जुबिली न्यूज डेस्क
अगर कोई सरकार के खिलाफ प्रदर्शन या आंदोलन करता है, तो उसे अपने शब्दों के चयन में बेहद सावधान रहना होगा। एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जो दलीलें दी हैं, उनसे यही संकेत मिल रहा है। सरकार ने अदालत में कहा कि वांगचुक के खिलाफ नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) इसलिए लगाया गया क्योंकि उन्होंने सरकार को ‘वे’ कहकर संबोधित किया, जो अलगाववादी मानसिकता को दर्शाता है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच के सामने कहा कि ‘हम’ और ‘वे’ का फर्क पैदा करना ही NSA के तहत हिरासत के लिए पर्याप्त आधार है। वांगचुक इस समय जोधपुर जेल में बंद हैं।
सरकार का आरोप: लद्दाख को नेपाल-बांग्लादेश जैसा बनाना चाहते हैं वांगचुक
केंद्र सरकार और लद्दाख प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सोनम वांगचुक चाहते हैं कि केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में नेपाल और बांग्लादेश जैसी हिंसक परिस्थितियां पैदा हों। सरकार का आरोप है कि वांगचुक ने अपने भाषणों के जरिए Gen Z को खून-खराबा और गृह युद्ध के लिए उकसाया।
सॉलिसिटर जनरल ने कहा,“जिस पल आप ‘हमारी सरकार’ को ‘वे’ कहना शुरू करते हैं, उसी पल आप देश के खिलाफ कुछ कर रहे होते हैं। कोई ‘वे’ नहीं हैं, यह हमारी सरकार है।”
NSA हिरासत को वांगचुक ने दी चुनौती
सोनम वांगचुक ने NSA के तहत अपनी हिरासत को चुनौती दी है। उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो की ओर से सुप्रीम कोर्ट में प्रिवेंटिव डिटेंशन के खिलाफ याचिका दायर की गई है। यह मामला सितंबर 2025 में लेह में हुए उन विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा है, जिनमें लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग की गई थी।
‘महात्मा गांधी का नाम सिर्फ कवर के लिए लिया’
पिछली सुनवाई में वांगचुक की ओर से दलील दी गई थी कि सरकार की आलोचना करना लोकतांत्रिक अधिकार है और इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा नहीं हो सकता। इसके जवाब में तुषार मेहता ने कहा कि वांगचुक ने भड़काऊ भाषण दिए और महात्मा गांधी का नाम सिर्फ दिखावे के लिए इस्तेमाल किया।
मेहता ने कहा,“भड़काऊ भाषणों में अक्सर शुरुआत और अंत गांधीजी के नाम से किया जाता है, लेकिन बीच में कही गई बातें हिंसा को उकसाती हैं। गांधीजी को सिर्फ कवर की तरह इस्तेमाल किया जाता है।”
अरब स्प्रिंग और आत्मदाह का जिक्र, सरकार ने जताई चिंता
सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि वांगचुक ने अपने भाषणों में अरब स्प्रिंग का जिक्र किया, जिसमें बड़े पैमाने पर खून-खराबा और आत्मदाह की घटनाएं हुई थीं। मेहता ने कहा कि वांगचुक युवाओं से पूछते थे कि आत्मदाह कहां किया जाए—लेह में या दिल्ली में—ताकि अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींचा जा सके।
सरकार के मुताबिक, यह अलगाववादी गतिविधि है और सीमावर्ती क्षेत्र लद्दाख की संवेदनशीलता को देखते हुए यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है।
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सेना की सप्लाई चेन और जनमत संग्रह का मुद्दा
सॉलिसिटर जनरल ने यह भी दलील दी कि लद्दाख सीमाओं पर तैनात सेना की सप्लाई चेन के लिए बेहद अहम है। उन्होंने दावा किया कि वांगचुक ने इस क्षेत्र में जनमत संग्रह कराने जैसे बयान भी दिए, जो राष्ट्रीय अखंडता के खिलाफ हैं।
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