BJP सरकार के एक्शन से TMC में भगदड़, ममता बनर्जी पर बढ़ा दबाव

Mamata Banerjee और उनकी पार्टी All India Trinamool Congress के लिए पश्चिम बंगाल में हालात लगातार मुश्किल होते जा रहे हैं। राज्य में Bharatiya Janata Party की सरकार बनने के बाद से तृणमूल कांग्रेस के नेताओं, पार्षदों और कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई तेज हो गई है।

नई सरकार अवैध निर्माण, भ्रष्टाचार और कथित राजनीतिक संरक्षण वाले मामलों पर लगातार एक्शन ले रही है। कई जिलों में बुलडोजर कार्रवाई, गिरफ्तारियां और पूछताछ का दौर जारी है। चुनाव में हार झेलने के बाद ममता बनर्जी खुद भी राजनीतिक दबाव में नजर आ रही हैं।

सोमवार को पुलिस की एक टीम Abhishek Banerjee के आवास पर सुरक्षा उपकरण लेने पहुंची। कोलकाता पुलिस ने इसे नियमित प्रक्रिया बताया, लेकिन बीजेपी सरकार बनने के बाद से TMC नेताओं पर लगातार हो रही कार्रवाई को लेकर सियासी माहौल गर्म है।

इसी बीच कोलकाता नगर निगम ने अभिषेक बनर्जी से जुड़ी कई संपत्तियों पर नोटिस जारी कर मूल स्वीकृत नक्शे से अलग निर्माण को लेकर जवाब मांगा है।

हुगली जिले के कोननगर इलाके में सोमवार को तृणमूल कांग्रेस के एक पार्टी ऑफिस पर बुलडोजर चलाया गया। प्रशासन का दावा है कि यह ऑफिस सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से बनाया गया था।

अधिकारियों के अनुसार, यह निर्माण कथित तौर पर स्थानीय TMC पार्षद खोकोन पाल से जुड़ा हुआ था। अवैध कब्जे के आरोप में इसे ध्वस्त कर दिया गया।

रविवार (24 मई) को कोलकाता के बेलेघाटा, बोसपुकुर, तिलजला और कस्बा इलाकों में भी अवैध बहुमंजिला इमारतों के खिलाफ कार्रवाई की गई। प्रशासन का आरोप है कि इन इमारतों का संबंध TMC के पूर्व और मौजूदा नेताओं या स्थानीय बाहुबलियों से था।

Javed Khan के स्वामित्व वाली एक इमारत को लेकर भी ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया गया है। उनसे इमारत के वैध दस्तावेज पेश करने को कहा गया है। हालांकि विधायक ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए निर्माण को पूरी तरह कानूनी बताया है।

कार्रवाई के दौरान निरीक्षण करने पहुंचीं Agnimitra Paul ने कहा कि अवैध निर्माण को संरक्षण देने वाले सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

राज्य के पुरुलिया, खानाकुल और अन्य जिलों में भी प्रशासन ने अवैध ढांचों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है।

15 साल तक सत्ता में रहने के बाद विपक्ष में पहुंची TMC अब संगठनात्मक संकट से भी जूझ रही है। कई नगरपालिकाओं और पंचायतों में पार्टी के पार्षद लगातार इस्तीफा दे रहे हैं।

भाटपारा नगर पालिका में चेयरमैन समेत करीब 30 पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया। वहीं डायमंड हार्बर नगर पालिका में TMC के 16 में से 8 पार्षदों ने पद छोड़ दिया।

हलीसहर, कांथी, उत्तर बैरकपुर और गारुलिया जैसे इलाकों में भी पार्टी को बड़ा झटका लगा है, जहां कई पार्षद बीजेपी के संपर्क में बताए जा रहे हैं।

सोमवार को बीरभूम के सूरी इलाके में पार्टी की एक स्थानीय पार्षद के पति बप्पादित्य दास को गिरफ्तार किया गया। वहीं बर्धमान से तृणमूल नेता अभिषेक दा को रंगदारी और धमकी के आरोप में पकड़ा गया।

पिछले कुछ हफ्तों में अलग-अलग जिलों से दर्जनों स्थानीय नेताओं और पार्षदों को हिरासत में लिया गया है। कई लोगों से पुलिस लंबी पूछताछ कर चुकी है।

Kakoli Ghosh Dastidar ने भी पार्टी के ‘बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष’ पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने चुनाव में मिली हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पार्टी की कार्यशैली और चुनावी रणनीतिकार I-PAC की भूमिका पर सवाल उठाए।

24 मई को ममता बनर्जी ने राज्य में बुलडोजर कार्रवाई, गिरफ्तारियों और पार्टी कार्यकर्ताओं को परेशान किए जाने के आरोपों को लेकर बीजेपी सरकार की तीखी आलोचना की।

हालांकि पार्टी के कई वरिष्ठ नेता इन घटनाओं पर सार्वजनिक बयान देने से बचते नजर आ रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद TMC अब अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है।

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