जुबिली स्पेशल डेस्क
बिहार में 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज है। इस बार पांच सीटें खाली हो रही हैं। इनमें राष्ट्रीय जनता दल के प्रेमचंद गुप्ता और एडी सिंह, जनता दल यूनाइटेड के हरिवंश और रामनाथ ठाकुर तथा राष्ट्रीय लोक मोर्चा के उपेंद्र कुशवाहा का कार्यकाल पूरा हो रहा है।
सीटों का गणित
243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए लगभग 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है।
2025 के विधानसभा चुनाव में एनडीए ने 202 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था। ऐसे में एनडीए चार सीटें आसानी से जीत सकता है। चार सीटें जीतने के बाद भी उसके पास 38 विधायक बचेंगे। पांचवीं सीट के लिए उसे तीन अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ेगी।
वहीं महागठबंधन के पास कुल 35 विधायक हैं। यदि विपक्ष एकजुट होकर 41 वोट जुटा लेता है तो वह एक सीट जीत सकता है। लेकिन अगर पांचवीं सीट पर दोनों पक्ष उम्मीदवार उतारते हैं तो क्रॉस वोटिंग और जोड़-तोड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
एनडीए की रणनीति
सूत्रों के मुताबिक भाजपा जातीय संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों पर मंथन कर रही है। भोजपुरी अभिनेता-गायक पवन सिंह का नाम भी चर्चा में है।
जदयू कोटे से रामनाथ ठाकुर का दोबारा राज्यसभा जाना लगभग तय माना जा रहा है, जबकि हरिवंश को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। चर्चा है कि जदयू किसी नए चेहरे, संभवतः कुर्मी या अल्पसंख्यक समुदाय से उम्मीदवार पर भी विचार कर सकती है।
अगर भाजपा दो सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारती है तो एनडीए पांचवीं सीट पर उपेंद्र कुशवाहा को मौका दे सकता है।
विपक्ष की रणनीति
विपक्ष की ओर से ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने भी दावा किया है कि वह अपना उम्मीदवार उतारेगी। पार्टी के बिहार अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने विपक्षी दलों से समर्थन की अपील की है।
राजद प्रेमचंद गुप्ता को दोबारा राज्यसभा भेजने पर विचार कर सकती है और इसके लिए सहयोगी दलों से समर्थन मांग सकती है। राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा है कि विपक्ष एक संयुक्त उम्मीदवार उतारेगा और सभी दल मिलकर निर्णय लेंगे।
सियासी टकराव तेज
जदयू और भाजपा नेताओं ने दावा किया है कि एनडीए पांचों सीटें जीत लेगा। उनका कहना है कि उम्मीदवारों के नाम पर अंतिम फैसला गठबंधन का शीर्ष नेतृत्व करेगा। वहीं विपक्ष का दावा है कि वह एक सीट जीतने की स्थिति में है और एनडीए में भी क्रॉस वोटिंग हो सकती है।
राज्यसभा चुनाव से पहले बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप और रणनीतिक बयानबाजी अपने चरम पर है। अब सबकी नजर 16 मार्च के मतदान और संभावित सियासी समीकरणों पर टिकी है।
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