अहमद पटेल की जगह भरेंगे गांधी परिवार के ये पुराने वफादार नेता

जुबिली न्‍यूज डेस्‍क

नेतृत्व संकट से जूझ रही कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज वरिष्ठ नेताओं की मीटिंग बुलाई है। संभावना है कि इस मीटिंग में पार्टी के नए अध्यक्ष को लेकर विचार मंथन हो सकता है। खास बात यह है कि मीटिंग के लिए सोनिया और असंतुष्ट नेताओं के बीच पुल का काम मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ कर रहे हैं।

खबर है कि अहमद पटेल के निधन के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और परिवार के वफादार कमलनाथ पर भरोसा जताते हुए उन्हें नए संकटमोचक की भूमिका सौंपी है। सूत्रों की माने तो सोनिया चाहती हैं कि कमलनाथ जल्द ही कांग्रेस की कमान राहुल गांधी के हाथों दोबारा सौंपे जाने का रास्ता तैयार करें।

बता दें कि कुछ दिन पहले पार्टी के 23 वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर नेतृत्व के संकट को खत्म करने के लिए कदम उठाने की मांग की थी। इससे नाराज सोनिया अब तक इन नेताओं से मिलने से इनकार कर रही थीं, लेकिन कमलनाथ ने सोनिया के साथ असंतुष्ट नेताओं को भी मीटिंग के लिए मनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

सूत्रों की मानें तो एमपी में उपचुनाव के नतीजे आने के बाद से ही कमलनाथ पार्टी का संकट सुलझाने के लिए सक्रिय हो गए थे। यह भी कहा जा रहा है कि असंतुष्ट नेताओं को मनाने की जिम्मेदारी उन्हें सोनिया गांधी ने दी है। बीते 8 दिसंबर को कमलनाथ की सोनिया के साथ लंबी बैठक हुई थी। इसी बैठक में कमलनाथ को पार्टी का संकट दूर करने के लिए असंतुष्टों से बातचीत करने को कहा गया था।

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करीब एक महीने पहले अहमद पटेल की मृत्यु के बाद से सोनिया गांधी को अपने नए संकटमोचक की तलाश है। पिछले करीब दो दशक से पटेल सोनिया के सबसे विश्वस्तों में शामिल थे और पार्टी का हर संकट सुलझाने में उनकी भूमिका अहम होती थी, लेकिन उनकी मृत्यु के बाद पार्टी में यह जगह खाली है। गांधी परिवार के कई विश्वस्तों के असंतुष्टों में शामिल होने से सोनिया के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। ऐसे में कमलनाथ पार्टी के नए संकटमोचक हो सकते हैं।

कमलनाथ गांधी परिवार के पुराने वफादारों में शामिल हैं। अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के अलावा पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी भी उन पर भरोसा करती हैं। तीन दिन पहले ही कमलनाथ ने छिंदवाड़ा में कहा था कि वे अब आराम करना चाहते हैं। इसके बाद से कयास लग रहे हैं कि मध्य प्रदेश की राजनीति में उनकी सक्रियता कम होगी। अब यह अंदाजा लग रहा है कि वे कांग्रेस पार्टी के केंद्रीय संगठन में बड़ी भूमिका में नजर आ सकते हैं।

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