जन्मदिन के दिन पूर्व प्रिंस एंड्रयू गिरफ्तार, एपस्टीन कनेक्शन में पूछताछ के बाद रिहा

जुबिली न्यूज डेस्क

लंदन, ब्रिटेन की राजशाही के लिए गुरुवार का दिन अभूतपूर्व रहा, जब पूर्व शाही सदस्य Prince Andrew को जेफ्री एपस्टीन से जुड़े मामले में सार्वजनिक पद के दुरुपयोग (Misconduct in Public Office) के संदेह में गिरफ्तार किया गया। खास बात यह रही कि गिरफ्तारी उनके 66वें जन्मदिन के दिन ही हुई।

सुबह छापा, कई घंटों तक पूछताछ

पुलिस ने सुबह करीब 8 बजे नॉरफ़ॉक स्थित शाही संपत्ति Sandringham Estate के परिसर में मौजूद उनके आवास पर छापा मारा और उन्हें हिरासत में लिया। थेम्स वैली पुलिस ने बयान में कहा कि “नॉरफ़ॉक के 60 वर्षीय व्यक्ति को सार्वजनिक पद के दुरुपयोग के संदेह में गिरफ्तार किया गया है।” ब्रिटेन के नियमों के तहत पुलिस ने नाम सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन बाद में पुष्टि हुई कि पूछताछ के बाद उन्हें जांच के तहत रिहा कर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, नॉरफ़ॉक स्थित संपत्ति की तलाशी पूरी हो चुकी है, जबकि बर्कशायर में स्थित उनके पूर्व निवास Royal Lodge पर जांच जारी है।

एपस्टीन फाइलों से बढ़ी मुश्किल

एंड्रयू का नाम लंबे समय से अमेरिकी वित्त कारोबारी Jeffrey Epstein से जुड़े विवाद में आता रहा है। हाल में सार्वजनिक हुए दस्तावेजों में आरोप लगाया गया है कि 2010 में ब्रिटेन के व्यापार दूत रहते हुए उन्होंने एपस्टीन को एशियाई देशों की आधिकारिक यात्राओं से जुड़ी संवेदनशील रिपोर्टें भेजी थीं।

गौरतलब है कि एपस्टीन को 2008 में अमेरिका में नाबालिग को वेश्यावृत्ति के लिए उकसाने के मामले में दोषी ठहराया गया था और 2019 में न्यूयॉर्क की जेल में उसकी मौत हो गई थी।

किंग चार्ल्स का बयान

घटना के तुरंत बाद ब्रिटेन के सम्राट King Charles III ने लिखित बयान जारी कर कहा, “कानून को अपना काम करने दिया जाना चाहिए।” उन्होंने भरोसा दिलाया कि बकिंघम पैलेस जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग देगा। हालांकि, उन्होंने अपने निर्धारित सार्वजनिक कार्यक्रमों को रद्द नहीं किया।

गंभीर आरोप, सख्त सजा संभव

ब्रिटेन में “Misconduct in Public Office” एक गंभीर आपराधिक आरोप है। यदि दोष सिद्ध होता है, तो अधिकतम सजा आजीवन कारावास तक हो सकती है। फिलहाल, एंड्रयू पर औपचारिक आरोप तय नहीं हुए हैं और वे जांच के दायरे में हैं।

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पिछले वर्ष उन्हें उनके शाही खिताबों से वंचित कर दिया गया था और आधिकारिक जिम्मेदारियों से अलग कर दिया गया था। इसके बावजूद वे अभी भी उत्तराधिकार की सूची में आठवें स्थान पर बने हुए हैं।

यह मामला ब्रिटिश राजशाही की साख और पारदर्शिता पर नए सवाल खड़े कर रहा है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस विवाद के और भी बड़े खुलासे सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

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