बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के प्रमुख रहे मोहम्मद यूनुस का कार्यकाल समाप्ति की ओर है, और इसके साथ ही उनकी अगली भूमिका को लेकर सियासी हलकों में अटकलें तेज हो गई हैं। चर्चाएं हैं कि उन्हें किसी संवैधानिक पद पर जिम्मेदारी दी जा सकती है, यहां तक कि राष्ट्रपति पद के लिए भी उनका नाम उछाला जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
माना जा रहा है कि सत्ता संभालने जा रही बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की सरकार उन्हें समर्थन दे सकती है। फिलहाल देश के राष्ट्रपति मोहमम्मद शाहबुद्दिन हैं, जिन्होंने 24 अप्रैल 2023 को पद की शपथ ली थी और उनका कार्यकाल पांच वर्ष का है।
BNP का रुख क्या है?
BNP नेता तारिक रहमान के अंतरराष्ट्रीय मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने स्पष्ट किया है कि यूनुस को लेकर किसी विशेष पद पर अभी कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई है। उनके मुताबिक, पार्टी समावेशी शासन में विश्वास रखती है और अनुभवी व योग्य लोगों को साथ लेकर चलना चाहती है।
कबीर ने कहा कि यूनुस का अनुभव और अंतरराष्ट्रीय पहचान देश के लिए उपयोगी हो सकती है, लेकिन फिलहाल किसी पद को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया है।
राष्ट्रपति बनने पर क्या होगा फायदा?
बांग्लादेश मामलों के विश्लेषक डेविड बर्गमैन ने दावा किया है कि तारिक रहमान और यूनुस के बीच राष्ट्रपति पद को लेकर बातचीत हुई थी। हालांकि BNP और यूनुस के प्रेस सचिव ने इस दावे को खारिज कर दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यूनुस राष्ट्रपति बनते हैं तो उनकी वैश्विक साख और कूटनीतिक पहुंच से बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिल सकती है।
राजनीति से दूरी बनाना चाहते हैं यूनुस
यूनुस के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने कहा है कि यूनुस सक्रिय राजनीति में बने रहने के इच्छुक नहीं हैं। वे अपने सामाजिक और आर्थिक अभियानों पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं।
यूनुस ‘थ्री ज़ीरो’ विजन—जीरो गरीबी, जीरो बेरोजगारी और जीरो कार्बन उत्सर्जन—को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वे युवाओं के साथ काम करने और वैश्विक स्तर पर अपने विचार साझा करने में अधिक रुचि रखते हैं।
कौन हैं मोहम्मद यूनुस?
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान चटगांव में जन्मे यूनुस ने अर्थशास्त्र के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। वे माइक्रोफाइनेंस के अग्रदूत माने जाते हैं और ग्रामीण गरीबों को छोटे ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था को वैश्विक पहचान दिलाई।
उनके इसी कार्य के लिए उन्हें 2006 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यूनुस किसी संवैधानिक भूमिका में नजर आते हैं या फिर अपने सामाजिक अभियानों पर ही ध्यान केंद्रित रखते हैं।
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