संजय सिंह तो बहाना हैं आप को बढ़ाना है

शबाहत हुसैन विजेता
लखनऊ. उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार इन दिनों आम आदमी पार्टी पर मेहरबान है. आप सांसद संजय सिंह पर राजद्रोह का मुकदमा कायम कराया गया है. पिछले तीन महीने में संजय सिंह के खिलाफ यूपी में 13 मुक़दमे दर्ज कराये गए हैं.
सांसद संजय सिंह 20 सितम्बर को लखनऊ में गिरफ्तारी देने का एलान कर दिल्ली चले गए हैं. उनका कहना है कि मेरे साथ 12 दलों के 37 सांसदों का समर्थन है. बहुत संभव है कि 20 सितम्बर को संजय सिंह गिरफ्तारी देने लखनऊ आयें तो उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया जाए.

मुद्दा संजय सिंह पर दर्ज मुकदमों का नहीं है. दरअसल मुकदमे दर्ज कर संजय सिंह के बहाने आम आदमी पार्टी को उत्तर प्रदेश में पाँव जमाने की जगह दी जा रही है. दिल्ली में सरकार बनाने के बाद आम आदमी पार्टी से उत्तर प्रदेश की तरफ अपना रुख किया भी था. 2014 में आम आदमी पार्टी ने यूपी में 77 उम्मीदवार उतारे थे. वाराणसी से पीएम मोदी के खिलाफ खुद अरविन्द केजरीवाल और लखनऊ से राजनाथ सिंह के खिलाफ फिल्म अभिनेता जावेद जाफरी उतरे थे. इस चुनाव में आम आदमी पार्टी अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी. वाराणसी का चुनाव दुनिया भर में चर्चा का विषय बना था. अरविन्द केजरीवाल के लिए आम आदमी पार्टी ने 50 लाख रूपए खर्च भी किये थे. केजरीवाल हालांकि दूसरे नम्बर पर रहे लेकिन उन्हें भी इतने वोट हासिल नहीं हुए कि वह उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी की ज़मीन तैयार होने का ख़्वाब देख पाते.
पूरे देश की बात करें तो आम आदमी पार्टी ने 2014 में 430 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे लेकिन 2019 में अपनी हकीकत पहचानने के बाद सिर्फ 100 उम्मीदवार मैदान में उतारे.
आम आदमी पार्टी को पता है कि उत्तर प्रदेश में सियासी ज़मीन फिलहाल तैयार कर पाना आसान बात नहीं है लेकिन यूपी सरकार ने आप सांसद संजय सिंह पर मुकदमे लादकर उन्हें चर्चा का केंद्र बना दिया है.
योगी सरकार ने एनआरसी आन्दोलन के बाद प्रियंका गांधी को रिटायर्ड आईजी एस.आर.दारापुरी के घर जाने से रोकने के लिए जिस तरह से उनके पीछे पुलिस लगवाई और उनका रास्ता रोकने के जो हथकंडे अपनाए उसने प्रियंका गांधी और कांग्रेस के सामने यह सन्देश भेज दिया कि यूपी में पांव ज़माना बहुत मुश्किल काम नहीं है.

कोरोना काल में मजदूरों की पैदल घर वापसी के दौर में प्रियंका गांधी ने जब 1000 बसें देने का प्रस्ताव योगी सरकार को दिया तो योगी सरकार ने जो रवैया अपनाया उसमें बसें लेने का मन तो सरकार का नहीं था लेकिन प्रियंका के पक्ष में एक हवा को चलाना था, जो चल गई. इस हवा को चलाकर सरकार ने कांग्रेस को यह समझा दिया कि वह थोड़ी सी कोशिश कर लें तो उनकी सियासी ज़मीन फिर से तैयार हो सकती है.
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उत्साहित कांग्रेस ने जब वाकई अपने पाँव जमाने की कोशिशें तेज़ कर दीं और उनके धरने-प्रदर्शन तेज़ हो गए संजय सिंह को मोहरा बनाकर आम आदमी पार्टी को भी यूपी में अपने पाँव जमाने का मूक निमंत्रण दे दिया गया.
यूपी की योगी आदित्यनाथ की सरकार उत्तर प्रदेश में 2022 के चुनाव को बहुकोणीय बनाने की हर संभव कोशिश में लगी है. सरकार चाहती है कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी चुनाव के लिए जी-जान से जुट जाए और विपक्ष का वोट आपस में बंटकर बेकार हो जाए और उत्तर प्रदेश में बीजेपी सरकार की फिर से वापसी हो जाए.
योगी सरकार यह बात बखूबी जानती है कि वह समाजवादी पार्टी को शिकस्त देकर सत्ता में आयी थी लेकिन बीते साढ़े तीन साल में विकास के क्षेत्र में काम न होने से लोगों को अखिलेश यादव सरकार की फिर से याद आने लगी है. यह बात अखिलेश भी अच्छी तरह से जानते हैं इसीलिये वह विपक्ष वाली भूमिका से नदारद हैं. आप और कांग्रेस के मज़बूत होने से सबसे ज्यादा नुक्सान सपा का होगा और यही बीजेपी का फायदा होगा.


