एशिया-प्रशांत सुरक्षा पर IISS रिपोर्ट: भारत की नजर में चीन-पाक सबसे बड़ी चुनौती

सिंगापुर में होने वाले अंतरराष्ट्रीय रक्षा संवाद से पहले जारी एक अहम रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत की सुरक्षा चिंताओं का केंद्र अभी भी चीन और पाकिस्तान बने रहेंगे। रिपोर्ट में यह भी अनुमान जताया गया है कि भविष्य में किसी बड़े पारंपरिक युद्ध की स्थिति बनी तो वह स्थानीय स्तर तक ही सीमित रह सकती है।
यह रिपोर्ट लंदन स्थित ‘इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज’ (IISS) की ओर से 28 मई को जारी की गई है, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, सैन्य रणनीति और भू-राजनीतिक बदलावों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।
भारत के लिए चीन और पाकिस्तान मुख्य सुरक्षा चुनौती
रिपोर्ट के अनुसार, भारत लंबे समय से अपने दो परमाणु-संपन्न पड़ोसियों—चीन और पाकिस्तान—के साथ सीमा विवादों का सामना कर रहा है। इसी कारण भारत की सैन्य रणनीति मुख्य रूप से पारंपरिक युद्ध और सीमाई सुरक्षा पर केंद्रित है।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत-चीन सीमा संघर्ष अब तक अपेक्षाकृत नियंत्रित रहे हैं और वे भारत-पाकिस्तान जैसे गंभीर सैन्य टकराव में नहीं बदले हैं।
‘हाइब्रिड युद्ध’ की स्थिति सबसे बड़ी चिंता
IISS की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती “न युद्ध, न शांति” वाली स्थिति है, जिसे हाइब्रिड संघर्ष कहा जाता है। इसमें सीमा तनाव, आतंकवाद, साइबर हमले और सीमित सैन्य कार्रवाई शामिल होती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की रणनीति पर पिछले सैन्य अनुभवों का गहरा प्रभाव पड़ा है, खासकर पाकिस्तान के साथ, जहां सीमापार आतंकवाद के जवाब में “स्वीकार्य सैन्य प्रतिक्रिया” की नीति अपनाई गई है।
सर्जिकल स्ट्राइक ने बदली रणनीतिक सोच
रिपोर्ट में 2016, 2019 और हाल के वर्षों में पाकिस्तान के खिलाफ की गई सर्जिकल स्ट्राइक का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इन कार्रवाइयों ने भारत की सैन्य रणनीति को नया आकार दिया है। इससे स्पष्ट होता है कि भारत अब सीमित लेकिन सटीक सैन्य कार्रवाई को प्राथमिकता दे रहा है।
एशिया-प्रशांत में बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अमेरिका और चीन के बीच ताइवान को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है। वहीं हिंद महासागर, मलक्का जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों पर वैश्विक प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है।
शांगरी-ला डायलॉग पर वैश्विक नजर
29 से 31 मई तक सिंगापुर में होने वाले शांगरी-ला डायलॉग में दुनिया के कई रक्षा मंत्री और विशेषज्ञ शामिल होंगे। इस मंच पर एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, चीन-अमेरिका तनाव और क्षेत्रीय सैन्य रणनीति पर अहम चर्चा होने की संभावना है।



