यशोदा श्रीवास्तव
काठमांडू। विशेष महाधिवेशन के माध्यम से नए पार्टी अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ते ही नेपाली कांग्रेस गंभीर राजनीतिक संकट के दौर में प्रवेश कर चुकी है। पार्टी अध्यक्ष शेरबहादुर देउवा के तत्काल पद न छोड़ने के अडान और महामंत्री द्वय गगन थापा व विश्वप्रकाश शर्मा के पीछे न हटने के रुख ने कांग्रेस को औपचारिक विभाजन की दहलीज पर ला खड़ा किया है।
देउवा ने नियमित महाधिवेशन तक प्रतीक्षा करने का आग्रह करते हुए सीमित सहकार्य का प्रस्ताव रखा, लेकिन महामंत्रियों ने इसे अविश्वसनीय करार देते हुए साफ तौर पर अस्वीकार कर दिया। टिकट वितरण की विवादास्पद प्रक्रिया, विधान महाधिवेशन की वैधानिकता पर उठते सवाल और नेतृत्व परिवर्तन की जटिलता ने आपसी सहमति की संभावनाओं को और भी संकुचित कर दिया है।

महाधिवेशन हॉल से नए नेतृत्व के चयन का स्पष्ट संदेश निकल चुका है, लेकिन कानूनी, तकनीकी और समय-सीमा से जुड़ी जटिलताओं के कारण इस प्रक्रिया को निर्वाचन आयोग तक ले जाना बेहद कठिन दिखाई दे रहा है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
कांग्रेस के भीतर यह निष्कर्ष उभरकर सामने आ रहा है कि अब नेतृत्व के पास केवल दो ही रास्ते बचे हैं—या तो आज ही गगन थापा और विश्वप्रकाश शर्मा के साथ निर्णायक समझदारी की जाए, या फिर पार्टी को औपचारिक विभाजन के कठिन और ऐतिहासिक फैसले की ओर ले जाया जाए। नेपाली कांग्रेस के भविष्य को लेकर यह घड़ी अत्यंत निर्णायक मानी जा रही है।
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