Thursday - 1 January 2026 - 10:09 PM

इंदौर में दूषित पानी से मौतों का मामला: 6 महीने की अनदेखी आई सामने 

जुबिली स्पेशल डेस्क

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दूषित पानी पीने से लोगों की मौत के मामले में टीवी9 भारतवर्ष की जांच ने बड़े खुलासे किए हैं।

जांच में सामने आया है कि भागीरथपुरा इलाके के लोग पिछले करीब छह महीने से दूषित पानी पीने को मजबूर थे। इस दौरान स्थानीय निवासियों ने इंदौर नगर निगम के अधिकारियों और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर बार-बार शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

मेयर के निर्देश के बावजूद नहीं बदली गई पाइपलाइन

खुलासे के अनुसार, करीब छह महीने पहले इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने क्षेत्र में पुरानी और जर्जर पाइपलाइन को बदलने के लिए टेंडर जारी करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद हैरानी की बात यह है कि ये टेंडर अब तक स्वीकृत नहीं हो सके। आरोप है कि नगर निगम के भीतर की लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार के चलते टेंडर प्रक्रिया को जानबूझकर लंबित रखा गया।

टेंडर आवंटन में देरी, जनता को भुगतना पड़ा खामियाजा

सूत्रों के मुताबिक, नगर निगम के कुछ अधिकारी पाइपलाइन से जुड़े टेंडर में बड़े स्तर पर अनियमितता की मंशा रखते थे। इसी कारण किसी भी ठेकेदार को काम आवंटित नहीं किया गया और प्रक्रिया महीनों तक अटकी रही।

इसका सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ा, जिन्हें लगातार दूषित पानी पीना पड़ा। नतीजतन, इलाके में बड़ी संख्या में लोग बीमार हुए और अब तक आठ लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।

जांच के आदेश, जिम्मेदारी तय करने की मांग

मामले के तूल पकड़ने के बाद मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने नगर निगम आयुक्त को पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने यह स्पष्ट करने को कहा है कि जब टेंडर छह महीने पहले जारी किए गए थे, तो उन्हें अब तक मंजूरी क्यों नहीं मिली और जिम्मेदार अधिकारियों ने समय पर कार्रवाई क्यों नहीं की।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पाइपलाइन बदल दी जाती, तो किसी भी नागरिक की जान नहीं जाती।

नगर निगम के खिलाफ आक्रोश

घटना के बाद इलाके के निवासियों में नगर निगम को लेकर भारी नाराज़गी है। लोग दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल नगर निगम की ओर से पानी की जांच कराने और वैकल्पिक जल आपूर्ति की व्यवस्था किए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन इस पूरे मामले ने प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

NHRC ने लिया संज्ञान, मुख्य सचिव को नोटिस

इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है।

आयोग के अनुसार, इंदौर जिले के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से सात लोगों की मौत हुई है, जबकि 40 से अधिक लोग बीमार पड़े हैं। आयोग ने इसे पीड़ितों के मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला मानते हुए दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

सीवेज मिला पीने के पानी में

NHRC ने 31 दिसंबर 2025 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए बताया कि इलाके की मुख्य जलापूर्ति पाइपलाइन एक सार्वजनिक शौचालय के नीचे से गुजरती है।

पाइपलाइन में लीकेज के कारण सीवेज का पानी पीने के पानी में मिल गया। इसके अलावा क्षेत्र में पानी की कई वितरण लाइनें भी क्षतिग्रस्त पाई गईं, जिससे दूषित पानी घरों तक पहुंचता रहा।

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