अयोध्या दीपोत्सव : इतने दीपों से जगमग होगा सरयू तट, बनेगा नया रिकॉर्ड

जुबिली न्यूज़ डेस्क

अयोध्या में शुक्रवार को भव्य एवं दिव्य दीपोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। इस दीपोत्सव के साथ ही रामायण के 11 प्रसंगों पर आधारित झांकिया भी निकाली जाएंगी। एक बार फिर अयोध्‍या में होने वाला दीपोत्सव अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़ेगा।

इस बार अयोध्या में 5 लाख 51 हजार दीये जलाए जाएंगे साथ ही एक और नया रिकॉर्ड बनेगा। इस कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रामलला के सामने दीपक जलाकर करेंगे।

अयोध्या में होने वाले इस आयोजन को लेकर वहां की जनता काफी उत्साहित है। इसमें शामिल होने के लिए देश भर के लोग आ रहे हैं। भव्‍य दीपोत्‍सव की तैयारी में अयोध्‍या नगरी दुल्‍‍‍‍हन की तरह सजाई गई है। अद्भुत सरयू आरती का आयोजन होगा। सरयू आरती के बाद राम की पैड़ी पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दीपक प्रज्जवलित करेंगे।

इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सीएम योगी 4 बजे राम कथा पार्क पहुंचेंगे। वह राम कथा पार्क में भगवान राम और माता सीता का स्वागत करेंगे। इसके बाद भगवान राम का राज्याभिषेक होगा।

इसके बाद शाम 5 बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल सरयू तट पर पहुंचेंगे और आरती करेंगे। 14 नवंबर की सुबह सीएम योगी हनुमानगढ़ी में दर्शन पूजन के बाद गोरखपुर रवाना हो जाएंगे।

इन अनूठी संस्कृतियों के होंगे दर्शन

रघुनंदन के स्‍वागत को अयोध्‍या में संस्‍कृतियों की सतरंगी छटा बिखेरी जाएगी। गुजरात से लेकर बुंदेलखंड तक 7 अनूठी संस्‍कृतियों के दर्शन सरयू तट पर एक साथ होंगे। प्रदेश सरकार ने दीपोत्‍सव को खास बनाने के लिए गुजरात, महाराष्‍ट्र, आंध्र प्रदेश, राजस्‍थान, उत्‍तराखण्‍ड, ब्रज और बुंदेलखण्‍ड के लोक कलाकारों के साथ ही स्‍थानीय कलाकारों को यहां आमंत्रित किया गया है।

योगी सरकार इस दीपोत्‍सव के जरिये खास तौर पर बुंदेलखण्‍ड के लोक कलाकारों को विश्‍वस्‍तरीय मंच देने की योजना बना रही है। राज्‍य सरकार के संस्‍कृति विभाग ने बुंदेलखण्‍ड की दीवारी टोली को विशेष तौर पर शामिल किया है। दोहा, छंद, चौपाई की तान, ढोल की थाप और थाली की छन, छन की धुन पर मस्‍त बुंदेली जवानों की नृत्‍य करती टोली दीपोत्‍सव को अपने अनूठे अंदाज में खास बनाएगी।

पूरी दुनिया में आकर्षण और कौतूहल का केंद्र बनी अयोध्‍या में दीपोत्‍सव के जरिये योगी सरकार समूचे विश्‍व को भारत के सांस्‍कृतिक वैभव का संदेश भी देने जा रही है।

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