जेनेवा में परमाणु वार्ता, अमेरिका ने ईरान के सामने रखीं 5 सख्त शर्तें
जुबिली स्पेशल डेस्क
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच गुरुवार (26 फरवरी) को परमाणु समझौते को लेकर उच्च स्तरीय वार्ता हुई।
इस बातचीत का उद्देश्य न्यूक्लियर डील पर सहमति बनाना है, हालांकि तेहरान पर समझौता स्वीकार करने या संभावित सैन्य कार्रवाई का सामना करने का दबाव बढ़ता दिख रहा है। जेनेवा में हुई इस बैठक में अमेरिका ने ईरान के सामने कई कड़ी शर्तें रखीं।
जेनेवा में तीसरे दौर की बातचीत
ओमान की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता का तीसरा दौर जेनेवा में आयोजित किया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि न्यूक्लियर डील पर सहमति नहीं बनती है, तो ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। वहीं, ईरान कई अमेरिकी शर्तों को मानने के पक्ष में नहीं दिख रहा है।
अमेरिका की प्रमुख शर्तें
1. परमाणु संयंत्रों का विघटन : अमेरिका की मांग है कि ईरान अपने तीन प्रमुख परमाणु स्थलों—फोर्डो, नतान्ज और इस्फहान—को पूरी तरह नष्ट करे और अपने संवर्धित यूरेनियम को अमेरिका को सौंप दे।
2. यूरेनियम संवर्धन पर रोक : वॉशिंगटन चाहता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन को शून्य या बेहद सीमित स्तर तक रखे। हालांकि तेहरान अनुसंधान रिएक्टर को अपने पास रख सकता है।
3. प्रतिबंधों में ढील की शर्त : अमेरिका ने संकेत दिया है कि यदि ईरान शर्तें मानता है तो शुरुआती तौर पर प्रतिबंधों में सीमित राहत दी जा सकती है, और समझौता आगे बढ़ने पर और ढील संभव है। लेकिन समझौता न होने की स्थिति में और कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
4. सनसेट क्लॉज पर असहमति : अमेरिका किसी भी समझौते में समय-सीमा (सनसेट क्लॉज) शामिल करने के पक्ष में नहीं है। वह चाहता है कि समझौता बिना किसी निश्चित समाप्ति तिथि के लागू रहे।
5. संवर्धन कार्यक्रम को बंद करने की मांग : अमेरिका ने स्पष्ट रूप से ईरान से यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करने की मांग की है। जबकि ईरान इस मांग को खारिज करता रहा है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पहले ही यूरेनियम संवर्धन छोड़ने से इनकार करते हुए कहा था कि देश किसी भी दबाव या युद्ध की धमकी से नहीं डरेगा।
दोनों देशों के बीच जारी यह वार्ता क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसका असर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक संतुलन पर पड़ सकता है।


