30 मरीजों के मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद फैला संक्रमण, 10 की गई रोशनी

जुबिली न्यूज डेस्क 

गोरखपुर। जिले के सिकरीगंज स्थित New Rajesh Hi-Tech Hospital में आयुष्मान योजना के तहत किए गए मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद बड़ा स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया है। एक फरवरी को 30 मरीजों की आंखों का ऑपरेशन किया गया था। इसके बाद फैले संक्रमण ने अब तक 18 मरीजों को चपेट में ले लिया है।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि नौ बुजुर्ग मरीजों की आंखें निकालनी पड़ीं, जबकि 10 मरीजों की रोशनी जा चुकी है। पीड़ित परिवारों में अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ भारी आक्रोश है और कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

एम्स में चल रहा इलाज, एक आंख की रोशनी गई

संतकबीरनगर के गोरया घाट निवासी वहिदुंन निशा की दाहिनी आंख का ऑपरेशन किया गया था। ऑपरेशन के बाद उनकी दोनों आंखों में संक्रमण फैल गया। हालत बिगड़ने पर अस्पताल स्टाफ उन्हें दिल्ली स्थित AIIMS New Delhi ले गया।

एम्स के डॉक्टरों ने बायीं आंख को बचा लिया, लेकिन ऑपरेशन वाली दाहिनी आंख की रोशनी चली गई। वहिदुंन निशा का कहना है कि उन्हें केवल पास का काम करने में दिक्कत थी, लेकिन डॉक्टर ने मोतियाबिंद बताकर दो फरवरी को ऑपरेशन कर दिया। दो दिन बाद दोनों आंखों में गंभीर परेशानी शुरू हो गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली भेजने के बाद अस्पताल प्रबंधन की ओर से किसी ने हालचाल तक नहीं लिया। 23 फरवरी को उन्हें दोबारा एम्स में दिखाना है और वह अपनी बेटी के साथ दिल्ली में रुकी हैं।

नौ मरीजों की निकाली जा चुकी हैं आंखें

संक्रमण के कारण जिन मरीजों की आंखें निकाली जा चुकी हैं, उनमें बारीगांव की देवराजी देवी, इन्नाडीह के अर्जुन सिंह, रहदौली की शंकरावती देवी, उसरी खास के जयराम, बनकटा के दीनानाथ, बारीपुर के रामदरश, भरसी के रणजीत, रामपुर लरबरी की मीरा देवी और गोला क्षेत्र के सहबाज अली शामिल हैं।

गोरखपुर से वाराणसी, लखनऊ और दिल्ली तक दौड़

ऑपरेशन के अगले ही दिन मरीजों की आंखों में संक्रमण के लक्षण दिखने लगे। परिजन जब अस्पताल पहुंचे तो सभी मरीजों को गोरखपुर रेफर कर दिया गया। गंभीर स्थिति को देखते हुए कुछ डॉक्टरों ने केस लेने से मना कर दिया। इसके बाद मरीजों को वाराणसी, लखनऊ और दिल्ली भेजा गया।

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कार्रवाई की मांग तेज

कुईं बाजार और आसपास के क्षेत्रों में इस घटना को लेकर लोगों में गहरा आक्रोश है। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि लापरवाही के कारण कई परिवारों की जिंदगी अंधेरे में चली गई।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से मामले की जांच की बात कही जा रही है। यदि लापरवाही साबित होती है तो संबंधितों पर सख्त कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल पीड़ित परिवार न्याय और बेहतर इलाज की आस में हैं।

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