Tuesday - 27 January 2026 - 1:08 PM

नेपाल चुनाव परिणाम पर पड़ोसी देशों की नजर 

यशोदा श्रीवास्तव

जेन जी आंदोलन में भारी नुकसान के बाद सत्ता में आई अंतरिम सरकार के वादे के मुताबिक नेपाल वक्त से पहले चुनाव की दहलीज पर है।

प्रधानमंत्री उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश सुशीला कार्की ने सत्ता संभालते ही छः महीने के भीतर चुनाव कराकर सत्ता सीन पार्टी को सरकार की कमान सौंप देने का वादा किया था।

सुशीला कार्की के वादे के अनुसार पांच मार्च को नेपाल प्रतिनिधि सभा का चुनाव तय है। नामांकन की तिथि समाप्त हो चुकी है। राजनीतिक दल और उनके प्रत्याशी अपने अपने क्षेत्रों में प्रचार और जनसंपर्क में जुटे गए हैं।

चुनाव आयोग के अनुसार प्रतिनिधि सभा के 165 सीटों के लिए नेपाल के मान्यता प्राप्त 68 राजनीतिक दलों के अलावा और स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में भी सैकड़ों उम्मीदवार मैदान में हैं।

निर्दल उम्मीदवारों में कई नामचीन चेहरे भी हैं जो अपने दलों से टिकट न पाने की वजह से निर्दल ही चुनाव लड़ने को मजबूर हुए। भारी उथल पुथल के बीच नेपाल में होने जा रहे इस चुनाव पर दुनिया की नजर है खासकर उन देशों की जो नेपाल के पड़ोसी राष्ट्र हैं जैसे भारत,चीन, पाकिस्तान आदि। नेपाल में हाल के दिनों में अमेरिका की भी दिलचस्पी बढ़ी है इसलिए उसे भी नेपाल के चुनाव परिणाम की उत्सुकता है।

नेपाल का यह चुनाव वाकई कई मायनों में दिलचस्प और महत्वपूर्ण है। नेपाली कांग्रेस जो नेपाल की सबसे पुरानी पार्टी है और इसका राजशाही के जमाने से ही लोकतंत्र की लड़ाई का इतिहास रहा है,अब परिवर्तित नेपाली कांग्रेस हो गई है।

इस पार्टी को कोइराला परिवार के प्रभुत्व वाली पार्टी कहा जाता था जिसका भारत से नजदीकियां रही है।

2021में सांगठनिक चुनाव में इस पार्टी से कोइराला परिवार का वर्चस्व टूट गया। सभापति के चुनाव में शेर बहादुर देउबा कोइराला परिवार के शेखर कोइराला को पराजित कर पार्टी के सभापति (अध्यक्ष) पद पर काबिज हुए थे।

देउबा पश्चिम नेपाल के डेडुल्धुरा क्षेत्र से 1991 से सांसद चुने जाते रहे और नेपाल के पांच बार प्रधानमंत्री रहे। पिछले महीने जेन जी आंदोलन में देउबा और उनकी पत्नी आरज़ू राणा को काफी प्रताड़ना सहनी पड़ी थी।

इस आंदोलन के बाद नेपाली कांग्रेस की छवि सबसे कमजोर नेतृत्व वाली पार्टी के रूप उभर कर सामने आई। तभी से देउबा पर विशेष राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाने की मांग जोर पकड़ रही थी।

देउबा जानते थे कि अधिवेशन का मतलब सभापति पद से उनकी छुट्टी करना है, इसलिए वे अधिवेशन के पक्ष में नहीं थे। लेकिन जैसा कि नेपाली कांग्रेस के विधान में है कि पार्टी के केंद्रीय समिति के 54 प्रतिशत सदस्य यदि चाहें तो अधिवेशन कभी भी बुलाया जा सकता है। इसी विधान के तहत पार्टी के दो महामंत्री गगन थापा और विश्व प्रकाश शर्मा ने अधिवेशन आहुति की जो चार दिन तक चला।

इस बीच देउबा न केवल अधिवेशन को अवैधानिक करार देने में जुटे रहे, गगन थापा, विश्व प्रकाश शर्मा और सह महामंत्री फरकुल्लाह मंसूर को पार्टी से निष्कासित करने का फरमान जारी कर दिया। अधिवेशन में 54 प्रतिशत से कहीं ज्यादा केंद्रीय समिति के सदस्यों की भागीदारी थी लिहाजा देउबा के निष्कासन के फरमान को न केवल नजर अंदाज कर दिया, सर्वसम्मति से गगन थापा को पार्टी का नया सभापति चुन लिया गया।

इस तरह नेपाली कांग्रेस अब गगन थापा के नेतृत्व वाली पार्टी हो गई है। इस चुनाव में देउबा को टिकट भी नहीं मिला।

नए नेतृत्व वाली नेपाली कांग्रेस ने इनकी जगह पर किसी अन्य को टिकट दे दिया है। देउबा के चुनाव न लड़ने से डेडुल्धुरा चुनाव क्षेत्र जो सुर्खियों में रहा करता था,इस बार चुनावी परिदृश्य से गायब है।

देउबा के शानदार राजनीतिक सफर का अंत इतना क्रूरतम होगा, इसका अंदाजा किसी को नहीं था।

इस चुनाव में चार खास चुनाव क्षेत्रों की चर्चा जोरों पर है। झापा क्षेत्र संख्या पांच जहां से पूर्व पीएम व एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली चुनाव मैदान में हैं। ओली अपनी पार्टी के घोषित पीएम का चेहरा हैं। इसी चुनाव क्षेत्र से काठमांडू के पूर्व मेयर वालेन शाह राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी से चुनाव मैदान में हैं। वालेन शाह भी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की ओर से पीएम के लिए घोषित चेहरा हैं।

इस चुनाव क्षेत्र में 35 बनाम 74 का नारा सुर्खियों में है। वालेन शाह पूर्व में इंजीनियर रहे हैं बाद में मशहूर रैपर हुए। युवाओं में खासा लोकप्रिय हैं। काठमांडू नगर निगम के मेयर का चुनाव निर्दल लड़ कर जीते थे। उन्होंने प्रतिनिधि सभा का चुनाव लड़ने के लिए मेयर पद से इस्तीफा दे दिया।

इनकी उम्र 35 वर्ष है और ओली की 74 वर्ष इसलिए इस चुनाव क्षेत्र की लड़ाई 35 बनाम 74 के बीच है। गोरखा क्षेत्र संख्या एक की भी चर्चा खूब है। यहां से शोसल मीडिया”हामी नेपाल” के जरिए युवाओं में पैठ बनाए सुडान गुरूंग राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं। सुडान पिछले दिनों सुर्खियों में तब आए जब उनकी शिनाख्त जेन जी आंदोलन के नायक के रूप में उभरी। हालांकि इस आंदोलन ने ओली सरकार के तख्तापलट के साथ नेपाल को दर्द भी बहुत दिया।

इसके बाद सुर्खियों में है सर्लाही का क्षेत्र संख्या चार। यहां से नेपाली कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष गगन थापा चुनाव मैदान में हैं। गगन थापा भी नेपाली कांग्रेस की तरफ से पीएम का चेहरा हैं। गगन थापा के अनुसार उनकी पार्टी बिना किसी गठबंधन के सरकार बनाएगी।

यदि ऐसा हो पाया तो नेपाल की राजनीति में चमत्कार होगा। तीसरे नंबर पर जिस चुनाव क्षेत्र की चर्चा है वह है रुकुम क्षेत्र संख्या एक। यहां से माओवादी केंद्र के अध्यक्ष व पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड चुनाव मैदान में हैं। प्रचंड का भी दावा सरकार बनाने का है।

प्रचंड नेपाल में राजशाही के खिलाफ जनयुद्ध के नायक के रूप में देखे जाते हैं। इस बार प्रचंड के चुनाव क्षेत्र में चुनावी मुकाबला बड़ा रोचक होने जा रहा है क्योंकि जनयुद्ध में अपने मां बाप को गंवा देने वाले प्रचंड के करीबी रहे युवा नेता संदीप पुन प्रचंड के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।

35 वर्षीय संदीप पुन प्रचंड के नेतृत्व वाले माओवादी केंद्र के छात्र संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रहे हैं। संदीप पुन प्रगतिशील लोकतांत्रिक पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं।
इस चुनाव में जो सबसे बड़ी बात है वह यह कि जितनी बड़ी पार्टियां हैं,इस बार बिना किसी गठबंधन के साथ अकेले चुनाव मैदान में हैं। 2008 में हुए संविधान सभा के चुनाव बाद यह पहला अवसर है जब बड़ी राजनीतिक पार्टियां अकेले चुनाव लड़ रही है और सभी को अपनी सरकार आने का भरोसा है।
पूर्व गृह मंत्री रवि लामी छाने की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी जिसका उदय पिछले चुनाव में धूमकेतु की तरह हुआ था,इस बार नेपाल के सभी क्षेत्रों में चुनाव लड़ रही है।

इतना ही नहीं जिस तेजी से इस पार्टी ने मधेश के जिलों में अपना प्रभाव बढ़ाया है और ढेर सारे बड़े नेता इस पार्टी से जुड़े हैं उससे चुनाव परिणाम में बड़े उलटफेर की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। रवि लामी छाने खुद भी चितवन दो से चुनाव लड़ रहे हैं। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को नेपाली कांग्रेस के बागी उम्मीदवारों से लाभान्वित होने की उम्मीद है। भारत सीमा से सटे नेपाल के कपिलवस्तु जिले के क्षेत्र संख्या एक से भारत में नेपाल के राजदूत रहे नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दीप कुमार उपाध्याय के बेटे आशीष शर्मा का टिकट कटना यहां के दो तीन क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है।

प्रतिनिधि सभा के उच्च सदन के 110 सीटें समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत भरी जाएगी, जिसके लिए राजनीतिक दलों ने अपने उम्मीदवारों की सूची चुनाव आयोग को पहले ही सौंप दी है। चुनाव में मिले मतों के प्रतिशत के आधार पर उच्च सदन में किस राजनीतिक दल के कितने सदस्य नामित किए जा सकते हैं,यह तय होता है।

उच्च सदन के प्रतिनिधियों का नाम राजनीतिक दलें अपने हिसाब से करती हैं। अभी जैसा कि नेपाल का चुनावी परिदृश्य दिख रहा है,उस हिसाब से किसी पार्टी के पक्ष में राय जाहिर करना जल्दबाजी होगी। नेपाल चुनाव में दिलचस्पी रखने वाले देश विदेश के विश्लेषक भी यह तय कर पाने की स्थिति में नहीं हैं कि नेपाल के चुनाव परिणाम का सीन क्या होगा ?

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