अशोक बांबी
अभी तक जबरदस्त खेल रही उत्तर प्रदेश की टीम आज वीजेडी (VJD) सिस्टम के आधार पर सौराष्ट्र से विजय हजारे ट्रॉफी के अंतर्गत क्वार्टर फाइनल मैच में हार गई। मैच वर्षा के कारण पूर्ण नहीं हो सका, जिसके फलस्वरूप वीजेडी सिस्टम का प्रयोग किया गया और सौराष्ट्र को 17 रन के मार्जिन से विजेता घोषित किया गया।
टीम का दुर्भाग्य है कि मैच में अभी जान बाकी थी, क्योंकि सौराष्ट्र को जीत के लिए अभी 74 रन और बनाने थे, जबकि 10 ओवर शेष थे। हालांकि उनके केवल तीन विकेट ही आउट हुए थे, तब भी एकदिवसीय क्रिकेट में कुछ भी कहा नहीं जा सकता।
मेरे विचार से यूपी के हारने का मुख्य कारण ध्रुव जुरेल का न होना था। आखिरी मौके पर उन्हें बड़ौदा बुला लिया गया, जब ऋषभ पंत घायल हो गए और भारतीय टीम को एक खिलाड़ी की जरूरत पड़ी। ध्रुव जुरेल न वहां खेले और न ही यहां। देखा जाए तो इस प्रतियोगिता में उनका बेहतरीन प्रदर्शन ऐन वक्त पर उत्तर प्रदेश की टीम के काम नहीं आ सका और टीम जीत से वंचित रह गई।
जिस प्रकार से यह टीम खेल रही थी, उससे साफ प्रतीत हो रहा था कि इस बार यह टीम कमाल जरूर दिखाएगी और यह आभास भी हो रहा था कि उत्तर प्रदेश की टीम विजय हजारे ट्रॉफी इस बार अपने घर लाएगी।

उत्तर प्रदेश की टीम टॉस हारने के बाद पहले बल्लेबाजी करने उतरी और शुरुआत में उसे बड़ा झटका तब लगा, जब फॉर्म में चल रहे आर्यन जुयाल शून्य पर आउट हो गए। वनडाउन पर आए ऋतुराज अजीत शर्मा कुछ खास नहीं कर पाए और मात्र 12 रन बनाकर आउट हो गए। कहीं अच्छा होता यदि उनके स्थान पर चिकारा को मौका दिया जाता।
इसके बाद गोस्वामी और प्रियम गर्ग ने अच्छी साझेदारी करते हुए टीम का स्कोर 100 के पार पहुंचाया। उसके पश्चात प्रदेश की टीम को उस समय भारी झटका लगा, जब रिंकू सिंह मात्र 17 रन बनाकर आउट हो गए।
आज समीर रिजवी ने एक बेहतरीन और जिम्मेदारी भरी बड़ी पारी खेली और अंत में 88 रन बनाकर टीम को 310 रन के मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। मेरे विचार से यदि ध्रुव जुरेल होते, तो यही उत्तर प्रदेश टीम 350 रन तक का स्कोर खड़ा कर सकती थी।

310 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए सौराष्ट्र की टीम को शुरुआती झटका जरूर लगा, लेकिन उनके दूसरे बल्लेबाज देसाई एक छोर पर डटे रहे और अंत में 100 रन बनाकर नाबाद रहे। वहीं मांकड़ ने भी एक तेजतर्रार पारी खेलते हुए मात्र 64 गेंदों में 67 रन बनाए।
सौराष्ट्र टीम के तीन विकेट जरूर गिर गए थे, लेकिन वे मैच में लगातार बने रहे। जब उनका स्कोर 238 रन पर तीन विकेट था, तभी वर्षा के व्यवधान के कारण मैच को समाप्त घोषित कर दिया गया और वीजेडी सिस्टम के तहत सौराष्ट्र को विजेता घोषित किया गया।
जो भी हो, उत्तर प्रदेश की इस टीम ने पूरे टूर्नामेंट में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है और आगे भी टीम का प्रदर्शन बेहतर रहेगा, यदि प्रदेश के केवल उदयमान और सक्षम खिलाड़ियों को ही अवसर दिया जाएगा।
जहां तक बल्लेबाजी का सवाल है, वहां आर्यन जुयाल, गोस्वामी, प्रियम गर्ग, ध्रुव जुरेल, कप्तान रिंकू सिंह और समीर रिजवी ने समय-समय पर शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। गेंदबाजी की बात करें तो तेज गेंदबाजों ने अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं किया, लेकिन स्पिन गेंदबाजी में जीशान अंसारी, विपरज निगम और प्रशांत वीर ने अच्छी गेंदबाजी की।
काफी अरसे बाद टैलेंटेड जीशान अंसारी को मौका दिया गया और उन्होंने 21 विकेट लेकर बेहतरीन गेंदबाजी का नमूना पेश किया। उम्मीद है कि उनके साथ आगे किसी तरह का अन्याय नहीं होगा और उन्हें लगातार मौके दिए जाएंगे।
मेरे विचार से उत्तर प्रदेश क्रिकेट का भविष्य बहुत उज्ज्वल है, बशर्ते जो खिलाड़ी डिजर्व करते हैं, उन्हें ही मौका दिया जाए, न कि उनके स्थान पर बाहर के या ऐसे खिलाड़ियों को खिलाया जाए जो डिजर्व नहीं करते।
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