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	<title>आदिवासी Archives &#060; Jubilee Post | जुबिली पोस्ट</title>
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	<description>News &#38; Information Portal</description>
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		<title>माटी का क्रंदन :अंधे विकास की खातिर !</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/on-the-name-of-development/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Utkarsh Sinha]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 15 Dec 2025 09:01:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[स्पेशल स्टोरी]]></category>
		<category><![CDATA[आदिवासी]]></category>
		<category><![CDATA[भारतभूमि]]></category>
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					<description><![CDATA[स्मिता जैन &#8220;रेवा&#8221;  आदिवासी भारतभूमि का सबसे बड़ा समाज जो कि देश के प्राकृतिक संसाधनों की सदियों से ना केवल रक्षा कर रहा बल्कि अपना जीवन यापन प्रकृति के साथ भी कर रहा है किन्तु आज सबसे अधिक खतरे में क्योंकि वह जल, जंगल,जमीन पर सदियों से मूलनिवासी की तरह रह रहा है लेकिन आज &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>स्मिता जैन &#8220;रेवा&#8221; </strong></span></p>
<p><img decoding="async" class="alignleft wp-image-332636 size-thumbnail" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/12/WhatsApp-Image-2025-12-09-at-15.45.01-150x150.jpeg" alt="" width="150" height="150" />आदिवासी भारतभूमि का सबसे बड़ा समाज जो कि देश के प्राकृतिक संसाधनों की सदियों से ना केवल रक्षा कर रहा बल्कि अपना जीवन यापन प्रकृति के साथ भी कर रहा है किन्तु आज सबसे अधिक खतरे में क्योंकि वह जल, जंगल,जमीन पर सदियों से मूलनिवासी की तरह रह रहा है लेकिन आज सरकार और पूंजीपतियों के कारण उसे बेदखल किया जा रहा है, पहले आदिवासी को वनवासी बनाया और अब उनसे उनके निवास स्थानों को छीना जा रहा है। वह भी तब देश के सर्वोच्च पद पर एक आदिवासी महिला विराजमान हैं। क्या अब वह भी सिर्फ एक कठपुतली बन कर अपना कार्यकाल पूरा कर रही हैं? ऐसे में वह आदिवासी समाज किससे अपनी पीड़ा बताये?</p>
<p>विकास और खनन के लिए मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ उत्तराखंड झारखंड बिहार राजस्थान गुजरात महाराष्ट्र उत्तरप्रदेश आदि राज्यों में वर्षों पुराने पेड़ों, पहाड़ों , नदियों, जंगलों को निर्दयतापूर्वक आज धड़ाधड़ काटा जा रहा है। जबकि सबसे अधिक सरकारी योजनाओं को उसी कमजोर समाज के लिए बनाया जाता है किन्तु ऐसा लगता है कि उनके हिस्से को लूटा जा रहा है उन्हीं का हितैषी बनकर। और इवेंट मैनेजमेंट से उनके हिस्से को रूपयों को पानी की तरह बर्बाद कर दिया गया है और हमारा सुशिक्षित उपभोक्ता समाज एक बार फिर से अपनी कायराना भरी चुप्पी के साथ सिर्फ देख कर अनदेखा कर रहा है।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>क्या उस कायर समाज को शुद्ध हवा,जल, जंगल और नदी, पहाड़,अनाज एवं अन्य वस्तुओं की तो जैसे ज़रूरत ही नहीं है। क्योंकि अगर उसे कमी होगी तो उनकी राम राज्य वाली जो सरकार है ना उनके लिए विदेशों से आयात कर लेगी और इस पर वह सो कालड डबल स्टैंडर्ड, सभ्य समाज खुश होकर उस संसाधनों को हथियाने वाली सरकार को फिर से चुनाव में मजबूती से जीताने में अपना महान योगदान भी दे सकती है लेकिन अपने जल जंगल जमीन के संरक्षकों की कोई मदद नहीं कर सकती हैं।</strong></span></p></blockquote>
<p>फिर दुनिया भर में बढते हुए जल,वायु,धरती प्रदूषण, के बारे में बात करना, बड़े बड़े भव्य आयोजन करना, वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित करना सिर्फ एक प्रोपेगेंडा नहीं है क्या जिसमें आम जनता को गुमराह किया जा रहा है जबकि मुख्य रूप से सरकार और पूंजीपति वर्ग इसके लिए जवाबदार है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-333012 aligncenter" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/12/WhatsApp-Image-2025-12-14-at-10.56.04.jpeg" alt="" width="1046" height="697" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/12/WhatsApp-Image-2025-12-14-at-10.56.04.jpeg 1046w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/12/WhatsApp-Image-2025-12-14-at-10.56.04-300x200.jpeg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/12/WhatsApp-Image-2025-12-14-at-10.56.04-1024x682.jpeg 1024w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/12/WhatsApp-Image-2025-12-14-at-10.56.04-768x512.jpeg 768w" sizes="auto, (max-width: 1046px) 100vw, 1046px" /></p>
<p>इससे तो अच्छे हमारे पूर्वज कितने समझदार और प्रकृति को संजोकर रखने वाले होंगे जिन्होंने इस शस्यश्यामला धरती को स्वर्ग बनाने में पूरी तरह से सहयोग दिया हमारे लिए और आने वाले पीढ़ियों के लिए। जिन्होंने जंगलों और पहाड़ों को बचाने के लिए अद्भुत मंदिर और महल एवं सुरंग का निर्माण किया ताकि हमारे पेड़ पौधे और संसाधन बचे रहे और यह इकोसिस्टम ना केवल इंसानों के लिए बल्कि हर उस जीवन के लिए जो धरती पर सांस लेता है और छोड़ता है मानव समाज की जरूरत जन्म से लेकर मृत्यु तक पेड पौधों पर ही आश्रित होती है।</p>
<p>वर्तमान मनुष्य भले ही अपनी तकनीकी ज्ञान और प्रयोग पर गर्व करे और कहें कि उसे प्राकृतिक संसाधनों की आवश्यकता नहीं है लेकिन यह सब असंभव है क्योंकि तकनीक पेट भरने के लिए अनाज और, शुदध हवा सांसों की खातिर हमें नहीं दे सकती हैऔर हम सब कुछ भले ही प्राप्त करले तकनीक से।</p>
<p><span style="color: #000000;">(स्मिता जैन &#8220;रेवा&#8221; स्वतंत्र लेखन करती हैं, यह उनके निजी विचार हैं)</span></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>झारखंड में BJP से नाराज आदिवासी बन सकते हैं बड़ी मुसीबत, जानें वजह</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/tribals-angry-with-bjp-in-jharkhand-can-become-a-big-problem-know-the-reason/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Supriya Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 13 Jun 2024 12:21:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[इण्डिया]]></category>
		<category><![CDATA[bjp]]></category>
		<category><![CDATA[आदिवासी]]></category>
		<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज डेस्क झारखंड में इसी साल नवंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसकी तैयारी भी शुरू हो गई है। जेएमएम की अगुआई वाली राज्य सरकार के कामकाज में तेजी देख कर तो यही लगता है कि इंडिया ब्लाक लोकसभा चुनाव से भी बेहतर परिणाम की उम्मीद विधानसभा चुनाव में कर रहा है। अभी तक &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff"><strong>जुबिली न्यूज डेस्क</strong></span></p>
<p>झारखंड में इसी साल नवंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसकी तैयारी भी शुरू हो गई है। जेएमएम की अगुआई वाली राज्य सरकार के कामकाज में तेजी देख कर तो यही लगता है कि इंडिया ब्लाक लोकसभा चुनाव से भी बेहतर परिणाम की उम्मीद विधानसभा चुनाव में कर रहा है। अभी तक झारखंड में लोकसभा चुनाव की गहमागहमी थी। अब सभी दल अपना ध्यान विधानसभा चुनाव पर ही केंद्रित करेंगे।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-296737 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2024/03/bjp-2-768x432-1.webp" alt="" width="948" height="533" /></p>
<p>भाजपा तो अभी केंद्र में सरकार बन जाने की खुशियां मनाने में ही व्यस्त दिख रही है। हालांकि लोकसभा चुनाव के परिणाम भाजपा के अनुकूल नहीं रहे। लगातार दो चुनावों से राज्य की कुल 14 में 12 सीटों पर जीतती रही भाजपा और उसके सहयोगी आजसू को इस बार नौ सीटों पर आना पड़ा है। एक-एक पर सिमटे झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) और कांग्रेस ने इस बार पांच सीटों पर जीत दर्ज की है। पांच सीटों में तीन पर जेएमएम को जीत मिली है तो दो सीटें कांग्रेस की झोली में गई हैं।</p>
<h3><span style="color: #0000ff">आदिवासियों की नाराजगी क्यों</span></h3>
<p>झारखंड में आदिवासी समाज की पुरानी मांग रही है खतियान आधारित स्थानीय नीति और नियोजन नीति। 2019 में सीएम बनने के बाद जेएमएम नेता हेमंत सोरेन ने पहले तो ऐसी नीतियां बनाने से इनकार कर दिया था, लेकिन बाद में विधानसभा से दोनों नीतियों के बिल पास करा दिए और राज्यपाल के पास भेज दिया। राज्यपाल ने संवैधानिक खोट बता कर इन्हें वापस कर दिया। अब जेएमएम को यह कहने का मौका मिल गया कि हमने तो अपना काम कर दिया, भाजपा के इशारे पर राज्यपाल ने ही अड़ंगा फंसा दिया। साफ और सीधे दिल के आदिवासी समाज ने हेमंत की बातों पर यकीन कर लिया। इस बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने झारखंड के भ्रष्टाचार की परतें उधेड़ने शुरू कीं। सीएम रहते हेमंत सोरेन पर पहले पद का दुरुपयोग कर खनन पट्टा लेने के आरोप लगे। फिर जमीन घोटाले में उनका नाम और गिरफ्तारी हो गई। इसे जेएमएम ने आदिवासी मुख्यमंत्री होने का खामियाजा बता कर प्रचारित किया। हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन ने भी भावनात्मक ढंग से इसे भुनाना शुरू किया। नतीजा सबके सामने है। लोकसभा में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को लोकसभा की तीन सीटें गंवानी पड़ गईं।</p>
<h3><strong><span style="color: #0000ff">BJP ने बदलाव किया</span></strong></h3>
<p>बीजेपी ने 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद खुद में बदलाव किया। रघुवर दास को प्रदेश की राजनीति से हटा कर संगठन में राष्ट्रीय स्तर की पहले जिम्मेवारी दी गई। फिर उन्हें ओडिशा का राज्यपाल बना दिया गया। भाजपा के प्रदेश नेतृत्व की कमान आदिवासी समाज से ही आने वाले झारखंड के पहले सीएम बाबूलाल मरांडी को सौंपी गई। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अनुसूचित जाति (एससी) से आने वाले अमर बाउरी को बनाया गया। मरांडी ने झारखंड के लगातार दौरे किए। इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ, जो इस बार लोकसभा चुनाव के नतीजों में साफ-साफ दिख भी गया है। अब भाजपा को नई रणनीति पर गौर फरमाना होगा। इधर हेमंत सोरेन को जेल भेजे जाने की घटना को जेएमएम ने आदिवासी विरोधी कदम बता कर आदिवासी समाज को भड़का दिया है। अगर कोई करिश्मा नहीं हुआ तो इस बार भी विधानसभा चुनाव में भाजपा के नुकसान की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Rajasthan election स्पेशल : ये 5 जातियों तय करेगी कौन होगा राजस्थान का KING</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/rajasthan-election-special-these-5-castes-will-decide-who-will-be-the-king-of-rajasthan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Nov 2023 14:19:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[इण्डिया]]></category>
		<category><![CDATA[स्पेशल स्टोरी]]></category>
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		<category><![CDATA[राजस्थान चुनाव स्पेशल]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली स्पेशल टीम अलवर। राजस्थान में 25 नवंबर को मतदान होना है। कौन वहां पर बाजी मारेगा ये तीन दिसम्बर को पता चल जायेगा। कांग्रेस से लेकर बीजेपी ने बीते एक महीनों से जमकर वहां प्रचार-प्रसार किया है। इतना ही प्रत्याशियों ने जीत के लिए पसीना बहाया है। जनसंपर्क कर जनता का दिल जीतने में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली स्पेशल टीम</strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>अलवर।</strong> </span>राजस्थान में 25 नवंबर को मतदान होना है। कौन वहां पर बाजी मारेगा ये तीन दिसम्बर को पता चल जायेगा। कांग्रेस से लेकर बीजेपी ने बीते एक महीनों से जमकर वहां प्रचार-प्रसार किया है। इतना ही प्रत्याशियों ने जीत के लिए पसीना बहाया है।</p>
<p>जनसंपर्क कर जनता का दिल जीतने में कांगे्रस से लेकर बीजेपी ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। जहां एक ओर कांग्रेस फिर से अपनी वापसी का दावा कर रही है तो दूसरी तरफ बीजेपी को उम्मीद है कि हर बार की तरफ इस बार पांच साल बाद राजस्थान में सत्ता परिवर्तन होगा।</p>
<p>दरअसल राजस्थान के चुनावी इतिहास में एक रिवाज है कि वहां पर हर पांचवें साल सत्ता बदल जाती है लेकिन कांग्रेस कहती है कि इस बार रिवाज बदलेंगे और कांग्रेस फिर से सत्ता में लौटेंगी।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-289978" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2023/11/Screenshot-2023-11-24-193600-1024x498.jpg" alt="" width="618" height="301" /></p>
<p>हालांकि ये भविष्य के गर्भ में है कि किसकी वहां पर सरकार बनती है लेकिन इसके बावजूद लोगों ने अटकले लगानी शुरू कर दी है। राजस्थान की राजनीति में पांच जातियों पर निर्भर है कि किसकी सरकार बनेगी।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff6600;"><strong>राजस्थान की राजनीति में पकड़ रखने वाले कई लोगों का मानना है कि पांच जातियां पर पूरी समीकरण टिका हुआ है। जाट, आदिवासी, राजपूत, गुर्जर और दलितों पर ही पूरा खेल टिका हुआ है। मीडिया रिपोट्र्स की माने तो कुछ आंकड़े इसी तरफ इशारा भी कर रहे हैं।</strong><strong>अगर देखा जाये तो राजस्थान में 89 फीसदी हिंदूओं का बोलबाला है जबकि 11 फीसदी अल्पसंख्यक समुदाय है। इसी तरह से नौ प्रतिशत मुस्लिम आबादी है।</strong></span></p></blockquote>
<p>गुर्जर और राजपूतों की बात की जाये तो ये क्रमश:नौ-नौ प्रतिशत है। 12 फ़ीसदी जाट और 13 फ़ीसदी आदिवासी समुदाय के लोग रहते हैं।</p>
<p>अगर दलितों की बात की जाये तो राजस्थान में 18 प्रतिशत है और ऐसे में ये पांच जातियां पूरे राजस्थान में सरकार बनने और बिगड़ाने का दम-खम रखते हैं।</p>
<p>ऐसे में कांग्रेस हो या फिर बीजेपी सभी इन पांच जातियों के सहारे अपनी सत्ता का दावा कर रहे हैं लेकिन ये देखना होगा कि कौन-कौन लोग किसे वोट देते हैं। कुल मिलाकर राजस्थान में सत्ता किसको मिलेगी वो जाट, आदिवासी, राजपूत, गुर्जर और दलितों पर निर्भर है।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>महिला सिपाहियों ने अपना दूध पिलाकर बचाई इस आदिवासी बच्ची की जान</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/women-constables-saved-the-life-of-this-tribal-girl-by-feeding-her-milk/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 05 May 2022 05:55:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[इण्डिया]]></category>
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		<category><![CDATA[गैंगरेप]]></category>
		<category><![CDATA[थाना प्रभारी]]></category>
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		<category><![CDATA[राजस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[ललितपुर]]></category>
		<category><![CDATA[क़ानून व्यवस्था]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज़ ब्यूरो नई दिल्ली. ललितपुर में थाना प्रभारी ने गैंगरेप का शिकार 13 साल की बच्ची के साथ खुद भी रेप कर क़ानून व्यवस्था के माथे पर जो कलंक लगाया है उसकी वजह से लोगों का पुलिस पर से भरोसा उठ रहा है लेकिन हर पुलिसकर्मी इस तरह की राक्षसी प्रवृत्ति का नहीं होता &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #0000ff;">जुबिली न्यूज़ ब्यूरो</span> </strong></p>
<p><strong>नई दिल्ली.</strong> ललितपुर में थाना प्रभारी ने गैंगरेप का शिकार 13 साल की बच्ची के साथ खुद भी रेप कर क़ानून व्यवस्था के माथे पर जो कलंक लगाया है उसकी वजह से लोगों का पुलिस पर से भरोसा उठ रहा है लेकिन हर पुलिसकर्मी इस तरह की राक्षसी प्रवृत्ति का नहीं होता है. राजस्थान के कोटा इलाके बारां जिले की दो महिला सिपाहियों ने इंसानियत की जो मिसाल पेश की है वैसी दूसरी मिसाल ढूंढ पाना कम से कम पुलिस विभाग में तो आसान नहीं होगा.</p>
<p>बारां के सारथल इलाके में सड़क पर नशे में धुत्त पड़े एक व्यक्ति के पास भूख प्यास से निढाल पड़ी ढाई महीने की बच्ची को देखकर पुलिसकर्मी द्रवित हो गए. दो महिला सिपाही पूजा और मुकलेश ने तुरंत उस बच्ची को ज़मीन से उठाया और बारी-बारी से उसे अपना दूध पिलाकर उस मासूम का पेट भरा और उसकी जान बचाई. इन दोनों महिला सिपाहियों ने उस अनजान बच्ची की तब तक देखरेख की जब तक कि उसकी माँ थाने नहीं पहुँच गईं.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-255015 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/rajasthan.jpg" alt="" width="640" height="346" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/rajasthan.jpg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/05/rajasthan-300x162.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>जानकारी के अनुसार पुलिस को सूचना मिली कि सारथल इलाके में बेहोश पड़े एक शख्स के साथ एक मासूम बच्ची भी है जो काफी खराब हालत में है. पुलिस मौके पर पहुंची तो बेहोश पड़ा व्यक्ति नशे में धुत्त था. उसके पास मौजूद ढाई महीने की मासूम आदिवासी बच्ची भूख से निढाल थी. भीषण गर्मी में मासूम बच्ची की ऐसी हालत देखकर महिला सिपाही काफी द्रवित हो गईं. महिला सिपाही मुकलेश और पूजा ने बच्ची को ज़मीन से उठा लिया और दोनों ने बारी-बारी से बच्ची को अपना दूध पिलाकर उसका पेट भरा. इन दोनों सिपाहियों के बच्चे बहुत छोटे हैं.</p>
<p>यह मामला बुधवार 4 मई की दोपहर का है. राधेश्याम काथोडी नाम का शख्स अपनी ढाई महीने की बच्ची को गोद में लेकर पैदल ही 15 किलोमीटर दूर जा रहा था. उसने रास्ते में शराब पी और नशे की वजह से जंगल में गिरकर बेसुध हो गया. पुलिस को जानकारी मिली तो पुलिस घटनास्थल से दोनों को उठाकर थाने लाई. जहाँ दोनों महिला सिपाहियों ने उस बच्ची की ज़िन्दगी बचाई.</p>
<p>पुलिस ने बच्ची की माँ को सूचना भिजवाई. जब तक वह थाने नहीं पहुँच गई तब तक दोनों महिला सिपाहियों ने उस बच्ची का पूरा ध्यान रखा और माँ के आने पर उसे सुरक्षित सौंप दिया. यह एक ऐसी मिसाल है जो पुलिस विभाग का सर ऊंचा करने के लिए काफी है.</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/newborn-saved-his-life-the-police-set-an-example-for-humanity/">नवजात की जान बचा पुलिस ने पेश की मानवता की मिसाल</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/so-the-madhya-pradesh-police-is-a-victim-of-depression/">…तो डिप्रेशन का शिकार है मध्य प्रदेश पुलिस</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/i-was-also-silent-on-his-murder-now-my-number-has-come/">डंके की चोट पर : उसके कत्ल पे मैं भी चुप था, मेरा नम्बर अब आया</a></strong></span></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>झारखंड सरकार की इस लिकर पालिसी से होगा राज्य के राजस्व का बड़ा नुक्सान</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/this-liquor-policy-of-jharkhand-government-will-result-in-huge-loss-of-revenue-of-the-state/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 21 Feb 2022 10:55:26 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[अर्थ संवाद]]></category>
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		<category><![CDATA[सेल्स टैक्स]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज़ ब्यूरो रांची. झारखण्ड में लिकर उद्योग के हितधारकों और उपभोक्ताओं ने राज्य सरकार द्वारा नई एक्साइज़ पॉलिसी बनाने के कथित कदम पर आंशका जताई है. जिसके लिए सरकार छत्तीसगढ़ मॉडल को दोहराना चाहती है और साथ ही वितरण एवं रीटेल सेल्स का नियन्त्रण विशेष रूप से राज्य निगम को देने पर विचार कर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली न्यूज़ ब्यूरो </strong></span></p>
<p><strong>रांची.</strong> झारखण्ड में लिकर उद्योग के हितधारकों और उपभोक्ताओं ने राज्य सरकार द्वारा नई एक्साइज़ पॉलिसी बनाने के कथित कदम पर आंशका जताई है. जिसके लिए सरकार छत्तीसगढ़ मॉडल को दोहराना चाहती है और साथ ही वितरण एवं रीटेल सेल्स का नियन्त्रण विशेष रूप से राज्य निगम को देने पर विचार कर रही है.</p>
<p>झारखण्ड सरकार ने एक्साइज़ पॉलिसी पर सलाह लेने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम से संपर्क किया है. ऐसे में हितधारक झारखण्ड सरकार के इस कदम पर सवाल उठा रहे हैं क्योंकि छत्तीसगढ़ नीति को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है और इस नीति के पीछे की मंशा को लेकर हैरानी जताई गई है.</p>
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<p>झारखण्ड, छत्तीसगढ़ और आस-पास के कई अन्य राज्यों में काम करने वाले एल्कोहल बेवरेज उद्योग के दिग्गजों के अनुसार, इस क्षेत्र में लिकर के सेवन की आदतें यहां की जनसांख्यिकी पर निर्भर करती हैं. ऐसे में मूल तथ्यों पर विचार किए बिना लिकर पॉलिसी को दोहराने से न सिर्फ राजस्व संग्रहण को नुकसान होगा बल्कि उपभोक्ताओं में भी उलझन बढ़ेगी, क्योंकि इस बात की पूरी संभावना है कि लिकर खरीदने वाले उपभोक्ता अपने पड़ोसी राज्यों से पसंदीदा ब्राण्ड खरीदना पसंद करेंगे.</p>
<p>लिकर के सेवन की आदतों पर बात करते हुए उद्योग जगत के दिग्गजों ने बताया कि झारखण्ड के उपभोक्ता भारत में निर्मित विदेशी लिकर को पसंद करते हैं, वहीं छत्तीसगढ़ के उपभोक्ता देश की अपनी लिकर को पसंद करते हैं. झारखण्ड की कुल आबादी 3.5 करोड़ है, जिसमें से आदिवासी आबादी 26 फीसदी है. वहीं छत्तीसगढ़ की कुल 2.5 करोड़ की आबादी में से आदिवासी आबादी 32 फीसदी है.</p>
<p>उद्योग जगत के दिग्गजों ने बताया कि पारम्परिक आदिवासी स्वदेशी लिकर को पसंद करते हैं. इस तथ्य की पुष्टि इस बात से होती है कि 2020-21 के दौरान 70.54 लाख मामलों में स्वदेशी लिकर बेची गई. इसके विपरीत इसी अवधि के दौरान झारखण्ड में 25.66 लाख मामलों में स्वदेशी लिकर बेची गई. स्पष्ट है कि झारखण्ड भारत में निर्मित विदेशी लिकर पर ज़्यादा निर्भर है.</p>
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<p>आंकड़ों पर रोशनी डाली जाए तो 2020-21 में झारखण्ड में लिकर की कुल बिक्री में से 35 फीसदी बिक्री भारत में निर्मित स्वदेशी लिकर और बियर की हुई तथा 30 फीसदी बिक्री स्वदेशी लिकर की हुई. वहीं समान अवधि के दौरान छत्तीसगढ़ में लिकर की कुल बिक्री में से 26 फीसदी बिक्री भारत में निर्मित विदेशी लिकर की, 57 फीसदी स्वदेशी लिकर की और 17 फीसदी बिक्री बियर की हुई. इन सभी आंकड़ों को देखते हुए लिकर पॉलिसी और कारोबार के पहलू अलग होने चाहिए.</p>
<p>अचिन्त्य कुमार शॉ, प्रेज़ीडेन्ट, झारखरण्ड खुदरा शराब विक्रेता संघ ने भी नई एक्साइज़ नीति का ज़ोरदार विरोध किया है. उन्होंने कहा कि तीन साल यानि 2016-19 तक झारखण्ड की लिकर शॉप्स का संचालन राज्य स्वामित्व की झारखण्ड राज्य बेवरेजेज़ कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा किया जाता था और इस दौरान राजस्व के लक्ष्य पूरे नहीं हुए.</p>
<p>उन्होंने अपनी बात को जारी रखते हुए कहा कि अगले तीन साल यानि 2019-22 के बीच लिकर शॉप्स प्राइवेट प्लेयर्स को दे दी गईं और अब यह तीन साल की अवधि समाप्त होने जा रही है. शॉ ने बताया कि इस अवधि में राज्य में कोविड लॉकडाउन के बावजूद एक्साइज़ के लक्ष्य पूरे हुए हैं.</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>शॉ ने कहा कि झारखण्ड सरकार द्वारा अपनाई गई छत्तीसगढ़ अडवाइज़री में राज्य एक्साइज़ विभाग के द्वारा गलत आंकड़े दिए गए हैं, इसमें तथ्यों को छिपाने के लिए सेल्स टैक्स को शामिल किया गया है. शॉ ने बताया कि उन्होंने इस विषय में राज्य के मुख्य सचिव और वित्तीय सचिव को लिखा है.</strong></span></p></blockquote>
<p>इन सब पहलुओं के बीच झारखण्ड में छत्तीसगढ़ लिकर पॉलिसी और मॉडल को दोहराने से राज्य सरकार सहित किसी भी हितधारक को लाभ नहीं होगा. ऐसे में, राज्य में लिकर चेन से जुड़े विभिन्न हितधारकों ने झारखण्ड सरकार से आग्रह किया है कि आगामी बजट में नई एक्साइज़ पॉलिसी की घोषणा करते समय व्यवहारिक कदम उठाएं. उन्होंने यह भी कहा है कि बोल्ड लिकर पॉलिसी से न सिर्फ सरकार का राजस्व बढ़ेगा बल्कि इस क्षेत्र में नया निवेश भी आकर्षित होगा और साथ ही रोज़गार के नए प्रत्यक्ष एवं परोक्ष अवसर भी उत्पन्न होंगे.</p>
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