जुबिली न्यूज डेस्क
वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अमेरिकी चुनाव प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका के चुनाव चोरी और धांधली से प्रभावित हैं और इससे जनता का लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समय रहते चुनावी सिस्टम में बड़े सुधार नहीं किए गए, तो अमेरिका को राजनीतिक पतन का सामना करना पड़ सकता है।

ट्रुथ सोशल पर ट्रंप का बड़ा बयान
रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने लिखा,“अमेरिका के चुनाव धांधली वाले, चोरी किए गए और पूरी दुनिया में हंसी का पात्र हैं। या तो हम इन्हें ठीक करेंगे, या फिर हमारा कोई देश नहीं बचेगा।”ट्रंप ने रिपब्लिकन सांसदों और अपने समर्थकों से अपील की कि वे चुनावी सुधार से जुड़े उनके प्रस्तावों का समर्थन करें।
2020 चुनाव के बाद बार-बार दोहराया दावा
गौरतलब है कि 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में हार के बाद डोनाल्ड ट्रंप कई बार चुनाव में धोखाधड़ी के आरोप लगा चुके हैं। हालांकि, अमेरिकी अदालतों में दायर मामलों में चुनावी धांधली का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। इसके बावजूद ट्रंप लगातार यह कहते रहे हैं कि चुनाव प्रणाली में खामियों के कारण जनता का भरोसा टूट रहा है।
ट्रंप की क्या हैं प्रमुख मांगें?
ट्रंप ने चुनावी प्रक्रिया में कई बड़े बदलावों की मांग की है, जिनमें शामिल हैं—
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मतदान से पहले सरकार द्वारा जारी फोटो पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य किया जाए
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वोटर रजिस्ट्रेशन के समय अमेरिकी नागरिकता का प्रमाण जरूरी हो
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पोस्टल वोटिंग को बड़े स्तर पर खत्म किया जाए
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केवल बीमारी, विकलांगता, मिलिट्री सर्विस या यात्रा जैसे विशेष मामलों में ही पोस्टल वोटिंग की अनुमति हो
ट्रंप का कहना है कि इन कदमों से चुनावों में होने वाली धोखाधड़ी को रोका जा सकेगा।
NBC इंटरव्यू में भी दोहराई बात
हाल ही में NBC न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा,“हमें ऐसे चुनाव चाहिए जिनमें लोग धांधली न कर सकें। मैं इसे लागू करके रहूंगा। दिलचस्प बात यह है कि डेमोक्रेट्स के बीच भी इसके पक्ष में अच्छा समर्थन देखने को मिल रहा है।”
बयान पर विवाद और संवैधानिक बहस
ट्रंप के इस बयान को लेकर विरोधाभास भी सामने आया है। आलोचकों का मानना है कि इससे राज्यों और काउंटी इलेक्शन अथॉरिटी की स्वतंत्रता पर खतरा बढ़ सकता है। अमेरिकी संविधान के तहत चुनाव कराने की जिम्मेदारी राज्यों की होती है, हालांकि कांग्रेस कुछ नियम तय कर सकती है।
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गौर करने वाली बात यह है कि अमेरिका के कई राज्यों में पहले से ही वोटर आईडी अनिवार्य है, लेकिन स्वीकार किए जाने वाले पहचान पत्रों के प्रकार राज्यों के हिसाब से अलग-अलग हैं।
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