लोकसभा चुनाव से पहले भारत रत्न का ऐलान, क्या है इसके सियासी मायने?

लोकसभा चुनाव बेहद करीब है। ऐसे में मौजूदा सरकार अपने वोट बैंक को मजबूत करने के लिए लगातार बड़े-बड़े ऐलान कर रही है। ताकि लोकसभा चुनाव में सियासी फायदा लिया जा सके। अगर देखा जाये तो मौजूदा सरकार ने हाल में कई बड़े नेताओं को भारत रत्न देने का ऐलान किया है। कर्पूरी ठाकुर, आडवाणी के बाद अब स्वामीनाथन, चौधरी चरण सिंह और नरसिम्हा राव को भारत रत्न देने का ऐलान मोदी सरकार ने किया है।

मोदी सरकार ने कुछ दिन पहले कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने का ऐलान किया। उनके इस ऐलान के कुछ घंटों बाद ही बिहार में सरकार बदल गई। दरअसल नीतीश कुमार ने मोदी सरकार की इस पहल की तारीफ की और फिर धीरे से एनडीए का हिस्सा बन गए। लालू यादव से अपना रिश्ता तोड़ते हुए फिर से मोदी सरकार से रिश्ता जोड़ लिया।

मोदी ने पहले कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने का ऐलान कर विपक्षी दलों को पूरी तरह से हैरान कर दिया।  मोदी ने अपने इस दांव से दलितों, वंचितों और उपेक्षित तबकों अपनी तरफ खींचने की बड़ी कोशिश माना जा रहा है। मोदी का ये कदम मंडल की राजनीति में बड़ी सेंध करने के इरादे से की थी जबकि आडवाणी के सहारे उन लोगों का मुंह बंद करने की कोशिश है जो अक्सर मोदी पर आरोप लगाते हैं उन्होंने आडवाणी को दरकिनार कर अपनी राजनीतिक को चमकाया है।

ऐसे में उनके सहारे किसानों का दिल जीतने की कोशिश है जबकि विपक्षी गठबंधन में शामिल जयंत चौधरी की पार्टी को खुश कर दिया गया है ताकि वो भी एनडीए के पाले में आ जाये। हालांकि बीते कुछ दिनों से राष्ट्रीय लोकदल के नेता जयंत चौधरी को लेकर कहा जा रहा है कि वो जल्द ही एनडीए का हिस्सा बन सकते हैं।

बीजेपी से उनकी बातचीत फाइनल मोड पर है। वहीं कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शुमार रहे नरसिम्हा राव को लेकर मोदी सरकार की सोच कांग्रेस से एकदम अलग है। दरअसल कांग्रेस नरसिम्हा राव को लेकर ज्यादा उत्साहित नहीं रहती है और वो सम्मान उनको नहीं मिला है जो कांग्रेस में अन्य नेताओं का मिलता रहा है।

नरसिम्हा राव को भारत रत्न देने के क्या मायने हो सकते हैं, इसको लेकर जो भी कयास लगे लेकिन राव को भारतीय आर्थिक सुधारों के जनक भी कहा जाता है। 

Related Articles

Back to top button