जुबिली न्यूज डेस्क
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एसआईआर (SIR) प्रक्रिया में फॉर्म-7 को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी फॉर्म-7 के जरिए पीडीए (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) वर्ग के मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काटने की कोशिश की जा रही है।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर लंबी पोस्ट करते हुए कहा कि जिन नामों को हटाने की कोशिश हो रही है, वे ज्यादातर पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े हैं।
‘फर्जी फॉर्म-7’ के जरिए वोट काटने का आरोप
सपा अध्यक्ष ने अपने पोस्ट में विभिन्न जातियों का जिक्र करते हुए दावा किया कि नाम कटवाने की कथित साजिश में पीडीए वर्ग के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिनके नाम हटाए जा रहे हैं, उनकी कहानी जाति से जुड़ती है, जबकि नाम कटवाने वाले लोग भाजपा से जुड़े प्रभावशाली और प्रभुत्ववादी मानसिकता के हैं।
उन्होंने यह भी मांग की कि सुनवाई केंद्र 1-2 किलोमीटर के दायरे में बनाए जाएं और मतदाताओं की शिकायतों की निष्पक्ष सुनवाई हो।
पंचायत चुनाव और आरक्षण पर भी साधा निशाना
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि पंचायत चुनाव को आरक्षण के मुद्दे पर फंसाकर टाला जा रहा है, क्योंकि सरकार को गांव-गांव में विरोध का अंदेशा है। उन्होंने कहा कि सरकार न जनगणना करा रही है और न ही जातिगत आंकड़े जारी कर रही है।
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सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई की चेतावनी
सपा अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि पार्टी इस मुद्दे को जिला प्रशासन से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएगी। उन्होंने ‘पीडीए प्रहरी’ को सतर्क रहने और हर उस व्यक्ति की मदद करने का आह्वान किया, जिसका नाम मतदाता सूची से काटने की कोशिश हो रही है।
पोस्ट के अंत में उन्होंने नारा दिया—“एक भी वोट न कटने पाए, एक भी वोट न घटने पाए।”इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में फॉर्म-7 और मतदाता सूची संशोधन को लेकर बहस तेज हो गई है।
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