बारामती, महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार (Ajit Pawar) की बुधवार सुबह बारामती में विमान दुर्घटना (Baramati Plane Crash) में मौत हो गई। 6 बार डिप्टी सीएम रहे अजित पवार का असामयिक निधन पूरे देश को शोक में डुबो दिया है। उनके अचानक जाने से महाराष्ट्र सहित पूरे देश में नेता और जनता संवेदना व्यक्त कर रहे हैं।

अजित पवार बुधवार को अपने बारामती राजनीतिक कार्यक्रमों और चुनावी रैलियों में शामिल होने के लिए जा रहे थे। इस हादसे में उनके साथ अन्य यात्रियों की भी मौत हुई।
PM नरेंद्र मोदी ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने ट्वीट किया:”अजित पवार जी जनता के नेता थे, जिनका जमीनी स्तर पर मजबूत जुड़ाव था. महाराष्ट्र के लोगों की सेवा में सबसे आगे रहने वाले एक मेहनती व्यक्तित्व के रूप में उनका बहुत सम्मान किया जाता था. प्रशासनिक मामलों की उनकी समझ और गरीबों और वंचितों को सशक्त बनाने का उनका जुनून भी काबिले तारीफ था. उनका असमय निधन बहुत दुखद है।”
अजित पवार की मौत के बाद महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए और बारामती के लिए रवाना हो गए।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) ने कहा:”महाराष्ट्र के बारामती में एक विमान दुर्घटना में उप मुख्यमंत्री श्री अजित पवार समेत कई लोगों की मृत्यु अत्यंत दुखद है. अजित पवार जी का असामयिक निधन अपूरणीय क्षति है. ईश्वर उनके परिवार और दुर्घटना में मारे गए अन्य सभी लोगों के परिवारों को इस आघात को सहन करने की शक्ति दें।”
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने कहा:”अजित पवार की मौत दुर्भाग्यपूर्ण है. वह मेरे करीबी मित्र थे और हमारे पारिवारिक संबंध भी थे. उनका जाना बहुत बड़ा नुकसान है. पार्टी की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि।”
पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) और केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल (CR Patil) भी अजित पवार के निधन पर भावुक नजर आए।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कहा:”महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री श्री अजित पवार जी और उनके सहयात्रियों की हवाई जहाज दुर्घटना में निधन अत्यंत पीड़ादायक है. इस शोक में महाराष्ट्र की जनता और पवार परिवार के साथ हूं।”
अजित पवार का राजनीतिक योगदान
अजित पवार महाराष्ट्र के प्रमुख नेताओं में से एक थे। 6 बार डिप्टी सीएम रहे और बारामती उनका राजनीतिक गढ़ माना जाता था। उनके नेतृत्व और लोक कल्याण के प्रयासों ने महाराष्ट्र के सहकारी क्षेत्र और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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