जुबिली न्यूज डेस्क
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और आदिवासी आंदोलन के सबसे बड़े चेहरों में से एक दिशोम गुरु शिबू सोरेन को ‘राज्य पिता’ (Father of the State) के रूप में अधिसूचित करने की मांग की है। JMM के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज कुमार पांडेय ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा है।
4 अगस्त को हुआ था शिबू सोरेन का निधन
शिबू सोरेन का निधन 4 अगस्त 2025 को दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में हुआ था। वे 81 वर्ष के थे और लंबे समय से किडनी संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनके निधन के बाद पूरे राज्य में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया था।
ज्ञापन में क्या कहा गया?
JMM प्रवक्ता ने अपने ज्ञापन में लिखा कि:”झारखंड का कण-कण दिशोम गुरु का ऋणी है। उन्होंने झारखंड के निर्माण के लिए बचपन गंवाया, जवानी खपाई और बुढ़ापा संघर्ष में बिताया।”
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि शिबू सोरेन ने जेल की यातनाएं झेली, आंदोलन के दौरान उपहास और षड्यंत्रों का सामना किया, लेकिन वे झारखंड राज्य निर्माण तक डटे रहे।
राज्य पिता घोषित करने की मांग क्यों?
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महात्मा गांधी को ‘राष्ट्रपिता’ की तरह, शिबू सोरेन को ‘राज्य पिता’ का दर्जा देने की मांग की गई है
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सभी राजकीय कार्यालयों में उनकी तस्वीर लगाना अनिवार्य करने का भी प्रस्ताव
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आने वाली पीढ़ियों को उनके संघर्ष से अवगत कराने की आवश्यकता बताई गई
JMM प्रवक्ता का बयान:
“हम दिशोम गुरु का कर्ज तो नहीं चुका सकते, लेकिन उन्हें ‘राज्य पिता’ का दर्जा देकर उनका सम्मान ज़रूर कर सकते हैं। झारखंड उनके बनाए राज्य की तरह उनकी स्मृति को भी सहेजे।”
बीजेपी और अन्य दलों की प्रतिक्रिया?
अब इस मांग को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आना बाकी हैं। JMM की यह पहल राज्य की राजनीति में एक संवेदनशील और भावनात्मक मुद्दा बन सकती है।
दिशोम गुरु की विरासत
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झारखंड आंदोलन के पुरोधा
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कई बार मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री रहे
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आदिवासी समाज और वन अधिकारों के लिए संघर्ष का चेहरा
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झारखंड के जन-जन में ‘गुरुजी’ के नाम से प्रसिद्ध