ये तस्वीर खून के आंसू रूला देगी… भूखी-प्यासी मर गई मां और बच्चा तब भी जगा रहा

स्पेशल डेस्क

पटना। कोरोना वायरस और लॉकडाउन की वजह से कई लोग लोग परेशान है और बेमौत मरने पर मजबूर है। प्रवासी मजदूरों को लेकर सरकार कितनी गम्भीर ये अब किसी से छुपा नहीं है। सरकारी मदद की आस में प्रवासी मजदूर तड़प रहे हैं और उनको पूछने वाला कोई नहीं है।

सोशल मीडिया पर हर दिन कोई न कोई तस्वीर आपको खून के आंसू रूला देगी। प्रवासी मजदूरों को लेकर एक और तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। लोग इस तस्वीर को देखकर रोने पर मजबूर है।

रअसल इस तस्वीर में देखा जा सकता है। एक बेबस और मजबूर मां भीषण गर्मी और भूख से ही स्टेशन पर दम तोड़ दिया और बच्चा इस मां को जगा रहा है और शायद उसे लग रहा है कि उसकी मां सो गई है लेकिन सच यह है कि मां इस दुनिया से चल बसी है।

पूरा मामला बिहार के मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन का बताया जा रहा है। कोरोनावायरस और लॉकडाउन अगर किसी को सबसे ज्यादा परेशान किया है तो वो केवल प्रवासी मजदूर। तस्वीर पर गौर करें तो बच्चा कफन को हटाकर मां को जगाना चाहता है।

स घटना से सभी लोग दुखी है। सोशल मीडिया पर इसकी फोटो और वीडियो शेयार किया जा रहा है। इस वीडियो में देखा जा सकता है। महिला जमीन पर पड़ी है और कपड़े से उसको ढक़ा गया है लेकिन मासूम बच्चा कफन को उठा रहा है और अपनी मां को जगाना चाहता है। इतना ही नहीं बच्चा कफन से खेलता भी नजर आ रहा है।

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कहा जा रहा है कि महिला की मौत गर्मी और भूख से हो गई। महिला अपने बच्चे के साथ श्रमिक ट्रेन से मुजफ्फरपुर पहुंची थी। उधर इस घटना के दौरान एक ढाई साल के बच्चे की मौत भूख और प्यास से हो गई। परिजन ने बताया कि ढाई साल के बच्चे की भी मौत भीषण गर्मी के कारण और ट्रेन में खाना-पानी नही मिलने के कारण बच्चे की हालत काफी बिगड़ गई और उसने स्टेशन पर ही दम तोड़ दिया। मां को दूध नहीं उतरा, जिससे कि वो बच्चे को दूध भी नहीं पिला सकी।

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कुल मिलाकर कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और सरकार लॉकडाउन के भरोसे हैं लेकिन इस दौरान प्रवासी मजदूरों की परेशानी अब भी सरकार को नजर नहीं आ रही है। प्रवासी मजदूर अब भी पैदल चल रहे हैं और सडक़ हादसे के शिकार हो रहे हैं। रेल की पटरियों के किनारो मजदूरों की लम्बी कतार अब भी देखी जा सकती है। सोशल मीडिया पर शायद ही कोई ऐसा दिन हो जब प्रवासी मजदूरों को लेकर इस तरह की फोटों वायरल न हो रही हो।  सरकार के दावे सब फेल हो रहे हैं।

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