जुबिली स्पेशल डेस्क
ईरान में बीते कुछ दिनों से सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। महंगाई और बदहाल आर्थिक हालात से नाराज़ लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए हैं।
कई जगहों पर हालात हिंसक हो गए, जिसमें अब तक कम से कम 6 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। प्रदर्शन धीरे-धीरे पूरे देश में फैलता जा रहा है।
इन प्रदर्शनों को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी। ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा करती है, तो अमेरिका उनकी मदद के लिए और हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
ट्रंप की धमकी पर ईरान का पलटवार
अमेरिकी राष्ट्रपति की चेतावनी पर ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारिजानी ने ट्रंप को जवाब देते हुए कहा कि अमेरिका को दूसरों के आंतरिक मामलों में दखल देने के बजाय अपने सैनिकों की चिंता करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह की बयानबाज़ी पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने का काम करती है।
हिंसा में बढ़ा मौतों का आंकड़ा
रिपोर्ट के मुताबिक, लॉर्डेगन में 2 और अजना में 3 लोगों की मौत हुई है, जबकि कुहदाश्त में रात के समय एक सुरक्षाकर्मी की जान चली गई। कई शहरों में हालात बिगड़ने के बाद दर्जनों प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है, हालांकि सरकार की ओर से अभी तक गिरफ्तारी का आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया है।
क्यों भड़क रहे हैं प्रदर्शन?
गौरतलब है कि साल 2022 में हिजाब विरोधी आंदोलन के बाद यह पहली बार है जब ईरान में इतने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। मौजूदा आंदोलन की वजह बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी और बिगड़ती आर्थिक स्थिति बताई जा रही है।
ईरान सरकार इन प्रदर्शनों को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। हालात पर सरकार की कड़ी नजर बनी हुई है।
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