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	<title>तरुण राज Archives &#060; Jubilee Post | जुबिली पोस्ट</title>
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	<description>News &#38; Information Portal</description>
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		<title>शब्दों के संग पुत्र के स्वरों में जी उठे पं.बलवंत राय भावरंग</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/pt-balwant-rai-bhavrang-rose-in-the-voices-of-the-son-with-the-words/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 06 Oct 2021 08:35:15 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज़ ब्यूरो लखनऊ। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी में परतंत्रता की बेड़ियों से देश को आजाद कराने के लिए अपने गीतों से लोगों में अलख जगाने और स्वातंत्र्य आंदोलन का भाव रंगों में भरने वाले गायक संगीतज्ञ पद्मश्री पं.बलवंत राय भावरंग का स्मरण करते हुए उन पर केन्द्रित अकादमी की पत्रिका छायानट के विमोचन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली न्यूज़ ब्यूरो</strong></span></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी में परतंत्रता की बेड़ियों से देश को आजाद कराने के लिए अपने गीतों से लोगों में अलख जगाने और स्वातंत्र्य आंदोलन का भाव रंगों में भरने वाले गायक संगीतज्ञ पद्मश्री पं.बलवंत राय भावरंग का स्मरण करते हुए उन पर केन्द्रित अकादमी की पत्रिका छायानट के विमोचन अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया। अकादमी परिसर गोमतीनगर के संत गाडगेजी महाराज प्रेक्षागृह में अतिथियों की उपस्थिति में वाराणसी के शास्त्रीय गायक राहुल भट्ट और अकादमी कथक केन्द्र की दर्शनीय कथक संरचनाओं की प्रस्तुति ने सुधी संगीत प्रेमियों को रससिक्त किया।</p>
<p><img decoding="async" class="aligncenter wp-image-236660 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/10/SNA-2.jpg" alt="" width="640" height="447" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/10/SNA-2.jpg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/10/SNA-2-300x210.jpg 300w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>इस अवसर पर अकादमी अध्यक्ष डॉ. राजेश्वर आचार्य ने अपने गुरु पं.भावरंग के संबंधित संस्मरण रखते हुए उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किये। उन्होंने बताया कि संगीत के प्रति प्रेम और देशभक्ति भावना उनमें 95 वर्ष की अवस्था में अंतिम दिनों तक जाग्रत रहीं। पंडितजी मेरे गुरु थे और उनका देशभक्ति गीत लिखकर गाने का शौक तब और उत्साह में बदल गया जब वह अपने गुरु पं.ओंकारनाथ ठाकुर से मिले। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संगीत एवं मंच कला संकाय से बतौर शिक्षक रहे। गुरुजी की आंखों की रोशनी एक बीमारी में भले चली गई थीं। आकाशवाणी से प्रसारित होने वाले संगीत कार्यक्रम वह खूब सुना करते थे। अपनी ख्याल गायकी की अलग शैली के लिए प्रसिद्ध बलवंत राय भट्ट द्वारा लिखे गीतों पर आज भी दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों में कलाकार अपनी प्रस्तुति देते हैं। उनके गीतों से मुग्ध होकर सन् 1952 में अफगानिस्तान के शाह के महल में उन्हें अपना कार्यक्रम प्रस्तुत करने के लिए बुलाया था।</p>
<p>इससे पहले अतिथियों का स्वागत करते हुए अकादमी के सचिव तरुण राज ने पं.भावरंग के योगदान पर प्रकाश डाला और बताया कि हाल में अकादमी ने कुम्भ, योग, सरसरंग, गिरिजादेवी, पं.रवि शंकर पर विशेषांक प्रकाशित किये हैं। पं.भावरंग पर केन्द्रित यह अंक आलोक पराड़कर के संपादन में है। उपस्थित प्रेक्षकों के अतिरिक्त कार्यक्रम का आनन्द संगीतप्रेमियों ने अकादमी फेसबुक पेज पर ऑनलाइन भरपूर आनंद लिया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-236661 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/10/SNA.jpg" alt="" width="640" height="332" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/10/SNA.jpg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/10/SNA-300x156.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>पिता पं.बलवंत राय भावरंग और दिग्गज शास्त्रीय कलाकारों को सुन-सुनकर गायन सीखने वाले पं.राहुल भट्ट ने पितृपक्ष पर अपने पिता को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी रची रचनाओं को पेश किया। पहले राग नंद और रूपक मध्य लय में पगी ख्याल रचना- ऊधो काहे आये ब्रज में और द्रुत तीन ताल में वारि वारि पुनि वारि जांऊ से आलाप इत्यादि के संग पूरे शास्त्रीय तौर तरीकों से की। तबला वादन की तालीम पं.नागेश्वर प्रसाद मिश्र व पं.छोटे लाल मिश्र से लेने वाले राहुल भट्ट द्वारा राग अडाना में प्रस्तुत अगली चतुरंग रचना- होरी खेलत नंदलाल&#8230;.. की प्रस्तुति में शास्त्रीय लालित्य खिल उठा। नाट्य और पार्श्व संगीत देने में सिद्धहस्त पं.भट्ट ने रागश्री आड़ा चौताल में निबद्ध तराना रचना ने अपनी गायकी के परिपक्व स्वरूप को सामने रखा। रूपक ताल और भैरवी में आजादी से पहले की पिता पं. बलवंत राय की गीत रचना- स्वाधीन भारत सर्वद सुख शान्ति जग में चाहता है&#8230;. में उन्होंने स्वाधीन भारत की परिकल्पना को स्वरों के माध्यम से जीवंत किया। हारमोनियम पर कमलाकांत व तबले पर उनका साथ राजीव मिश्र ने दिया।</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/books-showing-the-path-of-spirituality-in-pitru-paksha-and-navratri/">पितृपक्ष और नवरात्र में अध्यात्म की राह दिखा रहीं किताबें</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/interesting-world-of-childrens-books/">बच्चो की किताबों का रोचक संसार</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/books-telling-the-story-of-freedom-struggle/">किताबें कह रहीं आजादी के संघर्ष की दास्तान</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/test-the-character-of-power-or-else-the-media-is-now-preparing-for-murder/">डंके की चोट पर : सत्ता के चरित्र को परखिये वर्ना अब मीडिया के कत्ल की तैयारी है</a></strong></span></p>
<p>कार्यक्रम के दूसरे चरण में कथक केन्द्र की छात्राओं ने श्रुति शर्मा के नृत्य निर्देशन में पं.भावरंग की छोटा ख्याल रचना और तराने पर आधारित &#8220;कथक भावरंग&#8221; शीर्षित प्रस्तुति मंच पर उतारी। केन्द्र की छात्राओं प्रियम यादव, सृष्टि प्रताप, शगुन, यादव, अंतरा सिंह, गौरी शुक्ला, सान्वी सक्सेना, विधि जोशी आरोही श्रीवास्तव से खूबसूरत गतियों और संयोजनों में गायक कर रचनाओं को विस्तार दिया। गायन व संगीत पक्ष को कमलाकांत ने अपने सुरों से सजाया तो तबले पर कुशल तबलानवाज राजीव शुक्ल व बांसुरी पर दीपेन्द्र कुंवर ने उम्दा साथ निभाया। रूपसज्जा शहीर व सचिन की रही।</p>
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		<title>कथकाचार्य पं.लच्छू महाराज को शिष्याओं ने किया कथक से नमन</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/disciples-salute-kathakacharya-p-lachhu-maharaj-with-kathak/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Sep 2021 13:27:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज़ ब्यूरो लखनऊ। संत गाडगेजी महाराज प्रेक्षागृह गोमतीनगर के मंच से आज बंकिम, बच्चन, मैथिलीशरण जैसे प्रख्यात कवियों की रचनाएं ओज स्वर-संगीत में बंधकर कथक की गतियों और भावों में राष्ट्रभावना जाग्रत कर गयीं। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी कथक केंद्र लखनऊ द्वारा संस्थापक निदेशक पं.लच्छू महाराज की जयंती पर उन्हें भावांजलि पेश की &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली न्यूज़ ब्यूरो</strong></span></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> संत गाडगेजी महाराज प्रेक्षागृह गोमतीनगर के मंच से आज बंकिम, बच्चन, मैथिलीशरण जैसे प्रख्यात कवियों की रचनाएं ओज स्वर-संगीत में बंधकर कथक की गतियों और भावों में राष्ट्रभावना जाग्रत कर गयीं। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी कथक केंद्र लखनऊ द्वारा संस्थापक निदेशक पं.लच्छू महाराज की जयंती पर उन्हें भावांजलि पेश की गयी। आजादी के अमृत महोत्सव आयोजन की कड़ियों के अंतर्गत कथकाचार्य की जन्मदिन पर कल की तरह आज फिर मातृभूमि और स्वतंत्रता सेनानियों और उनकी कुर्बानियों का स्मरण कथक संरंचनाओं में आनलाइन प्रस्तुत नमन कार्यक्रम में किया गया।</p>
<p>आज शाम कार्यक्रम से पहले कथक गुरु की प्रतिमा पर उनकी वरिष्ठ शिष्या डॉ. कुमकुम धर व अकादमी सचिव तरुण राज ने माल्यार्पण  किया। इस अवसर पर सचिव तरुण राज और पं.लच्छू महाराज की शिष्या डॉ. कुमकुम ने नृत्य गुरु की कुछ यादों को साझा कर उनका व्यक्तित्व सामने रखा। श्रुति शर्मा के नृत्य निर्देशन में अकादमी कथक केंद्र की छात्राओं ने कथकाचार्य की जयंती के दिन नमन की दूसरी संध्या का आरम्भ गुरु की वन्दना भरे श्लोक- मंत्र सत्यम पूजा सत्यम सत्यमेव निरंजनम् से शुरू रचना से की।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-233318 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/09/naman.jpg" alt="" width="562" height="480" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/09/naman.jpg 562w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/09/naman-300x256.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 562px) 100vw, 562px" /></p>
<p>इसी क्रम में मातृ वंदना के- शुद्ध सुंदर अति मनोहर&#8230;.. जैसे शब्दों के साथ तीन ताल व धमार ताल में शुद्ध नृत्य का दिखाते हुए थाट, आमद, उठान, टुकड़े, बंदिश तिहाई, नटवरी, परमेलू, परन जुगलबंदी इत्यादि की आनलाइन प्रस्तुतियांं से कथक प्रेमियों को मोह लिया। यहां समवेत प्रतिभा दिखाने वाली केन्द्र की छात्राओं में प्रियम यादव, पाखी सिंह, आरोही श्रीवास्तव, अनंत शक्तिका, शिवांगी सिंह, सृष्टि प्रताप, विधि जोशी, मनीषा सिंह, ऐश्वर्या सिंह, अग्रणी श्रीवास्तव, शानवी श्रीवास्तव व डिंपल शामिल थी। हारमोनियम पर कमलाकांत के संगीत व गायन में तबले पर अनुभवी वादक द्वय पार्थप्रतिम मुखर्जी व राजीव शुक्ल थे। सितार पर डॉ. नवीन मिश्र और बांसुरी पर दीपेंद्र कुंवर ने सुरीली संगत की।</p>
<p>लखनऊ व बनारस संगीत घराने का प्रतिनिधित्व करने वाली पं.अर्जुन मिश्र की शिष्या मनीषा मिश्रा ने हरिवंश राय बच्चन की देशप्रेम के भावों और गोपालप्रसाद व्यास की स्वाधीनता सेनानियों के बलिदान से भरी रचनाओं पर आधारित प्रस्तुति मंच पर रखी। अलख आजादी की शीर्षित इस सुंदर प्रस्तुति में जहां राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणा छुपी हुई थी वहीं ओजस्वी स्वरों में राष्ट्रनिर्माण करते हुए कर्म पथ पर अग्रसर होने का संदेश भी उजागर हो रहा था। मंदीप शर्मा के आलेख में ओज और मधुरता से परिपूर्ण गायन पीयूष मिश्रा व मंजूषा मिश्रा का और पढंत मानसी प्रिया की रही, जबकि तबले पर ताल निर्देशक रविनाथ मिश्र के संग मास्टर आराध्य प्रवीन थे। बांसुरी पर दीपेन्द्र और सितार पर मंजूषा के संग मिलकर प्रस्तुति का संगीत तैयार करने वाले डा.नवीन मिश्र बैठे थे।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-233319 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/09/naman-2.jpg" alt="" width="640" height="243" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/09/naman-2.jpg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/09/naman-2-300x114.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>कथक के गढ़ लखनऊ की कला संस्था नुपुरम के कलाकारों ने नृत्याचार्य पं.लच्छू महाराज की शिष्या डॉ. कुमकुम धर के नृत्य निर्देशन में मातृभूमि को नमन करते हुए ओज भरी संरचनाओं की प्रस्तुति नमामि मातृभमि को मंच पर उतारा। समृद्ध संस्कृति और धरोहरों से परिपूर्ण विश्व की प्राचीन सभ्यताओं मे से एक ऋषियों-मुनियों के संग देवभूमि कहलाने वाले अपने देश की अमर गाथा को मैथिलीशरण गुप्त की प्रसिद्ध काव्य रचना भारत भारती और बंकिमचन्द्र चटटोपाध्याय के रचे वंदे मातरम पर आधारित इस रचना में चारों नृत्यांगनाओं अदिति थपलियाल, अमीषा तिवारी, रजना शर्मा व रोशनी प्रसाद ने प्रमुख दिशाओं का प्रतिनिधित्व करते हुए राष्ट्र की कीर्ति को दिखाया।</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/twenty-years-old-and-this-dreadful-decision/">बीस साल की उम्र और ये खौफनाक फैसला</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/nishad-party-will-stay-with-bjp/">बीजेपी के साथ रहेगी निषाद पार्टी</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/traders-respected-their-leaders/">व्यापारियों ने किया अपने नेताओं का सम्मान</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/the-concept-of-rule-of-law-is-meaningless/">डंके की चोट पर : क़ानून के राज की कल्पना तो बेमानी है</a></strong></span></p>
<p>मातृभमि की माटी का गुणगान करती इस रचना में लहलहाते खेतों का जिक्र था तो मधुर भाषाओं के लालित्य की चर्चा भी। संरचना में ऐसे अनेक तथ्य कथक गतियों और भावों में उतरकर सामने आये। संरचना का सगीत एवं स्वर सुश्री संगीता कट्टी कुलकर्णी के थे तो तबले पर तजुर्बेकार अरुण भट्ट थे। काव्य पाठ डॉ.कुमकम धर ने किया, तकनीकी पक्ष में मिक्सिंग अरुणांश भट्ट की रही।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>चरित्रों को गढ़ने में वेशभूषा सबसे महत्वपूर्ण होती है</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/costumes-are-the-most-important-factor-in-creating-characters/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 05 Aug 2021 14:16:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज़ ब्यूरो लखनऊ। किसी मंचीय नाटक, टीवी धारावाहिक या फिर फिल्मों में दर्शकों के सामने आने वाले चरित्रों को गढ़ने में उनकी वेशभूषा भी महत्वपूर्ण होती है। वेशभूषा इस तरह डिजाइन की जानी चाहिए कि जो देश, काल, वातावरण के साथ सम्बंधित चरित्र के व्यक्तित्व को पहचानने में मददगार साबित हो। कुछ ऐसी ही &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली न्यूज़ ब्यूरो</strong></span></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> किसी मंचीय नाटक, टीवी धारावाहिक या फिर फिल्मों में दर्शकों के सामने आने वाले चरित्रों को गढ़ने में उनकी वेशभूषा भी महत्वपूर्ण होती है। वेशभूषा इस तरह डिजाइन की जानी चाहिए कि जो देश, काल, वातावरण के साथ सम्बंधित चरित्र के व्यक्तित्व को पहचानने में मददगार साबित हो। कुछ ऐसी ही बातें प्रसिद्ध रंगकर्मी ललित सिंह पोखरिया ने उन प्रतिभागियों को बताई जो आज से उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की ओर से आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत आनलाइन आयोजित निःशुल्क वेषभूषा कार्यशाला में प्रतिभाग कर रहे हैं। यह कार्यशाला 27 अगस्त तक चलेगी।</p>
<p>अकादमी अवार्ड से नवाजे जा चुके लेखक-रंगकर्मी ललित का स्वागत करते हुए अकादमी सचिव तरुण राज ने आजादी की लड़ाई के महानायकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि कोविड-19 के कारण इस सत्र में भी आनलाइन कार्यशालाओं का संचालन हो पा रहा है, किन्तु सकारात्मक पहलू यह है कि आनलाइन संचालन से इनमें देश -दुनिया और प्रदेश भर के प्रतिभागियों को भाग लेकर लाभान्वित होने और अनुभव लेने का अवसर मिल जाता है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-230738 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/08/SNA.jpg" alt="" width="640" height="345" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/08/SNA.jpg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/08/SNA-300x162.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>कार्यशाला संयोजक अकादमी की नाट्य सर्वेक्षक शैलजाकांत ने बताया कि कार्यशाला के लिए करीब 160 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है। इस अवसर पर प्रशिक्षक ललित सिंह ने रंगमंच के अभिनय, दृश्यबंध इत्यादि अन्य आयामों की परिभाषा व जरूरत बताते हुए वेशभूषा परिकल्पना की बुनियादी जानकारी मंचीय नाटकों के संग कैमरों के फ्रेम के हिसाब से देते हुए उन्होंने बताया कि चिंतन, विश्लेषण, सही और गलत तय करने की क्षमता के साथ ही चरित्र की मांग के अनुरूप उसका वेश निर्धारण करना चाहिए। वेशभूषा के साथ मेक-अप, मुखौटे, विग इत्यादि पूरक का काम करते हैं।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>उन्होंने कहा कि जिस तरह के कपड़े हम सामान्य जीवन में पहनते हैं, वही हमारी पहचान बन जाते हैं, ठीक वैसे ही नाटक में चरित्र की वेशभूषा उसके व्यक्तित्व का अंग बनकर प्रेक्षकों के सामने आती है। लोककलाओं और नृत्य में वेशभूषा का अत्यंत महत्व है, जबकि रंगमंच में हम केवल अभिनय को सर्वाधिक महत्व देते है जबकि वेशभूषा जैसे अन्य पक्षों को उतना महत्व नहीं देते। जो काम अभिनेता अभिनय से करता है वही काम वेशभूषा से भी किया जा सकता है। कहानी की प्रस्तुति को किरदारों की वेशभूषा, दृश्यबंध आदि को सशक्त रूप से रचकर और प्रभावशाली तथा और अधिक कलात्मक बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि वेशभूषा में रंगों का भी बड़ा महत्व है जिसका निर्धारण बड़ी सूक्ष्मता से किये जाने की आवश्यकता है।</strong></span></p></blockquote>
<p>कार्यशाला में विनोद शर्मा, महर्षि, प्रणव, गौरव, सौरभ, आकांक्षा तिवारी, नित्प्रिया, सचिन, अलका भटनागर, आरती, कंचन, कविता आदि अनेक युवा व बड़ी उम्र के प्रतिभागी शामिल हुए।</p>
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<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/tej-prataps-wealth-started-showing-his-eyes-in-the-legislature/">तेज प्रताप की सम्पत्ति ही दिखाने लगी उनकी विधायकी को आँख</a></strong></span></p>
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		<title>आमिर खान को अवधी सिखाने वाले इस कलाकार की प्रेरणा रही रामलीला</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/ramlila-was-the-inspiration-of-this-artist-who-taught-awadhi-to-aamir-khan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 31 Jul 2021 12:09:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज़ ब्यूरो लखनऊ। सहजता के साथ समर्पण और निरंतर अभ्यास आपको विधा में विशेषज्ञ बना सकता है। प्रसिद्ध रंगकर्मी राजा अवस्थी से उनके रंगमंचीय सफर पर दुर्गा शर्मा की हुई बातचीत में यह बात सामने आई। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी गोमतीनगर परिसर में अकादमी अभिलेखागार के लिए हुई यह बातचीत अकीदमी फेसबुक पेज &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली न्यूज़ ब्यूरो </strong></span></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> सहजता के साथ समर्पण और निरंतर अभ्यास आपको विधा में विशेषज्ञ बना सकता है। प्रसिद्ध रंगकर्मी राजा अवस्थी से उनके रंगमंचीय सफर पर दुर्गा शर्मा की हुई बातचीत में यह बात सामने आई। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी गोमतीनगर परिसर में अकादमी अभिलेखागार के लिए हुई यह बातचीत अकीदमी फेसबुक पेज पर जीवंत चल रही थी। बहुत से रंगप्रेमियों ने कार्यक्रम का सजीव प्रसारण देखा और सुना और पसंद करने के संग अपनी टिप्पणियां दीं।</p>
<p>अकादमी अवार्ड से नवाजे जा चुके हरिशंकर अवस्थी उर्फ राजा अवस्थी का स्वागत करते हुए अकादमी सचिव तरुण राज ने कहा कि मंचीय  अनुभव ही रंगकर्मियों की धरोहर होते हैं, जिनसे आगे की पीढ़ी बहुत कुछ सीख सकती है। उम्मीद है यह रिकार्डिंग भी उसी शृंखला में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगी।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-230147 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/07/raja-awasthi.jpg" alt="" width="640" height="445" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/07/raja-awasthi.jpg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/07/raja-awasthi-300x209.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/07/raja-awasthi-110x75.jpg 110w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>राजा अवस्थी ने बताया कि उनका सफर चंदरनगर आलमबाग लखनऊ में भरत की छोटी से भूमिका से शुरू हुआ और फिर आगे जाकर रामलीला में शायद ही कोई भूमिका छूटी हो। रामलीला का यही स्थल उनकी लगन, मेहनत और निरंतर अभ्यास का प्रेरणस्रेात रहा जिसने परम्परागत रामलीला से आधुनिक रंगमंचीय प्रयोगों के लिए उन्हें आत्मविश्वास दिया। कुंवर कल्याण सिंह, राजेश्वर बच्चन जैसे नाट्य निर्देशकों के साथ रंगमंच करने का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि नार्वे में सन् 1991 में हुए विश्व नाट्य समारोह मे भाग लेना उनके रंगमंचीय जीवन का चरम था, जहां 35 देशों के बीच सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ द्वारा निर्देशित मेघदूत लखनऊ के इस नाटक नाटक को प्रथम स्थान मिला और लखनऊ रंगजगत के संग उन्हें ख्याति मिली। </strong></span></p></blockquote>
<p>अपने द्वारा मुंशी प्रेमचंद की कहानी कफन के अवधी रूपांतरण और निर्देशन का अनुभव सामने रखते हुए उन्होंने बताया कि यह नाटक देखकर कुमुद नागर ने इसे दूरदर्शन में प्रस्तुत करने के लिए चुना। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के साथ निर्देशित किये संस्कृत नाटकों का लम्बा अनुभव सामने रखते हुए राजा अवस्थी ने बताया कि संस्कृत नाटकों में अभिनेता की तल्लीनता ने उन्हें बेहद आकर्षित करती है, जबकि ये तल्लीनता हिन्दी या अन्य भाषाओं में उतनी नहीं दिखती।</p>
<p>दूरदर्शन के साथ किये नाटकों व नीम का पेड़ व आधा गांव जैसे टीवी धारावाहिकों का जिक्र करते हुए उन्होने कहा कि आज के कलाकारों की नई पीढ़ी तो पहले टीवी धारावाहिकों में अभिनय की सोचती है और फिर इसी सोच के साथ रंगमंच से जुड़ती है। कई महोत्सवों में पुरस्कृत हुए फिल्म यथार्थ के लिए अपने फिल्मी सफर की शुरुआत बताते हुए उन्होंने ‘लगान’ में आमिर खान को अवधी संवाद सिखाने के अनुभव सामने रखे और बताया कि स्वदेश में निर्देशक आशुतोष गोवारिकर ने शाहरुख खान का परिचय कराते हुए कहा था कि ये वही राजा अवस्थी हैं जिन्हें लगान में डाइरेक्टर के अलावा सीन ‘कट’ कहने का अधिकार था।</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/india-will-take-over-the-responsibility-of-the-chairman-of-the-united-nations-security-council/">संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी संभालेगा भारत</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/be-careful-it-will-come-like-flu-and-spread-like-smallpox/">सावधान रहिये ये फ़्लू की तरह आएगा और चेचक की तरह फैल जायेगा</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/one-year-ban-on-three-sri-lankan-cricket-players-this-was-the-reason/">श्रीलंका के तीन क्रिकेट खिलाड़ियों पर साल भर का बैन, यह थी वजह</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/that-girl-among-the-corpses-and/">डंके की चोट पर : लाशों के बीच वो लड़की और …</a></strong></span></p>
<p>इसी तरह पत्नी व अन्य परिवारीजनों के सहयोग के उदाहरण और अनुभव सामने रखे। अकादमी की नाट्य सर्वेक्षक शैलजाकान्त के समन्वय में हुए इस आनलाइन फेसबुक कार्यक्रम में तकनीकी सहयोग पवन तिवारी का रहा।</p>
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		<title>क्रान्तिकारियों सरीखी अहम रही स्वतंत्रता आंदोलन में नाट्य लेखकों की भूमिका</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/the-role-of-play-writers-in-the-freedom-movement-was-important-like-revolutionaries/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 16 Jul 2021 12:47:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज़ ब्यूरो लखनऊ। स्वाधीनता संग्राम में क्रान्तिकारियों, राजनेताओं की तरह लेखकों- नाटककारों की भूमिका भी राष्ट्रीय चेतना जगाने और देश को आजाद कराने में उल्लेखनीय रही है। विभिन्न मुद्दों पर चेतना जाग्रत करने का ऐसा ही कार्य रचनाधर्मी लेखन में आज भी कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी ने आजादी का अमृत &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली न्यूज़ ब्यूरो </strong></span></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> स्वाधीनता संग्राम में क्रान्तिकारियों, राजनेताओं की तरह लेखकों- नाटककारों की भूमिका भी राष्ट्रीय चेतना जगाने और देश को आजाद कराने में उल्लेखनीय रही है। विभिन्न मुद्दों पर चेतना जाग्रत करने का ऐसा ही कार्य रचनाधर्मी लेखन में आज भी कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी ने आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत ‘स्वतंत्रता आंदोलन में नाट्य लेखन की भूमिका’ विषय पर आयोजित वेबिनार में कुछ ऐसे ही विचार प्रतिभागी लेखकों ने व्यक्त किया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-228561 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/07/SNA.jpg" alt="" width="640" height="480" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/07/SNA.jpg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/07/SNA-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>वेबिनार में विद्वान लेखकों का स्वागत करते हुए अकादमी के सचिव तरुण राज ने कहा कि आज का विषय कई दृष्टियों से अहम है। आजादी के लिए किसान, नेता, मजदूर, कलाकार, साहित्यकार सब अपने-अपने तरह से आजादी के लिए संघर्ष कर रहे थे। बेंगलुरु सहित कई विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रम का हिस्सा बने नाटक ‘अलख आजादी की’ और बहुचर्चित नाटक ‘सिंहासन खाली है’ के लेखक सुशील कुमार सिंह ने कहा कि उस दौर में एक ओर हम गोरों के अत्याचार और स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे थे तो दूसरी ओर अपनी रूढ़ियों से आजादी के लिए भी जूझ रहे थे।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>ऐतिहासिक तथ्य व उदाहरण रखते हुए उन्होंने कहा कि तब पारसी थियेटर में राष्ट्रीय चेतना जगाने वाले सिकंदर-पोरस जैसे नाटक लिखे गये तो भारतेंदु हरिश्चन्द्र ने अंधेर नगरी, भारत दुर्दशा जैसे प्रतीकात्मक बिम्बों वाले नाटक लिखे, जहां विदूषक सरीखे पात्र टीका-टिप्पणी कर लोगों को यथार्थ से परिचित कर चेताते थे। गीत भी खूब रचे गये। साथ ही भारतेन्दु ने जाति परमो धर्मः व वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति जैसे नाटक रचकर रूढ़ियों को तोड़ने का प्रयास किया। यहां अंग्रेजों ने व्यापार के लिए मानवीयता को तार-तार किया और इसी दमन के खिलाफ आजादी से पहले बहुत से नाटक लिखे गये। अपने रचनाकर्म का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इतने संघर्षों से मिली आजादी को आज कई मायनों में संरक्षित करना हमारे लिए आवश्यक है।</strong></span></p></blockquote>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-228562 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/07/SNA-2.jpg" alt="" width="640" height="401" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/07/SNA-2.jpg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/07/SNA-2-300x188.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>सत भासे रैदास जैसे अनेक नाटक रचने वाले राजेशकुमार ने वैश्विक आंदोलनों में प्रतिरोध की संस्कृति को रेखांकित करते हुए बताया कि भारत में 1857 से पहले रंगकर्म में ऐसा प्रतिरोध नहीं था। पारसी शैली के नाटक पूर्वार्ध में सत्ता के साथ रहे। किसान विद्रोह पर आधारित 1876 में लखनऊ में हुए नाटक ‘नीलदर्पण’ के प्रदर्शन को रोका गया। इसके बाद अंग्रेजों द्वारा ड्रामेटिक पर्फामेंस एक्ट लाना इस बात का प्रमाण है कि अंग्रेज नाटकों और रंगमंच के प्रभावों से किसकदर भयभीत थे। उन्होंने भारतेंदु हरिश्चन्द्र, जयशंकर प्रसाद, आगा हश्र कश्मीरी, नारायण प्रसाद बेताब, राधेश्याम कथावाचक, श्रीकृष्ण पहलवान, विजन भट्टाचार्य, अली सरदार जाफरी, भीष्म साहनी, ख्वाजा अहमद अब्बास आदि के नाटकों का जिक्र किया।</p>
<p>लेखक विजय पण्डित ने यह मानते हुए अपनी बात रखी कि उस दौर में नाट्य लेखन ही नहीं, सहीं सम्पूर्ण रंगकर्म स्वाधीनता आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाला रहा है। शचीन्द्रनाथ टैगोर रचित बांग्ला नाटक का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि तब गीत अनिवार्य तत्व के रूप में नाटकों का हिस्सा होते थे। पहले बंगाल, हिन्दी परिक्षेत्र और फिर मराठी क्षेत्र आदि सभी जगह लेखन व रंगमंच में समानांतर प्रतिरोध शुरू हुआ। यहां नौटंकी जैसे लोकनाटकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। तिलक जैसे राजनेता भी नाट्य दलोें को बहुत महत्व देते थे।</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/see-the-battle-of-danish-siddiquis-camera-in-pictures/">तस्वीरों में देखिये दानिश सिद्दीकी के कैमरे की जंग</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/preparation-to-open-100-agricultural-schools-in-jharkhand/">झारखंड में 100 कृषि पाठशालाएं खोलने की तैयारी</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/now-bhu-will-remove-every-problem-of-eyes/">अब आँखों की हर समस्या दूर करेगा बीएचयू</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/is-the-government-just-for-spectacle/">डंके की चोट पर : हुकूमत क्या सिर्फ तमाशा देखने के लिए है</a></strong></span></p>
<p>अंतिम वक्ता लेखक संगम पाण्डेय ने अंग्रेजों द्वारा शोषण की दोहरी भूमिका की चर्चा करते हुए कहा कि इस बात से भी इन्कार नहीं किया जा सकता कि ब्रिटिश राज के कारण ही यहां आधुनिकता के उपक्रम विकसित हुए। 1857 के आसपास अंग्रेजों द्वारा शोषण चरम पर था। यद्यपि इससे पहले मुगलकाल में भी अत्याचार खूब हुआ किन्तु रस, छंद से निकलकर भारतीय रंगमंच मं यथार्थवाद का आरम्भ नीलदर्पण से हुआ। गोविंदराम सेठी शाद, बेचैन शर्मा उग्र व किशनचन्द्र जेबा के नाटकों की चर्चा भी उन्होंने इसी संदर्भ में की। अंत में वेबिनार को संचालन कर रही अकादमी की नाट्य सर्वेक्षक शैलजाकांत ने सभी वक्ताओं और वेबिनार में शामिल दर्शकों-श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।</p>
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