ईरान ने सीजफायर ठुकराया, रखी 10 सूत्रीय शांति योजना

जुबिली न्यूज डेस्क

ईरान ने सोमवार को औपचारिक रूप से अमेरिकी सीजफायर प्रस्ताव को खारिज करते हुए युद्ध समाप्त करने के लिए 10 सूत्रीय योजना पेश की है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि युद्धविराम एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन यह संघर्ष को खत्म करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

न्यूज एजेंसी IRNA के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका के 15 बिंदुओं वाले प्रस्ताव को ‘जमीनी हकीकत से दूर’ बताते हुए अस्वीकार कर दिया और स्थायी समाधान पर जोर दिया।

ईरान द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव में कई अहम बिंदु शामिल हैं:

  • क्षेत्र में जारी संघर्ष को पूरी तरह समाप्त करना
  • अस्थायी सीजफायर के बजाय स्थायी शांति समझौता
  • होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था
  • परमाणु अप्रसार संधि के तहत यूरेनियम संवर्धन के अधिकार की मान्यता
  • अमेरिका और सहयोगी देशों के प्रतिबंध हटाना
  • लेबनान में हिज़्बुल्लाह पर इजरायली हमलों का अंत
  • होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की नाकाबंदी हटाना
  • जहाजों से 20 लाख डॉलर प्रति पारगमन शुल्क
  • ओमान के साथ राजस्व साझा करना
  • युद्ध में क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए फंड का उपयोग

ईरान ने स्पष्ट किया कि किसी भी समझौते के लिए निम्न शर्तें जरूरी हैं:

  • अमेरिका और इजरायल द्वारा हमलों का तत्काल अंत
  • भविष्य में हमले रोकने के लिए ठोस गारंटी
  • युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई
  • पश्चिम एशिया में सभी मोर्चों पर संघर्ष विराम
  • होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की संप्रभुता की मान्यता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान को “एक ही रात में खत्म किया जा सकता है।” उन्होंने संकेत दिया कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिकी सेना ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों को निशाना बना सकती है।

ट्रंप ने यह भी कहा कि पहले तय समयसीमा को बढ़ाया गया है, लेकिन अगर प्रगति नहीं हुई तो कड़ी सैन्य कार्रवाई की जाएगी।

रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब ईरान के पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में हालात बदल रहे हैं और अमेरिका का एक हेलीकॉप्टर ऑपरेशन असफल रहा है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

ईरान और अमेरिका के बीच टकराव अभी भी समाधान से दूर दिख रहा है। जहां ईरान स्थायी शांति की बात कर रहा है, वहीं अमेरिका तत्काल कदमों पर जोर दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या दोनों पक्ष किसी साझा समाधान पर पहुंच पाते हैं या तनाव और बढ़ेगा।

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