जुबिली न्यूज डेस्क
नई दिल्ली: फ्रांस के साथ 114 राफेल लड़ाकू विमान बनाने की ऐतिहासिक डील को हरी झंडी मिलने के बाद अब भारत एक और बड़ा रणनीतिक कदम उठाने जा रहा है। भारत और यूरोपीय संघ (EU) जल्द ही एक सिक्योरिटी एंड डिफेंस पार्टनरशिप एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने वाले हैं।

यह समझौता ऐसे वक्त में होने जा रहा है जब ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोप के रिश्तों में तनाव चरम पर है और पूरा यूरोप सुरक्षा चिंताओं से घिरा हुआ है।
EU की शीर्ष नेता खुद आएंगी भारत
इस महत्वपूर्ण करार की जानकारी EU की विदेश और सुरक्षा मामलों की उच्च प्रतिनिधि काजा कैलस ने दी है।
EU संसद को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा—“भारत इस समझौते के लिए पूरी तरह तैयार है और जल्द ही इस पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।”
एस्टोनिया की पूर्व प्रधानमंत्री रह चुकीं काजा कैलस, वर्तमान में यूरोपीय कमीशन की उपाध्यक्ष भी हैं। उन्होंने बताया कि समझौते पर हस्ताक्षर के लिए वह स्वयं नई दिल्ली पहुंचेंगी।
किन क्षेत्रों में होगा भारत-EU समझौता?
जानकारी के मुताबिक, भारत और यूरोपीय संघ के बीच यह डिफेंस करार मुख्य रूप से इन क्षेत्रों पर केंद्रित होगा—
मेरीटाइम सिक्योरिटी (समुद्री सुरक्षा)
साइबर सिक्योरिटी
काउंटर टेररिज्म सहयोग
स्ट्रैटेजिक इंटेलिजेंस शेयरिंग
यह समझौता हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका को और मजबूत करेगा।
गणतंत्र दिवस 2026 में EU होगा मुख्य अतिथि
इस साल भारत-EU रिश्तों को नई ऊंचाई मिलने जा रही है।
26 जनवरी 2026 की गणतंत्र दिवस परेड में—
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EU अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा
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यूरोपीय कमीशन प्रमुख उर्सला वेन डेर लेयन
मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
इसके साथ ही—
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EU का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भारत आएगा
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कर्तव्य पथ पर EU नौसेना की टुकड़ी मार्च पास्ट करेगी
यह पहली बार होगा जब यूरोपीय संघ इतनी बड़ी सैन्य मौजूदगी के साथ गणतंत्र दिवस पर शामिल होगा।
क्यों बेहद अहम है यह डिफेंस एग्रीमेंट?
वर्तमान वैश्विक हालात में यह समझौता यूरोप के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।
वजहें:
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🇺🇦 यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका-यूरोप में मतभेद
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🇷🇺 रूस के प्रति ट्रंप की नरमी से यूरोप नाराज
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🇬🇱 ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जिद
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डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड पर कब्जे की आशंका
इन परिस्थितियों में EU अब अमेरिका पर निर्भरता कम कर नए रणनीतिक साझेदार तलाश रहा है, और भारत इसमें सबसे मजबूत विकल्प बनकर उभरा है।
भारत की ओर से अभी आधिकारिक बयान नहीं
हालांकि इस समझौते को लेकर भारत सरकार की तरफ से फिलहाल आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन हाल के संकेत साफ बताते हैं कि—
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भारत यूरोपीय देशों के साथ रक्षा सहयोग तेजी से बढ़ा रहा है
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फ्रांस, जर्मनी जैसे देशों के साथ बड़े सैन्य प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है
राफेल डील से बढ़ी रणनीतिक मजबूती
पिछले सप्ताह ही भारत के रक्षा मंत्रालय ने—
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🇫🇷 फ्रांस की दासो कंपनी के साथ
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114 राफेल फाइटर जेट भारत में बनाने की डील
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वायुसेना को मंजूरी दी थी
इसके तहत भारत में ही राफेल लड़ाकू विमान का निर्माण किया जाएगा।
जर्मनी के साथ पनडुब्बी निर्माण पर भी चर्चा
इसके अलावा—
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जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के भारत दौरे के दौरान
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भारतीय नौसेना के लिए साझा पनडुब्बी निर्माण पर भी अहम बातचीत हुई थी
यह दिखाता है कि भारत अब यूरोप का प्रमुख रक्षा साझेदार बनता जा रहा है।
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