स्कूल में खेल कम्पलसरी था, इसलिए खेलना शुरू किया पर बाद में यह जरूरत बन गई : आंशिक गुप्ता

  • तैराकी और स्कैटिंग में भी हाथ आजमाया पर आकर्षित किया निशानेबाजी ने
  • सिल्वर मेडल जीत कर खुशी हो रही है लेकिन, गोल्ड मेडल जितना था ख्वाब

जुबिली स्पेशल डेस्क

गौतम बुद्ध नगर/नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित “खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स, उत्तर प्रदेश 2022” में रविवार को आयोजित 10 मीटर एयर राइफल मिक्स टीम में दिल्ली यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स काउंसिल की ओर से खेलते हुए सिल्वर मेडल जीतने वाली (मिक्स टीम) आंशिक गुप्ता को खेल को चुनने का मौका 7वीं क्लास में मिला था। उनके अनुसार 7वीं कक्षा में हर किसी को कोई न कोई स्पोर्ट्स खेलना था।

मैंने पहले तैराकी और फिर स्कैटिंग में हाथ आजमाया लेकिन यह दोनों ही गेम्स मुझे पसंद नहीं आये। फिर मुझे निशानेबाजी करने का मौका मिला और मुझे यह गेम बहुत अच्छा लगा। इसके बाद तो मैंने इसे ही खेलना शुरू कर दिया।

आंशिक गुप्ता बताती है कि वह 2017 में 7वीं क्लास में थी और आज वह कॉलेज में पोलिटिकल साइंस की पढ़ाई कर रही है। लेकिन इस समय पढ़ाई से ज्यादा खेल पर ध्यान दे रही है और प्रति दिन 4-6 घँटे की प्रैक्टिस कर रही है।अपने सपने को साकार करने में अपनी मां उर्मिला गुप्ता और व्यवसायी पिता विश्वनाथ गुप्ता के साथ साथ अपनी बहन वर्तिका की अहम भूमिका मानती है।

वह बताती है कि किस तरह से उनकी बहन उनके हर मैच में उनके साथ होती है और कहा खेल में कमी रही इसके बारे में बताती है। इसके साथ ही जब वह कमजोर पड़ती है तो उन्हें यह सम्बल भी देती है।

आंशिक का लक्ष्य ओलंपिक पदक है। उन्हें 2020 खेलो इंडिया गेम्स (गोवाहाटी) में गोल्ड मेडल मिल चुका है और अब ओलंपिक से पहले वर्ल्ड चैंपियन में देश के लिए पदक लाना है। खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स को एक बेहतरीन मंच मानती है और इसका आयोजन जितना बढ़िया तरीके से हुआ है उससे वह काफी खुश हैं।

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