Friday - 9 January 2026 - 3:39 PM

छापेमारी के दौरान टकराव: ईडी ने ममता सरकार और पुलिस पर जांच बाधित करने का लगाया आरोप

जुबिली न्यूज डेस्क

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में 8 जनवरी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आमने-सामने आ गईं। ईडी ने आरोप लगाया है कि कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री और राज्य पुलिस ने जांच में जबरन दखल दिया, डिजिटल सबूत छीने गए और अधिकारियों को धमकाया गया।

ईडी सूत्रों के मुताबिक, जब कोलकाता में प्रतीक जैन के घर पर कानूनी आदेश के तहत तलाशी चल रही थी, तभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौके पर पहुंचीं। आरोप है कि मुख्यमंत्री ने वहां मौजूद प्रतीक जैन का मोबाइल फोन अपने हाथ में लेकर अपने पास रख लिया। ईडी का दावा है कि इसी दौरान राज्य के डीजीपी ने ईडी के अधिकारियों से कहा कि पंचनामा में किसी भी तरह की बरामदगी दर्ज न की जाए, अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

ईडी अधिकारियों का कहना है कि मौके पर उनके केवल तीन अधिकारी थे, जबकि दूसरी ओर दर्जनों पुलिसकर्मी और मुख्यमंत्री को दी गई Z श्रेणी की सुरक्षा टीम मौजूद थी। एजेंसी का आरोप है कि अधिकारियों को डराने-धमकाने की कोशिश की गई और रिपोर्ट में सही तथ्यों को दर्ज करने से रोका गया। स्वतंत्र गवाहों को भी कथित तौर पर परेशान किया गया।

दो जगहों पर छापेमारी का दावा

ईडी के अनुसार, पहली छापेमारी प्रतीक जैन के आवास पर हुई, जहां मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क जैसे डिजिटल डिवाइस जब्त किए जा रहे थे। पहले डीसीपी और फिर कोलकाता पुलिस कमिश्नर पहुंचे, इसके बाद मुख्यमंत्री स्वयं मौके पर आईं। एजेंसी का आरोप है कि चल रही कानूनी कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए दस्तावेज और डिजिटल सबूत पुलिस की मदद से छीन लिए गए।

दूसरी छापेमारी सॉल्ट लेक स्थित IPAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के कार्यालय में की जा रही थी। यहां डिजिटल फॉरेंसिक जांच शुरू हो चुकी थी, लेकिन ईडी का आरोप है कि राज्य पुलिस ने अधिकारियों को काम नहीं करने दिया और कंप्यूटर, ई-मेल डेटा, CCTV रिकॉर्डिंग व मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए, जिससे सबूतों की चेन टूट गई।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी के अनुसार, वर्ष 2020 में CBI ने अनुप माजी और अन्य के खिलाफ अवैध कोयला खनन और चोरी का मामला दर्ज किया था। इसके बाद PMLA के तहत ईडी ने जांच शुरू की। जांच में करीब 2700 करोड़ रुपये की अवैध कमाई और हवाला नेटवर्क के जरिए धन के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया। एजेंसी का दावा है कि इसी नेटवर्क से IPAC को भी लगभग 20 करोड़ रुपये मिले।

हाई कोर्ट में ईडी की याचिका

ईडी ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर मुख्यमंत्री और राज्य पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एजेंसी का कहना है कि अधिकारियों को गलत तरीके से रोका गया, बंद करके रखा गया और सबूत छीने गए, जो कानून के राज पर हमला है। ईडी ने मांग की है कि:

  • मामले की स्वतंत्र जांच CBI से कराई जाए।

  • छीने गए सभी डिजिटल डिवाइस और दस्तावेज तुरंत ईडी को लौटाए जाएं।

  • सभी CCTV फुटेज सुरक्षित रखकर कोर्ट को सौंपे जाएं।

  • राज्य सरकार और पुलिस को ईडी की कार्रवाई में दखल देने से रोका जाए।

  • ईडी अधिकारियों के खिलाफ किसी तरह की FIR या कार्रवाई न की जाए।

ईडी का कहना है कि वह कानून के तहत ईमानदारी से काम कर रही थी और मुख्यमंत्री व राज्य पुलिस का हस्तक्षेप असंवैधानिक है। एजेंसी ने अदालत से तत्काल दखल की मांग की है।

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