जुबिली स्पेशल डेस्क
तेहरान/वॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका भले ही सार्वजनिक तौर पर बातचीत और कूटनीति की बात कर रहे हों, लेकिन जमीनी स्तर पर दोनों देशों की गतिविधियां अलग कहानी बयां कर रही हैं।
हालिया सैटेलाइट तस्वीरों में मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य हलचल तेज होती दिखी है, जिससे क्षेत्र के कई देशों की चिंता बढ़ गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के आसपास मौजूद अपने सहयोगी देशों—कतर, जॉर्डन और सऊदी अरब—के सैन्य ठिकानों पर हथियारों और लड़ाकू विमानों की तैनाती बढ़ा दी है। सैटेलाइट इमेजरी में इन तैनातियों के सबूत सामने आए हैं, जिनमें मिसाइल सिस्टम, फाइटर जेट और भारी सैन्य विमान शामिल हैं।
मिडिल ईस्ट में बढ़ी अमेरिकी गतिविधि
कतर (Al Udeid Air Base): यहां पैट्रियट मिसाइल सिस्टम (MIM-104) को स्थायी ठिकानों से हटाकर M983 मोबाइल ट्रकों (HEMTT) पर तैनात किया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें तेजी से स्थानांतरित किया जा सके। इसके अलावा KC-135 रिफ्यूलिंग टैंकर और C-17 ट्रांसपोर्ट विमानों की आवाजाही भी बढ़ी है।

जॉर्डन (Muwaffaq Salti Air Base):2 फरवरी को ली गई तस्वीरों में यहां 17 F-15E स्ट्राइक ईगल, 8 A-10 थंडरबोल्ट और EA-18G ग्राउलर जैसे इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर विमानों की मौजूदगी दर्ज की गई है।
सऊदी अरब (Prince Sultan Air Base):यहां C-5 गैलेक्सी और C-17 जैसे भारी मालवाहक विमानों की गतिविधि में इजाफा देखा गया है, जो सैन्य उपकरण और रसद पहुंचा रहे हैं।
समुद्री मोर्चा:परमाणु ऊर्जा से संचालित विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन अपने स्ट्राइक ग्रुप के साथ अरब सागर में तैनात बताया जा रहा है।
ईरान की जवाबी तैयारी
सिर्फ अमेरिका ही नहीं, ईरान ने भी अपनी सैन्य तैयारियां तेज कर दी हैं।खुर्रमशहर-4 मिसाइल: ईरान ने अपनी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल ‘खुर्रमशहर-4’ को ऑपरेशनल मोड में रखा है।
परमाणु ठिकानों की सुरक्षा: इस्फहान समेत कुछ परमाणु केंद्रों के प्रवेश द्वारों को मिट्टी और अवरोधों से ढकने की खबर है, ताकि संभावित हमले की स्थिति में नुकसान को कम किया जा सके।
विश्लेषकों का मानना है कि कूटनीतिक बातचीत के समानांतर सैन्य तैयारी का यह दौर क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकता है। हालांकि, आधिकारिक स्तर पर दोनों देशों की ओर से किसी बड़े सैन्य अभियान की पुष्टि नहीं की गई है।
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