बिहार चुनाव 2025: IANS-Matrize सर्वे में NDA को बढ़त, INDIA गठबंधन पिछड़ा

  • सर्वे दावा : बिहार चुनाव 2025: NDA के पलड़े में भारी बढ़त
  • विपक्ष को नहीं मिल रहा ‘एंटी-इनकंबेंसी’ का फायदा
  • बिहार में NDA की लहर, विपक्ष को नहीं मिला फायदा

जुबिली स्पेशल डेस्क

बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखें तय होते ही सियासी माहौल गरमाने लगा है। अब हर तरफ एक ही सवाल गूंज रहा है क्या इस बार भी नीतीश कुमार की सरकार लौटेगी या सत्ता परिवर्तन देखने को मिलेगा?

इसी बीच एक ताज़ा IANS–Matrize सर्वे ने बड़ा दावा किया है। सर्वे के मुताबिक, इस बार भी एनडीए (NDA) राज्य में बढ़त बनाए हुए है, जबकि महागठबंधन (RJD–Congress–Left) को सत्ता विरोधी लहर के बावजूद जनता का भरोसा हासिल करने में मुश्किलें आ रही हैं।

NDA को बहुमत की ओर ले जा रहा वोट शेयर

सर्वे के अनुसार, एनडीए को लगभग 49 से 50 प्रतिशत वोट शेयर मिलने का अनुमान है, जो 150 से 160 सीटों में तब्दील हो सकता है। यानी, “डबल इंजन” की सरकार एक बार फिर पटना में झंडा फहरा सकती है।
दूसरी ओर, महागठबंधन को करीब 36 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 70 से 85 सीटों तक सीमित रहने का अनुमान है।

प्रशांत किशोर की जन सुराज ने बढ़ाई हलचल

इस चुनावी मुकाबले में तीसरी ताकत के रूप में प्रशांत किशोर (PK) की पार्टी जन सुराज सुर्खियों में है। सर्वे के अनुसार, पार्टी को करीब 7 प्रतिशत वोट शेयर मिल सकता है और 2 से 5 सीटें हासिल करने की संभावना जताई गई है।
यह आंकड़ा कम जरूर है, लेकिन यह विपक्ष और एनडीए दोनों के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

अन्य दलों की स्थिति

  • सर्वे में बताया गया है कि BSP, JMM और अन्य छोटी पार्टियों को मिलाकर लगभग 7 प्रतिशत वोट मिल सकता है, जिससे वे 7 से 10 सीटों तक पहुंच सकती हैं।
  • AIMIM को 1 प्रतिशत वोट शेयर मिलने का अनुमान है।

बीजेपी और आरजेडी में कांटे की टक्कर

सर्वे के अनुसार, बीजेपी और आरजेडी दोनों को लगभग 21 प्रतिशत वोट शेयर मिल सकता है। वहीं, JDU को पिछले चुनाव से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 18 प्रतिशत वोट और 60 से 65 सीटें मिलने की उम्मीद है।

लोजपा (रामविलास) लगभग 6 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 4 से 6 सीटों पर टिक सकती है। कांग्रेस के लिए यह चुनाव चुनौतीपूर्ण दिख रहा है, सर्वे में पार्टी का वोट शेयर घटकर 8 प्रतिशत बताया गया है।

कब होंगे चुनाव

बिहार में विधानसभा चुनाव दो चरणों (6 और 11 नवंबर) में होंगे, जबकि नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।

सर्वे के नतीजे बताते हैं कि बिहार में सत्ता विरोधी लहर बहुत तेज़ नहीं है। नीतीश कुमार और एनडीए गठबंधन एक बार फिर बहुमत की दहलीज पर हैं, जबकि विपक्षी दलों को जनता के मूड को भांपने के लिए नई रणनीति बनानी पड़ सकती है।

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