RR vs RCB: क्या सेहत की दलील बचा पाएगी रोमी भिंडर को? डगआउट में मोबाइल विवाद पर BCCI का ‘एंटी-करप्शन’ प्रहार

हाइलाइट्स

  • राजस्थान रॉयल्स के मैनेजर रोमी भिंडर को BCCI (ACSU) का कारण बताओ नोटिस।
  • गुवाहाटी में RCB के खिलाफ मैच के दौरान डगआउट में फोन इस्तेमाल का वीडियो हुआ था वायरल।
  • PMOA नियमों के उल्लंघन का आरोप; 48 घंटे में मांगा जवाब।
  • भिंडर की दलील: खराब स्वास्थ्य के चलते बोर्ड से ली थी फोन रखने की विशेष अनुमति।

बीती 10 अप्रैल को गुवाहाटी के मैदान पर जब राजस्थान रॉयल्स और RCB के बीच रोमांचक मुकाबला चल रहा था, तब कैमरों की नजर डगआउट में बैठे टीम मैनेजर रोमी भिंडर पर टिक गई। भिंडर खुलेआम मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे थे और उनके बगल में बैठे युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी भी फोन की स्क्रीन में झांकते नजर आए।

IPL के कड़े PMOA (प्लेयर्स एंड मैच ऑफिशियल्स एरिया) नियमों के तहत, यह एक गंभीर अपराध माना जाता है। नियम कहते हैं कि मैनेजर फोन रख तो सकते हैं, लेकिन उसका इस्तेमाल केवल ड्रेसिंग रूम तक सीमित होना चाहिए।

ACSU का नोटिस: ’48 घंटे में दें जवाब’

वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैलने के बाद BCCI की एंटी-करप्शन और सुरक्षा यूनिट (ACSU) ने सोमवार को एक्शन लिया। भिंडर को भेजे गए नोटिस में दो टूक पूछा गया है कि उन्होंने नियमों को ताक पर रखकर डगआउट में फोन क्यों चलाया? हालांकि वीडियो में वह किसी से बात करते नहीं दिखे, लेकिन फोन का ‘डिस्प्ले’ ऑन होना ही भ्रष्टाचार विरोधी संहिता के उल्लंघन की श्रेणी में आता है।

इंसानियत बनाम नियम: क्या है भिंडर का पक्ष?

इस पूरे विवाद में एक ‘इमोशनल एंगल’ भी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रोमी भिंडर हाल ही में फेफड़ों की गंभीर बीमारी से उबरकर लौटे हैं और लंबे समय तक ICU में भर्ती रहे थे।

  • विशेष छूट का दावा: भिंडर ने दलील दी है कि उन्होंने अपनी नाजुक सेहत के कारण BCCI से डगआउट में फोन साथ रखने की अनुमति ली थी, ताकि इमरजेंसी की स्थिति में उन्हें बार-बार सीढ़ियां चढ़कर ड्रेसिंग रूम न जाना पड़े।
  • बोर्ड का तर्क: सवाल यह है कि क्या उन्हें फोन ‘रखने’ की अनुमति मिली थी या ‘इस्तेमाल’ करने की? साथ ही, खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी का उनके साथ फोन देखना मामले को और पेचीदा बना रहा है।

अब आगे क्या?

BCCI सचिव देवजित सैकिया पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि इस मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी। अब सबकी निगाहें भिंडर के जवाब पर टिकी हैं। यदि बोर्ड उनकी ‘स्वास्थ्य कारणों’ वाली दलील से संतुष्ट नहीं होता, तो उन पर भारी जुर्माना या बैन भी लग सकता है।

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