अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पुतिन की एंट्री: इस्लामाबाद वार्ता फेल होने के बाद रूस ने की मध्यस्थता की पेशकश

Russia-Iran-US Conflict News: मध्य पूर्व (Middle East) में गहराते युद्ध के बादलों के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शांति दूत की भूमिका निभाने की पेशकश की है। रविवार को पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से फोन पर बात की और अमेरिका व ईरान के बीच जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए ‘राजनीतिक और कूटनीतिक हल’ निकालने में मदद करने का भरोसा दिया।
इस्लामाबाद में आमने-सामने की बातचीत रही बेनतीजा
रूस का यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई ऐतिहासिक सीधी बातचीत बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई।
- 1979 के बाद पहली बार: यह 1979 की क्रांति के बाद वाशिंगटन और तेहरान के बीच पहली सीधी बातचीत थी।
- सीजफायर पर खतरा: वार्ता विफल होने से पिछले दो हफ्तों से जारी अस्थायी सीजफायर के टूटने का डर बढ़ गया है।
आखिर क्यों टूटी बातचीत?
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, बातचीत के विफल होने की मुख्य वजहें निम्नलिखित रहीं…
- परमाणु कार्यक्रम: ईरान ने अपने न्यूक्लियर हथियार बनाने के रास्ते को छोड़ने से इनकार कर दिया।
- बैलिस्टिक मिसाइलें: तेहरान की मिसाइल क्षमताओं पर दोनों देशों के बीच गहरी असहमति।
- होर्मुज स्ट्रेट: इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर नियंत्रण को लेकर आपसी मतभेद।
ईरान के पार्लियामेंट्री स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि उनकी टीम के “प्रगतिशील प्रस्तावों” के बावजूद वाशिंगटन ईरान का भरोसा जीतने में नाकाम रहा।
अमेरिका पर रूस के तीखे प्रहार
क्रेमलिन ने न केवल मध्यस्थता की पेशकश की, बल्कि अमेरिका की कड़ी आलोचना भी की। रूस ने आरोप लगाया कि:
- अमेरिका एक ‘काल्पनिक खतरे’ का बहाना बनाकर ईरान के संवैधानिक सिस्टम को नष्ट करना चाहता है।
- वाशिंगटन द्वारा ईरानी जनता से अपने नेताओं को सत्ता से हटाने की अपील को रूस ने ‘निंदनीय और अमानवीय’ करार दिया।
तिन का पुराना रुख
यह पहली बार नहीं है जब पुतिन ने इस क्षेत्र में हस्तक्षेप किया है। जून 2025 में भी, जब ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष चरम पर था, पुतिन ने जोर देकर कहा था कि परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विवादों को युद्ध से नहीं, बल्कि केवल कूटनीति से सुलझाया जा सकता है।
एक तरफ रूस खुद यूक्रेन के साथ युद्ध में उलझा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ वह मिडिल ईस्ट में अपनी कूटनीतिक धाक जमाने की कोशिश कर रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या वाशिंगटन, रूस की इस मध्यस्थता को स्वीकार करता है या तनाव और बढ़ता है।



