‘अमित भाई ने कहा है, बीजेपी और शिवसेना ही सरकार बनाएंगी’

जुबिली न्यूज़ डेस्क 

एनडीए से बाहर निकल रहे दलों ने भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी है। सहयोगी दल अब एनडीए में समन्वय समिति की मांग कर रहे हैं। रविवार को एनडीए के सहयोगी लोजपा ने समिति की मांग करते भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

बता दें कि आज एनडीए की बैठक बुलाई गई थी। जिससे शिवसेना ने दूरी बनाकर रखी थी। वहीं एनडीए के सहयोगी लोजपा ने सभी दलों को सम्मान देने के लिए समन्वय समिति के गठन की मांग की। चिराग पासवान ने कहा कि आज की बैठक में शिवसेना नहीं थी। जिसके कारण उन्हें अच्छा नहीं लगा। उन्होंने कहा कि अब एनडीए में समन्वय समिति की जरूरत है। क्योंकि इसका गठन कर सहयोगी दलों की नाराजगी कम हो सकेगी।

पासवान ने कहा कि एनडीए में बेहतर तालमेल के लिए संयोजक की नियुक्ति होनी चाहिए। पासवान ने कहा कि हाल में कई दलों ने एनडीए का साथ छोड़ दिया है। लिहाजा बचे हुए दलों को आपस मे तालमेल होना चाहिए।

बता दें कि जनता दल यूनाइटेड भी काफी पहले से समन्वय समिति की मांग करती आई है। लेकिन अभी तक एनडीए ने समन्वयक नहीं बनाया है। हालांकि पहले चंद्रबाबू नायडू एनडीए के संयोजक हुआ करते थे। लेकिन उनके एनडीए को छोड़ने के बाद इस पद पर किसी की नियुक्ति नहीं हुई।

पीएम मोदी ने कहा- समन्वय समिति बनाई जानी चाहिए

इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह भी शामिल हुए। यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सहयोगियों से छोटे मतभेदों को दूर करने के लिए कहा।

मोदी ने कहा कि, हम लोगों के लिए एक साथ काम करें। हमें एक विशाल जनादेश दिया गया है, आइए इसका सम्मान करें। समान विचारधारा के नहीं होने के बावजूद हम समान विचारधारा वाले दल हैं। हमें छोटे-मोटी दूरियों को नजरअंदाज करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बेहतर समन्वय के लिए एक समन्वय समिति बनाई जानी चाहिए।

महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना ही सरकार बनाएंगी

केंद्रीय मंत्री और एनडीए की सहयोगी रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया के प्रमुख रामदास अठावले ने कहा, शिवसेना मीटिंग में नहीं थी। हालांकि शिवसेना के विनायक राउत सर्वदलीय बैठक में मौजूद थे। मेरा मानना है कि इस समस्या को खत्म किया जाना चाहिए। मैंने अमित भाई (अमित शाह) से भी इस सिलसिले में बोला। रामदास अठावले ने बताया कि अमित भाई ने कहा कि सभी चीजें सही दिशा में जा रही हैं। अंत में बीजेपी और शिवसेना ही सरकार बनाएंगी।

यह भी पढ़ें : नागरिकता कानून बदला तो लोगों पर क्या होगा असर

यह भी पढ़ें : अयोध्या केस में फैसला सुनाने वाले जस्टिस नजीर की जान को किससे खतरा है

Related Articles

Back to top button