जुबिली स्पेशल डेस्क
अमेरिका ने भारत की प्रमुख ऊर्जा कंपनी Reliance Industries को वेनेज़ुएला से सीधे कच्चा तेल खरीदने के लिए जनरल लाइसेंस जारी किया है।
इस लाइसेंस के तहत कंपनी अब अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन किए बिना वेनेज़ुएला से तेल आयात कर सकेगी। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब वॉशिंगटन वेनेज़ुएला के ऊर्जा क्षेत्र पर लगे कुछ प्रतिबंधों में नरमी के संकेत दे रहा है।
रूस के तेल का विकल्प बन सकता है वेनेज़ुएला
विशेषज्ञों के मुताबिक, रिलायंस के लिए यह कदम रणनीतिक रूप से काफी अहम है। वेनेज़ुएला का भारी कच्चा तेल आमतौर पर छूट पर उपलब्ध होता है, जिससे रिफाइनिंग लागत कम होती है।
ऐसे में कंपनी रूस से मिलने वाली आपूर्ति के विकल्प के रूप में वेनेज़ुएला की ओर रुख कर सकती है। जानकारी के अनुसार, इस महीने की शुरुआत में रिलायंस ने ट्रेडिंग कंपनी Vitol से 20 लाख बैरल वेनेज़ुएलाई तेल भी खरीदा था।

भारत-अमेरिका ऊर्जा सहयोग को मजबूती
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ हटाने का ऐलान किया था और संकेत दिया था कि भारत अमेरिका से अधिक ऊर्जा आयात कर सकता है।
ऐसे में यह लाइसेंस दोनों देशों के बीच ऊर्जा साझेदारी को और मजबूत कर सकता है। माना जा रहा है कि भारतीय रिफाइनर फिलहाल अप्रैल डिलीवरी के लिए रूसी तेल की खरीद में सतर्क रुख अपना रहे हैं, जिससे संभावित व्यापार समझौते को भी गति मिल सकती है।
वेनेज़ुएला के निर्यात को भी सहारा
इस निर्णय से वेनेज़ुएला के तेल निर्यात को नई गति मिल सकती है। रिलायंस दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स का संचालन करती है और उसकी दो रिफाइनरियों की कुल क्षमता लगभग 14 लाख बैरल प्रतिदिन है।
पहले कंपनी वेनेज़ुएला से नियमित रूप से कच्चा तेल खरीदती थी, लेकिन 2025 में अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते यह प्रक्रिया रुक गई थी।
अब नए लाइसेंस के बाद रिलायंस के लिए रियायती दर पर कच्चा तेल हासिल करना आसान होगा, जिससे लागत घटाने और मुनाफा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
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