क्या खतरनाक है कोरोना का एटा वेरिएंट ?

जुबिली स्पेशल डेस्क

नई दिल्ली। देश में भले ही अब कोरोना केस कमजोर पड़ते नजर आ रहे हैं लेकिन कोरोना की तीसरी लहर से अब भी इनकार नहीं किया जा सकता है। आलम तो यह है कि कोरोना वायरस के नए-नए वेरिएंट सरकार की नींद उड़ाते नजर आ रहे हैं।

दूसरी ओर कोरोना वायरस के नए-नए वेरिएंट को लेकर कई तरह की बाते सामने आने लगी है। उधर वैज्ञानिक और विशेषज्ञ कोरोना वायरस को कैसे कम किया जाये इसको लेकर लगातार शोध कर रहे हैं लेकिन कर्नाटक के मंगलौर में कोरोना वायरस के ‘एटा’ वेरिएंट एक बार फिर चिकित्सा विशेषज्ञों को मुश्किलों और चिंताओं को बढ़ाता नजर आ रहा है।

स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना वायरस के ‘एटा’ वेरिएंट को लेकर एक बुलेटिन जारी किया है। इस बुलेटिन में बताया गया है कि एक आदमी कोरोना के एटा वेरिएंट से संक्रमित पाया गया है।

इस आदमी को लेकर यह भी बताया गया है कि इसने कतर की यात्रा चार माह पूर्व की थी। हालांकि कर्नाटक राज्य में कोरोना के इस नये यानी एटा वेरिएंट का कोई नया मामला नहीं है।

राज्य नोडल अधिकारी और कोविड -19 होल जीनोम सीक्वेंसिंग (डब्ल्यूजीएस) समिति के अध्यक्ष डॉ वी रवि ने बताया था कि राज्य में पहला एटा वेरिएंट का मामला अप्रैल 2020 में सामने आया था। हालांकि चिकित्सा विशेषज्ञों ने इस नये एटा वेरिएंट को लेकर कहा है कि इससे फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है।

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चिकित्सा विशेषज्ञों की माने तो यह वेरिएंट आज भी इओटा, कप्पा और लेम्ब्डा के साथ-साथ ‘वेरिएंट औफ इंटरेस्टÓ बना हुआ है. इन वेरिएंटों के संबंध में अभी शोध जारी है। इसके उलट कोरोना वायरस के अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा और डेल्टा प्लस वेरिएंट चिंता के कारण बने हुए हैं। इन वेरिएंटों ने संक्रमण की रफ्तार को तेज करने का काम किया है।

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चिकित्सा विशेषज्ञों ने कहा है कि इस ‘एटा’ वेरिएंट कोरोना की तीसरी लहर आने की संभावना नहीं है। उन्होंने यह भी बताया है कि यह वेरिएंट है पुराना लेकिन इसका पता अब चला है। अगर ये खतरनाक होता तो अब तक कई और केस इसके मिलने लगते।

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