जुबिली न्यूज डेस्क
ढाका: बांग्लादेश की सियासत में आम चुनाव के बाद बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ आया है। तीन ऐसे नेता, जिन पर कुछ समय पहले तक गंभीर आपराधिक आरोप थे और जिनमें से एक को मौत की सजा भी सुनाई जा चुकी थी, अब नई संसद का हिस्सा बनने जा रहे हैं। इनमें दो नेता Bangladesh Nationalist Party (BNP) से हैं, जबकि तीसरे नेता Bangladesh Jamaat-e-Islami से जुड़े हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब बांग्लादेश और भारत के रिश्ते हाल के वर्षों में तनावपूर्ण रहे हैं।

कौन हैं ये तीन नेता?
1. Lutfuzzaman Babar (BNP)
लुत्फोज्जमान बाबर पूर्व में बड़े मामलों में आरोपी रहे हैं। दिसंबर 2024 में बांग्लादेश की एक अदालत ने उन्हें 21 अगस्त 2004 के ग्रेनेड हमले से जुड़े मामले में बरी कर दिया। इस हमले का निशाना तत्कालीन विपक्षी नेता Sheikh Hasina थीं। हमले में 24 लोगों की मौत हुई थी, जबकि हसीना बाल-बाल बच गई थीं। हालिया चुनाव में बाबर ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को करीब 1.60 लाख वोटों से हराकर जीत दर्ज की।
2. Abdus Salam Pintu (BNP)
अब्दुस सलाम पिंटू को लेकर भारत की चिंता ज्यादा बताई जा रही है। उन पर आरोप था कि वे पाकिस्तान आधारित एक आतंकी संगठन का समर्थन करते थे, जिस पर भारत में वाराणसी कोर्ट परिसर, अजमेर शरीफ दरगाह और दिल्ली में हुए धमाकों में संलिप्तता के आरोप रहे हैं। बाबर के बरी होने के लगभग एक साल बाद पिंटू को भी राहत मिली और उनके खिलाफ मामले खत्म कर दिए गए। इस चुनाव में उन्होंने लगभग दो लाख वोटों से जीत दर्ज की।
3. ATM Azharul Islam (जमात-ए-इस्लामी)
एटीएम अजहरुल इस्लाम जमात के वरिष्ठ नेता रहे हैं और 1998 से सक्रिय राजनीति में हैं। उन पर 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान 1200 से अधिक लोगों की हत्या और 13 बलात्कार के आरोप थे। 2014 में उन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी।
हालांकि, बाद में नोबेल पुरस्कार विजेता Muhammad Yunus के नेतृत्व वाले दौर में उन्हें राहत मिली और सभी आरोपों से बरी कर दिया गया। अब वे भी संसद में बैठने जा रहे हैं।
तारिक रहमान की भूमिका
इन घटनाओं के केंद्र में हैं BNP प्रमुख Tarique Rahman। दिसंबर 2024 में अदालत ने तारिक रहमान को भी 2004 ग्रेनेड हमले के मामले में बरी कर दिया था। अब उनके शपथ लेने के साथ ही ये तीनों नेता संसद में अहम भूमिका निभाते नजर आएंगे।
भारत के लिए क्या मायने?
नई दिल्ली के नजरिए से यह चुनाव परिणाम, यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम व्यवस्था से अलग संकेत देता है। भारतीय अधिकारियों के अनुसार, वह दौर काफी उथल-पुथल भरा था। अब सबकी नजर तारिक रहमान की नीतियों पर है। भारत “सावधानी भरी उम्मीद” जता रहा है कि आर्थिक जरूरतों और क्षेत्रीय स्थिरता को देखते हुए नई सरकार अधिक व्यावहारिक रुख अपना सकती है।
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बांग्लादेश की नई संसद में इन तीन नेताओं की एंट्री न केवल देश की आंतरिक राजनीति में बड़ा बदलाव है, बल्कि भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी इसका असर पड़ सकता है। जिन नेताओं के नाम कभी मौत की सजा और आतंकवाद से जुड़े मामलों में सामने आए थे, उनका संसद तक पहुंचना दक्षिण एशियाई राजनीति में एक अहम मोड़ माना जा रहा है।
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