सोनभद्र की सड़क पर एक बार फिर प्रियंका चलाएंगी अपनी सियासी गाड़ी

न्‍यूज डेस्‍क

कांग्रेस पार्टी अपने नए अध्‍यक्ष की तलाश में लगातार बैठक कर रही है और सोनिया गांधी को अंतरिम अध्‍यक्ष बनाकर पार्टी की डूबती नाव को संभालने की कोशिश कर रही है। वहीं, दूसरी ओर पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा अपने सियासी वजूद को बचाने के लिए उत्‍तर प्रदेश में योगी सरकार के खिलाफ जमीनी लड़ाई लड़ रही हैं।

यूपी में योगी सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई छेड़ चुकी प्रियंका प्रदेश के हर मुद्दे पर सीएम योगी पर तीखा हमला करने से नहीं चुकती हैं। चाहे बात उन्‍नाव रेप कांड की हो या सोनभद्र जनसंहार की प्रियंका जमीन पर उतर सरकार और प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद करती हैं।

सोनभद्र जनसंहार में 10 लोगों की हत्‍या के बाद प्रियंका पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंची थी और उन्‍हें पार्टी की तरफ से 10-10 लाख रुपए देने का एलान किया था। इस दौरान योगी सरकार बैकफुट पर नजर आई थी। प्रियंका इस मुद्दे को फिर से भुनाने के लिए सोनभद्र के दौरे पर दोबारा जा रही हैं।

खबर है कि प्रियंका सोनभद्र नरसंहार पीड़ितों से मिलने उंभा गांव जाएंगी। प्रियंका कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ 13 अगस्‍त को उंभा पहुंचेंगी। जहां वे घटना के पीड़ितों से मुलाकात करेंगी।

प्रियंका गांधी का ये दौरा इसलिए भी अहम है क्‍योंकि दूसरी विपक्षी दल समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के नेता इस मुद्दे पर ज्‍यादा सक्रिय नहीं हैं और प्रियंका इस बात का फायदा उठाकर जनता की आवाज बनना चाहती हैं।

बता दें कि प्रियंका गांधी सोनभद्र मामले पर शुरुआत से ही सरकार को घेरती रही हैं। प्रियंका के मुआवज़े के ऐलान के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  भी सोनभद्र नरसंहार के पीड़ितों से मिले थे। प्रियंका गांधी के एक बार फिर सोनभद्र जाने की बात से यह तो साफ हो जाता है कि वह इस मामले को आसानी से ठंडा नहीं होने देंगी। वो चाहती हैं कि लोगों की स्मृति में ये मामला देर तक रहे।

बताते चले कि 17 जुलाई को सोनभद्र जिले के घोरावल के मूर्तियां गांव में बुधवार को जमीनी विवाद में ग्राम प्रधान और ग्रामीणों के बीच हुई हिंसक झड़प में गोली लगने से एक पक्ष के 10 लोगों की मौत हो गई। जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतकों में 6 पुरुष और 4 महिलाएं शामिल थे।

पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद प्रियंका ने 20 जुलाई को कहा था, ‘इन बच्चों ने अपने माता-पिता खो दिए हैं। कुछ परिवार ऐसे हैं, जिनके बच्चे और माता-पिता अस्पताल में भर्ती हैं। ये लोग पिछले डेढ़ महीने से अपनी दिक्कतों के बारे में प्रशासन को सूचित कर रहे थे।’

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