जुबिली स्पेशल डेस्क
महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों के नतीजे सामने आने के बाद मुंबई महानगरपालिका में ठाकरे परिवार का वर्षों पुराना वर्चस्व खत्म होता नजर आ रहा है।
मौजूदा समीकरणों के मुताबिक इस बार बीजेपी के मेयर बनाने का रास्ता साफ माना जा रहा है। चुनाव परिणामों पर शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत का तीखा बयान सामने आया है।
संजय राउत ने चुनावी नतीजों के लिए पार्टी के भीतर मौजूद कुछ लोगों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि “ये नतीजे जयचंदों की वजह से आए हैं।” उन्होंने दावा किया कि विपक्ष के पास इतनी संख्या है कि जरूरत पड़ने पर कभी भी तख्तापलट किया जा सकता है, हालांकि उनकी पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करती है।
राउत ने कहा कि मनसे को 6 सीटें मिली हैं और कई सीटों पर पार्टी बहुत कम अंतर से हारी है। वहीं शिवसेना (UBT) की भी करीब 12–13 सीटें ऐसी हैं, जहां मामूली मतों से हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि अगर इन सीटों पर जीत मिल जाती, तो मुंबई की राजनीतिक तस्वीर कुछ और होती। इसके बावजूद भाजपा-शिंदे गुट के पास केवल चार सीटों का ही बहुमत है।

उन्होंने आगे कहा कि महानगरपालिका के सदन में विपक्ष सबसे मजबूत ताकत के रूप में मौजूद है। “हम मुंबई को अडानी की जेब में नहीं जाने देंगे और न ही ठेकेदारों का राज चलने देंगे। हमारे 100 से ज्यादा पार्षद हर गलत फैसले पर रोक लगाएंगे।” राउत ने दोहराया कि अगर पार्टी में ‘जयचंद’ न होते तो बीजेपी की कई पीढ़ियां भी मेयर नहीं बना पातीं।
संजय राउत ने यह भी कहा कि यह मुकाबला पूरी तरह बराबरी का था। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का नाम लिए बिना कहा कि मुख्यमंत्री होने के नाते उनके पास संसाधनों की कोई कमी नहीं थी, इसलिए यह कहना गलत होगा कि मुंबई में बीजेपी ने एकतरफा जीत हासिल की है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि बीएमसी सदन में विपक्ष की ताकत सत्ताधारी दल के बराबर है और कोई भी मुंबई का सौदा नहीं कर सकता। अंत में राउत ने आरोप लगाया कि भाजपा हर राज्य में पार्टियों को तोड़कर और ‘जयचंद’ पैदा करके ही चुनाव जीतने की रणनीति अपनाती है।
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