RBI ने रेपो रेट में की बड़ी कटौती, सस्ते होंगे लोन और EMI

जुबिली न्यूज डेस्क
नई दिल्ली। कर्ज़ लेने वालों और ईएमआई चुकाने वालों के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति (MPC) की दो दिवसीय बैठक के बाद रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट (0.50%) की बड़ी कटौती का ऐलान किया है। इसके बाद अब रेपो रेट 5.5 प्रतिशत पर आ गया है।

आरबीआई की मौद्रिक नीति बैठक 4 जून को शुरू हुई थी, जिसमें आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरों में बदलाव पर मंथन किया गया। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि रेपो रेट में की गई यह कटौती बीते छह महीनों में तीसरी बार की गई है।
इससे पहले फरवरी और अप्रैल महीने में भी RBI ने क्रमशः 25-25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की थी। उस समय रेपो रेट 6 फीसदी पर पहुंचा था, जिसे अब घटाकर 5.5 फीसदी कर दिया गया है।
सस्ते होंगे सभी तरह के लोन
रेपो रेट में कटौती से होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन सहित सभी तरह के कर्ज सस्ते हो जाएंगे। नई ब्याज दरों के लागू होते ही बैंक और वित्तीय संस्थान अपने लोन की ब्याज दरों में कटौती कर सकते हैं, जिससे ईएमआई भरने वालों को राहत मिलेगी।
गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि “इस फैसले से देश में घरेलू मांग को मजबूती मिलेगी और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। वैश्विक अर्थव्यवस्था की सुस्ती के बीच यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने का काम करेगा।”
एसडीएफ, एमएसएफ और सीआरआर में भी बदलाव
मौद्रिक नीति की बैठक में रेपो रेट के साथ-साथ अन्य प्रमुख दरों में भी संशोधन किया गया है:
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एसडीएफ (Standing Deposit Facility) रेट को 5.75% से घटाकर 5.25% कर दिया गया है।
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एमएसएफ (Marginal Standing Facility) रेट को 6.25% से घटाकर 5.75% किया गया है।
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कैश रिजर्व रेशियो (CRR) को 4% से घटाकर 3% कर दिया गया है।
इन सभी कटौतियों का सीधा असर बैंकों की फंडिंग लागत पर पड़ेगा, जिससे वे अधिक ऋण देने की स्थिति में होंगे।
निवेश और विकास दर को मिलेगा सहारा
RBI गवर्नर ने कहा कि अमेरिका द्वारा स्टील और एल्युमिनियम पर टैरिफ बढ़ाने जैसे वैश्विक झटकों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहेगी। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2026 के लिए GDP ग्रोथ रेट 6.5% रहने का अनुमान है।
तिमाही अनुसार विकास दर का अनुमान इस प्रकार है:
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पहली तिमाही: 6.5%
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दूसरी तिमाही: 6.7%
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तीसरी तिमाही: 6.6%
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चौथी तिमाही: 6.3%
उपभोक्ताओं और कारोबारियों को सीधा फायदा
विशेषज्ञों के अनुसार, इस कटौती से आम उपभोक्ताओं को सस्ते लोन के रूप में राहत तो मिलेगी ही, साथ ही रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और एमएसएमई सेक्टर को भी काफी फायदा होगा।
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होमbuyers को लंबी अवधि वाले लोन की ईएमआई में राहत
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ऑटो सेक्टर में गाड़ियों की बिक्री को बढ़ावा
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छोटे व्यवसायों के लिए पूंजी जुटाना आसान
संभावित जोखिम भी
हालांकि इस राहत के साथ कुछ जोखिम भी हैं। सस्ती ब्याज दरें अगर बहुत तेजी से कर्ज बढ़ाती हैं, तो भविष्य में महंगाई दबाव और एनपीए (NPA) बढ़ने की आशंका भी बनी रहती है।
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आरबीआई ने साफ किया कि अगर जरूरत पड़ी तो भविष्य में फिर से मौद्रिक नीति में बदलाव किया जा सकता है। RBI का यह कदम अर्थव्यवस्था को गति देने की दिशा में बड़ा फैसला माना जा रहा है। सस्ती दरों पर लोन मिलने से उपभोक्ताओं का खर्च बढ़ेगा और निवेश के लिए माहौल बेहतर होगा। बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में यह एक सकारात्मक संकेत है, जिसका असर आने वाले महीनों में देखने को मिलेगा।



