50 विधायकों का समर्थन, राहुल गांधी के करीबी… फिर भी क्यों CM नहीं बन पाए वेणुगोपाल? जानें 5 वजहें

जुबिली स्पेशल डेस्क
नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम । कांग्रेस ने गुरुवार को बड़ा फैसला लेते हुए वीडी सतीशन को केरल का नया मुख्यमंत्री घोषित कर दिया। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में केसी वेणुगोपाल का नाम सबसे आगे माना जा रहा था और दावा किया जा रहा था कि उन्हें करीब 50 विधायकों का समर्थन हासिल है। इसके बावजूद आखिरी समय में सतीशन ने बाजी पलट दी और हाईकमान का भरोसा जीत लिया।
अब सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि मजबूत दावेदार होने के बावजूद वेणुगोपाल सीएम नहीं बन पाए? आइए जानते हैं वो 5 बड़े कारण, जिन्होंने पूरे समीकरण को बदल दिया।
1. ज़मीनी पकड़ और लोकप्रियता
वीडी सतीशन की सबसे बड़ी ताकत उनकी मजबूत ज़मीनी छवि रही। पार्टी के आंतरिक फीडबैक और सर्वे में यह साफ हुआ कि कार्यकर्ताओं और आम समर्थकों के बीच उनकी लोकप्रियता वेणुगोपाल से कहीं ज्यादा है। यही फैक्टर हाईकमान के फैसले में निर्णायक साबित हुआ।
2. पार्टी में बगावत का खतरा
सतीशन ने साफ संकेत दे दिया था कि वे किसी भी हालत में वेणुगोपाल के नेतृत्व में काम नहीं करेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री पद से कम किसी भी भूमिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। इससे कांग्रेस नेतृत्व को पार्टी में संभावित बगावत और टूट का खतरा नजर आने लगा।
3. राहुल गांधी की भूमिका
मामला सुलझाने के लिए राहुल गांधी ने खुद हस्तक्षेप किया। उन्होंने मल्लिकार्जुन खरगे के साथ चर्चा के बाद वेणुगोपाल से लंबी बातचीत की। राहुल गांधी ने उन्हें समझाया कि संगठन महासचिव के रूप में उनकी भूमिका ज्यादा महत्वपूर्ण है और भविष्य में उनके लिए बड़ी जिम्मेदारियां हो सकती हैं। अंततः वेणुगोपाल ने पार्टी एकजुटता को प्राथमिकता देते हुए पीछे हटने का फैसला लिया।
4. एंटनी फैक्टर
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ए के एंटनी की राय भी इस फैसले में अहम रही। उन्होंने सुझाव दिया कि मुख्यमंत्री वही बने, जिसकी पकड़ जनता और कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत हो। एंटनी का मानना था कि सतीशन पिछले कुछ वर्षों में लेफ्ट सरकार के खिलाफ सबसे आक्रामक चेहरा रहे हैं।
5. IUML और वायनाड समीकरण
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) का समर्थन भी सतीशन के पक्ष में गया। कांग्रेस के लिए IUML का साथ बेहद अहम है। माना जा रहा है कि वेणुगोपाल की तुलना में सतीशन के IUML नेतृत्व से बेहतर संबंध हैं। साथ ही वायनाड की राजनीतिक स्थिति और IUML का प्रभाव भी सतीशन के पक्ष में गया।
विधायकों की संख्या भले ही वेणुगोपाल के पक्ष में दिख रही थी, लेकिन ज़मीनी लोकप्रियता, संगठनात्मक संतुलन और सहयोगी दलों के समर्थन ने अंततः वीडी सतीशन को मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचा दिया।



