जुबिली स्पेशल डेस्क
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। खासतौर पर यूरोपीय देशों की नींद उड़ी हुई है कि आखिर कोई नाटो सदस्य देश के खिलाफ इतनी खुली धमकी कैसे दे सकता है। ट्रंप अपने बयान में सिर्फ बंदूकों का ज़िक्र नहीं कर रहे, बल्कि शब्दों से भी युद्ध कर रहे हैं।
दुनिया की सबसे खतरनाक यूनिट को कहा ‘लप्पू’?
ट्रंप ने एयरफोर्स वन के केबिन में खड़े होकर ग्रीनलैंड के मामले पर हंसते हुए कहा, “डेनमार्क ने ग्रीनलैंड की सुरक्षा बढ़ाने के लिए क्या किया? एक और डॉग स्लेज जोड़ दी। उन्हें लगा कि यह बड़ा कदम है, लेकिन नहीं, ये काफी नहीं है।”
असल में, ट्रंप जिस पर हंस रहे थे, वह कोई साधारण टीम नहीं बल्कि बर्फीले रेगिस्तान में तैनात एलीट सैन्य दस्ते – सिरियस डॉग स्लेज पेट्रोल हैं, जिन्हें आर्कटिक की सबसे खतरनाक यूनिट माना जाता है।
ग्रीनलैंड को सुरक्षा की जरूरत क्यों?
हालांकि यहां कोई स्थायी आबादी नहीं है और परिस्थितियां बेहद कठिन हैं, फिर भी रूस और चीन की बढ़ती आर्कटिक मौजूदगी के कारण यह यूनिट डेनमार्क की “आंख और कान” बनी हुई है।
यह दस्ते निगरानी, कानून व्यवस्था और स्थायी सैन्य मौजूदगी बनाए रखते हैं। कभी-कभी ये सैनिक महीनों तक दुनिया से कटे रहते हैं।
ट्रंप बार-बार यह कहते रहे हैं कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। उनका दावा है कि रूस और चीन आर्कटिक में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं और डेनमार्क इस क्षेत्र की रक्षा पर्याप्त रूप से नहीं कर सकता। ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक माहौल में नई आग भड़का दी है।
आर्कटिक में बर्फ की जंग और डॉग स्लेज की अहमियत
आर्कटिक के कठोर माहौल में, पुराने और प्रतीत होने में शांत दस्ते भी जिंदा रहते हैं। बर्फ और चरम ठंड में सिरियस डॉग स्लेज अब भी एक महत्वपूर्ण हथियार के रूप में मौजूद है।
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