तो क्या कमलेश तिवारी की हत्या में भाजपा नेता का हाथ है


न्यूज डेस्क
दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश को लेकर टिप्पणी की थी कि, हम उत्तर प्रदेश सरकार से तंग आ चुके हैं। ऐसा लगता है यूपी में जंगलराज है। कोर्ट द्वारा टिप्पणी करने के 24 घंटे नहीं बीते कि सूबे राजधानी लखनऊ में सरेआम एक हिंदू नेता की हत्या कर हत्यारे फरार हो गए।
फिलहाल इस मामले में पुलिस को अभी कभी कोई खास सफलता नहीं मिली हैं लेकिन पुलिस के मुखिया ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही हत्यारों का खुलासा किया जायेगा।
योगी सरकार लगातार कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर निशाने पर है। राजधानी ही नहीं सूबे के अन्य जिलोंमें भी कानून-व्यवस्था का हाल ठीक नहीं है। भाजपा की सरकार में इसी अक्टूबर माह में ही बीजेपी के तीन नेताओं की हत्या कर दी गई। देवबंध में चौधरी यशपाल, बस्ती में कबीर तिवारी और सहारनपुर में पार्षद धारा सिंह की हत्या हो गई। यह तीनों घटनाए 8 अक्टूबर से लेकर 13 अक्टूबर के बीच में हुई। यह तीनों मामला चूंकि राजधानी का नहीं था इसलिए इतना तूल नहीं पकड़ा लेकिन कमलेश तिवारी की राजधानी में हत्या हुई तो मामले ने तूल पकड़ लिया। उनके समर्थक सड़क पर उतर गए।
इन घटनाओं से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी कितनी सही है। सीएम योगी विकास के दावे करते नहीं थक रहे और अपराधी अपना काम करने में नहीं थक रहे। यूपी पुलिस कितनी सक्रिय है इसका भी अंदाजा लगाया जा सकता है।
गर्म हुई सियासत
गौरतलब है कि शुक्रवार को सरेआम हिंदू महासभा के पूर्व नेता कमलेश तिवारी की हत्या के बाद से सूबे का माहौल गर्मा गया है। पुलिस के मुखिया ने जल्द ही हत्यारों को सामने लाने की बात कही है लेकिन मामला सुलझने के बजाए उलझता जा रहा है। अब तक की तफ्तीश में कमलेश की हत्या का कनेक्शन गुजरात से जोड़ा जा रहा था, लेकिन इस बीच इस मामले में नया मोड़ आ गया है।
हिंदू महासभा के पूर्व नेता कमलेश तिवारी की हत्या के मामले में उनकी मां और उनके भतीजे ने हत्या का आरोप भाजपा के एक नेता पर लगाया है। कमलेश तिवारी की मां ने कहा है कि इसके पीछे स्थानीय भाजपा नेता शिवकुमार गुप्ता का हाथ है। तिवारी की मां के मुताबिक दोनों में एक मंदिर को लेकर झगड़ा चल रहा था।
वहीं कमलेश के भतीजे ने भी बीजेपी नेता पर हत्या का आरोप लगाते हुए कहा है कि बीजेपी नेता शिवकुमार गुप्ता से मंदिर की जमीन को लेकर विवाद चल रहा था, दस दिन पहले उन्होंने कमलेश को जान से मारने की धमकी दी थी। वहीं कमलेश की पत्नी ने भी बीजेपी नेता शिवकुमार गुप्ता पर आरोप लगाया है।
इससे पहले कमलेश तिवारी की पत्नी ने अपने पति की हत्या के पीछे बिजनौर के दो मौलानाओं का हाथ बताया था। बताया जा रहा है कि इन दोनों ने पैगंबर मोहम्मद के कथित अपमान के लिए हिंदू महासभा के पूर्व नेता के सिर पर ईनाम घोषित किया था। मामले की जांच एसआईटी कर रही है और इन दोनों पर धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
मालूम हो कि सीतापुर के रहने कमलेश तिवारी की शुक्रवार को लखनऊ में हत्या कर दी गई थी। यूपी पुलिस हत्यारों की तलाश कर रही है और इस बीच गुजरात एटीएस ने सूरत से तीन लोगों को हिरासत में लिया है।
वहीं पुलिस को शक है कि कमलेश तिवारी की हत्या उनके किसी जान पहचान वाले ने की है। प्राथमिक जांच ये जानकारी सामने आई है कि हत्यारों को कमलेश तिवारी ने चाय पिलाई और दही बड़े खिलाए। इससे ऐसा लग रहा है कि हत्यारे जान पहचान वाले होंगे और इसके पीछे कोई आपसी रंजिश होगी। इस मामले की छानबीन में 10 टीमें लगाई गई हैं। मौके पर एक पिस्तौल बरामद हुई है, उसकी जांच की जा रही है। इलाके के आसपास लगे सभी सीसी कैमरे खंगाले जा रहे हैं।

सरकार पर है दबाव
चूंकि 21 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के 11 सीटों पर उपचुनाव है, इसलिए योगी सरकार इस घटना को लेकर दबाव में है। कमलेश तिवारी के समर्थक सड़क पर उतर गए है और प्रदर्शन कर रहे हैं। इसलिए बीजेपी सरकार को भी डर है कि कहीं विपक्ष इसे मुद्दा बनाकर चुनाव में भुना न ले।
हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कमलेश तिवारी हत्याकांड के मामले एसआईटी का गठन किया है। एसआईटी में लखनऊ के आईजी एसके भगत, लखनऊ के एसपी क्राइम दिनेश पुरी और एसटीएफ के डिप्टी एसपी पीके मिश्रा शामिल हैं। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री योगी ने कमलेश तिवारी हत्याकांड में प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी से रिपोर्ट भी मांगी है।
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