप ने हाल ही में ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे की अपनी इच्छा दोहराई है।
बुधवार (14 जनवरी, 2026) को अमेरिकी, डेनिश और ग्रीनलैंडिक अधिकारियों के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद उन्होंने ग्रीनलैंड को अमेरिका की सुरक्षा के लिए “बेहद अहम” बताते हुए कहा कि इस मसले का कोई न कोई समाधान जरूर निकलेगा।
हालांकि, ट्रंप की इस सोच को अमेरिकी जनता का कितना समर्थन हासिल है, इसका खुलासा एक ताजा सर्वे में हुआ है, जिसके आंकड़े चौंकाने वाले हैं।
ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर अमेरिकी जनता की राय
रॉयटर्स/इप्सोस द्वारा शुक्रवार (16 जनवरी, 2026) को कराए गए सर्वे के मुताबिक, ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे की कोशिशों को अमेरिका के अधिकांश नागरिकों का समर्थन नहीं है।
सर्वे में सामने आया कि पांच में से एक से भी कम अमेरिकी इस कदम के पक्ष में हैं, जबकि केवल दस में से एक नागरिक का मानना है कि इसके लिए सैन्य बल का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
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सर्वे के पहले सवाल में पूछा गया कि क्या अमेरिकी नागरिक ग्रीनलैंड पर कब्जे की ट्रंप की कोशिशों का समर्थन करते हैं। इसके जवाब में 47 प्रतिशत लोगों ने साफ तौर पर “नहीं” कहा। वहीं, सिर्फ 17 प्रतिशत अमेरिकियों ने इस विचार का समर्थन किया, जबकि 36 प्रतिशत लोगों ने इस पर कोई स्पष्ट राय नहीं दी।
दूसरे सवाल में पूछा गया कि क्या अमेरिका को ग्रीनलैंड और पनामा कैनाल को अपनी टेरिटरी बनाने के लिए सैन्य बल का इस्तेमाल करना चाहिए। इस पर केवल 10 प्रतिशत लोगों ने समर्थन जताया, जबकि 69 प्रतिशत अमेरिकियों ने इसका विरोध किया। 21 प्रतिशत लोगों ने इस सवाल पर “पता नहीं” का जवाब दिया।
तीसरे सवाल में यह जानने की कोशिश की गई कि क्या अमेरिका को पश्चिमी गोलार्ध में अपना प्रभुत्व स्थापित करने के लिए आक्रामक नीतियों का सहारा लेना चाहिए।
इस पर 33 प्रतिशत अमेरिकियों ने सहमति जताई, जबकि 41 प्रतिशत ने इसका विरोध किया। 26 प्रतिशत लोग इस मुद्दे पर भी असमंजस में नजर आए।
यह सर्वे ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिकी सेना द्वारा वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका की वैश्विक भूमिका पर बहस तेज हो गई है।
ट्रंप की जिद से ग्रीनलैंड में बढ़ी चिंता
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे को लेकर ट्रंप की लगातार बयानबाजी से वहां के लोगों में चिंता का माहौल है। ग्रीनलैंड के नेताओं ने साफ किया है कि वे डेनमार्क के साथ अपनी एकजुटता बनाए रखेंगे।
वहीं, डेनमार्क सरकार ने कहा है कि वह दुनिया के सबसे बड़े द्वीप ग्रीनलैंड की सुरक्षा को लेकर नाटो के साथ मिलकर वहां अपनी स्थायी और मजबूत मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में गुरुवार (15 जनवरी, 2026) को कई यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड में सीमित संख्या में अपने सैनिकों की तैनाती भी की है।
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