सियासी रसूख से दूर, फिटनेस और जीव-सेवा को समर्पित था प्रतीक यादव का सफर; 38 की उम्र में थम गईं सांसें

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति के ‘पुरोधा’ स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के छोटे पुत्र प्रतीक यादव का बुधवार सुबह लखनऊ में निधन हो गया। 38 वर्षीय प्रतीक ने एक ऐसे परिवार में जन्म लिया जहाँ राजनीति रगों में दौड़ती थी, लेकिन उन्होंने सत्ता के गलियारों के बजाय अपनी पहचान रियल एस्टेट, फिटनेस और समाजसेवा के क्षेत्र में बनाई।

अस्पताल पहुँचने से पहले ही हुआ निधन

प्रतीक यादव पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। रिपोर्टों के अनुसार, वे पिछले दो वर्षों से किडनी (वृक्क) संबंधी बीमारी का इलाज करा रहे थे।

  • 30 अप्रैल: तबीयत बिगड़ने पर उन्हें लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सुधार होने पर वे घर लौटे थे।
  • बुधवार तड़के: अचानक फिर स्वास्थ्य बिगड़ा। परिजन उन्हें सुबह 5:55 बजे अस्पताल लेकर पहुँचे, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार अस्पताल पहुँचने से पहले ही उन्होंने अंतिम सांस ले ली थी।

साधना गुप्ता के पुत्र और ‘मुलायम परिवार’ का हिस्सा

प्रतीक यादव, मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के पुत्र थे। भले ही उनके बड़े भाई अखिलेश यादव और पत्नी अपर्णा यादव राजनीति के धुरंधर रहे, लेकिन प्रतीक ने हमेशा खुद को ‘लाइमलाइट’ और चुनावी राजनीति से दूर रखा। ब्रिटेन की लीड्स यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त करने वाले प्रतीक का मानना था कि वे एक ‘मैनेजमेंट स्टूडेंट’ हैं और उन्हें व्यवसाय और प्रबंधन ही पसंद है।

फिटनेस और ‘बेजुबानों’ के मसीहा

प्रतीक यादव को लखनऊ में उनके फिटनेस जुनून के लिए जाना जाता था। उन्होंने ‘द फिटनेस प्लानेट’ नाम से अपना जिम संचालित किया। लेकिन उनकी पहचान केवल जिम तक सीमित नहीं थी:

  • जीव आश्रय: जानवरों के प्रति अगाध प्रेम के कारण वे ‘जीव आश्रय’ नामक संस्था चलाते थे, जो सड़क पर रहने वाले कुत्तों (स्ट्रीट डॉग्स) के इलाज, भोजन और रेस्क्यू का काम करती है।
  • समाज सेवा: वे बेघर लोगों की मदद के लिए भी एक एनजीओ के माध्यम से सक्रिय रहते थे।

अपर्णा यादव के साथ वैवाहिक सफर

प्रतीक की पत्नी अपर्णा यादव वर्तमान में भाजपा की कद्दावर नेता और यूपी महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं। दोनों की मुलाकात विदेश में पढ़ाई के दौरान हुई थी और साल 2011 में वे परिणय सूत्र में बंधे थे। हालांकि कुछ समय पहले उनके निजी रिश्तों को लेकर मीडिया में कई अटकलें लगाई गईं, लेकिन अंततः दोनों ने हर उतार-चढ़ाव का मजबूती से सामना किया।

एक शांत जीवन का अंत

जहाँ एक ओर उनका परिवार प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करता था, वहीं प्रतीक ने एक शांत और सादगी भरा जीवन चुना। उनके आकस्मिक निधन से लखनऊ के सामाजिक और व्यावसायिक हलकों में शोक की लहर है।

Related Articles

Back to top button