संसद में किसान प्रदर्शन के मुद्दे पर 15 घंटे होगी बहस

जुबिली न्यूज डेस्क

राज्यसभा में किसान आंदोलन पर चर्चा के लिए सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बन गई है। रिपोर्टों में कहा गया है कि किसान प्रदर्शन के मुद्दे पर सदन में 15 घंटे चर्चा होगी।

इससे एक दिन पहले यानी मंगलवार को विपक्षी दलों ने कृषि कानून के मुद्दे पर वाकआउट किया था। विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा था।

सहमति बनने से पहले राज्यसभा में बुधवार को भी विपक्षी दलों ने हंगामा किया। हंगामा तब और बढ़ गया था जब राज्यसभा अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने घोषणा की कि राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस के बाद किसानों के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी।

सदन में आम आदमी पार्टी के तीनों सांसद नारे लगाते रहे। बाद में तीनों सदस्यों को सदन छोड़कर जाने को कह दिया गया।

बुधवार को दोबार जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो सभापति एम. वेंकैया नायडू ने सदस्यों को सदन के भीतर मोबाइल फोन के इस्तेमाल के खिलाफ चेतावनी दी।

नायडू ने कहा कि ‘राज्यसभा कक्षों के भीतर सेलुलर फोन के उपयोग पर प्रतिबंध है। यह देखा गया है कि कुछ सदस्य अपने मोबाइल फोन का उपयोग सदन की कार्यवाही को रिकॉर्ड करने के लिए कर रहे हैं जबकि ऐसा आचरण संसदीय शिष्टाचार के खिलाफ है।’

राज्यसभा में चर्चा के लिए सहमति बनने की यह खबर तब आई है जब मंगलवार को राज्यसभा में इस पर हंगामा हुआ था और कई बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी थी।

मंगलवार को राज्यसभा में कामकाज शुरू होते ही किसान आन्दोलन पर चर्चा कराने के लिए कुछ विपक्षी दलों ने मांग की थी। कांग्रेस नेता ग़ुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा ने राज्यसभा में किसानों के मुद्दे पर चर्चा के लिए नोटिस दिया है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद अर्पिता घोष ने भी इसी मुद्दे पर नोटिस दिया था।

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सीपीआई (एम) के सांसद एलाराम करीम ने राज्यसभा में नियम 267 के तहत किसानों के मुद्दों पर चर्चा की मांग की। इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी के सांसद अशोक सिद्धार्थ ने राज्यसभा में स्थगन प्रस्ताव दिया था।

लेकिन स्पीकर एम. वेंकैया नायूड ने यह कह कर इसे खारिज कर दिया कि इस पर बहस बुधवार को होगी, आज नहीं। इस पर विपक्ष के सदस्यों ने नारेबाजी की। थोड़ी देर नारेबाजी के बाद स्पीकार ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी थी।

मालूम हो कि दिल्ली सीमा पर देश के कई राज्यों के किसान दो माह से अधिक समय से आंदोलन कर रहे हैं। किसानों को रोकने के लिए दिल्ली की सीमाओं पर दीवारें खड़ी की गई हैं और कंटीले तार लगाए गए हैं। भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।

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इससे पहले भी किसान ऐसी ही कई बाधाओं को पार कर दिल्ली की सीमा पर पहुंचे हैं। करीब ढाई महीने पहले जब किसान दिल्ली की ओर रवाना हुए थे तो कड़कड़ाती ठंड में किसानों पर पानी की बौछारें की गई थीं, लाठी चार्ज किया गया था, आँसू गैस के गोले दागे गए थे, रास्ते पर गड्ढे खोद दिए गए थे, भारी तादाद में पुलिस बल को तैनात किया गया था।

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