आजादी से एक रात पहले, 14 अगस्त की भयानक कहानी, जुबिली पोस्ट पर जरूर पढ़ें

जुबिली न्यूज डेस्क 

भारत 2024 में अपना 78वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है, जिसकी तैयारियों आम आदमी से लेकर सरकार तक सब जुटे हुए हैं क्योंकि 15 अगस्त हिन्दुस्तान की आजादी का दिन है। देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ था, मगर उससे ठीक एक दिन पहले यानी 14 अगस्त की रात इतनी भयानक थी कि उसे याद करके लोग आज भी कांप उठते हैं। भारत में उस रात वो हुआ था, जिसने सबकुछ बदल दिया। कहते है किसी चीज से आजादी पाने के लिए बहुत कुछ कुरबान करना पड़ता है। तो आईए जानते है 14 अगस्त की उस भयानक रात के बारें में…

हमारे देश पर कई सालों तक अंग्रेजों ने राज किया । 1947 से पहले करीब ढाई सौ साल तक शासन किया। हमें गुलाम बनाकर रखा। मगर जब वे गए तो ऐसा कुछ कर गए, जिसकी वजह से दोनों देश आज भी चैन से नहीं हैं। अंग्रेजों ने 14 अगस्त की उस रात को भारत के दो टुकड़े कर दिए। एक हिस्सा भारत कहलाया, तो दूसरा पाकिस्तान। बस, यहीं से यह मंजर और आने वाला पल खौफनाक होता गया। तब से दोनों तरफ से लाखों लोगों की जानें जा चुकी हैं।

हिंसा के बाद हुआ कुछ ऐसा

बंटवारे के बाद कुछ लोग भावुक हो गए तो बहुत से लोग हिंसक हो गए और इन्होंने हिंसा फैलानी शुरू कर दी। अपने ही दोस्तों, पड़ोसियों को मौत के घाट उतारने लगे। दुख-सुख में जो साथी थे, उनकी संपत्ति लूटने लगे। उनके घर-दुकान, खेत-खलिहान पर कब्जा करने लगे। हजारों-लाखों घर उजड़ गए। चारों तरफ दंगे और फसाद शुरू हो गए। दावा किया जाता है कि सिर्फ उन दिनों में विभिन्न धर्म और समुदाय के दस लाख से अधिक लोगों की मौत हुई। से भयंकर मंजर याद करके आज भी लोगों के रूह काप उठते है।

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यह सबसे बड़ा विस्थापन रहा

14 अगस्त की रात बटवारे के बाद करोड़ो लोगों के घर उजड़ गए। करीब एक करोड़ से अधिक लोगों को अपना घर-संपत्ति छोड़कर सीमा के पार जाना पड़ा और सीमा के इस पार आना पड़ा। माना जाता है कि यह सबसे बड़ा विस्थापन रहा है। उस रात के बाद लोगों की सुख-शांति छीन गई। एक तरफ बहुत से लोग आजादी का जश्न मना रहे थे, तो बहुत से लोग अपनों तथा अपनी संपत्ति से बिछड़ने का गम मना रहे थे। लोगों की आंखों में नींद नहीं थी। हर तरफ दहशत ही दहशत थी। ऐसे में आजादी कितने मुश्किलों से मिली यह बहुत से लोग भूल गए और आने वाले दिनों की संघर्ष की तैयारी करने लगे। लेकिन उस मंजर को याद करके लोगों के रूह काप उठते हैं।

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