ट्रंप और सलाहकारों के 3700+ स्टॉक ट्रेड पर बवाल, Bloomberg खुलासे के बाद नई जांच शुरू

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और उनके सलाहकारों की इस साल की पहली तिमाही में 3700 से ज्यादा स्टॉक ट्रेडिंग गतिविधियों का खुलासा हुआ है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद वॉशिंगटन में नए सिरे से जांच शुरू हो गई है और राजनीतिक हलकों में हितों के टकराव (Conflict of Interest) पर बहस तेज हो गई है।

यह खुलासा सबसे पहले Bloomberg की रिपोर्ट में सामने आया, जिसमें टेक, फाइनेंस, एयरोस्पेस और मीडिया सेक्टर की बड़ी कंपनियों में करोड़ों डॉलर के लेन-देन का विवरण दिया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से मार्च के बीच औसतन हर दिन 40 से अधिक ट्रेड किए गए। यह पिछली तिमाही की तुलना में तेज बढ़ोतरी है, जब लगभग 380 ट्रेड दर्ज किए गए थे।

मार्केट एक्सपर्ट्स ने इस स्तर की एक्टिविटी को असामान्य बताया है। एक विश्लेषक ने इसे “बड़े हेज फंड जैसी एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग” के समान बताया, जो राष्ट्रपति स्तर पर बेहद असामान्य माना जाता है।

खुलासे में सामने आया कि NVIDIA, Oracle, Microsoft, Boeing और Costco जैसी कंपनियों में बड़े पैमाने पर निवेश और ट्रेड हुए।

इसके अलावा Amazon, Meta Platforms, Uber, eBay, AT&T और Dollar Tree जैसी कंपनियां भी इस लिस्ट में शामिल हैं।

सबसे बड़ा लेन-देन 10 फरवरी को बताया गया, जब Microsoft, Meta और Amazon में 5 से 25 मिलियन डॉलर की होल्डिंग्स बेची गईं। Netflix और Warner Bros. Discovery जैसी मीडिया कंपनियों से जुड़े निवेश भी रिपोर्ट में सामने आए।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन कंपनियों में से कई ऐसे सेक्टर से जुड़ी हैं जो सीधे अमेरिकी सरकारी नीतियों से प्रभावित होते हैं।

उदाहरण के तौर पर:

  • Nvidia को AI चिप्स के निर्यात के लिए सरकारी मंजूरी चाहिए
  • Boeing रक्षा और सरकारी कॉन्ट्रैक्ट पर निर्भर है
  • Microsoft, Amazon और Meta जैसी कंपनियां रेगुलेशन और एंटीट्रस्ट जांच के दायरे में रहती हैं

आलोचकों का कहना है कि भले ही कोई कानूनी उल्लंघन साबित न हुआ हो, लेकिन इस तरह की सक्रिय ट्रेडिंग से नीति और निजी लाभ के बीच संभावित टकराव की आशंका बढ़ती है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ट्रंप ने पारंपरिक “ब्लाइंड ट्रस्ट” मॉडल नहीं अपनाया, जिसमें संपत्तियों का स्वतंत्र प्रबंधन किया जाता है। इसके बजाय उनके परिवार से जुड़े व्यवसायिक ढांचे पर नियंत्रण जारी रहने की बात कही गई है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।

पिछले कुछ महीनों में तेल और शेयर बाजार में असामान्य उतार-चढ़ाव को लेकर भी अटकलें लगाई गईं। हालांकि किसी भी प्रत्यक्ष अंदरूनी जानकारी (insider trading) का ठोस सबूत सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

इसके बावजूद इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि क्या राजनीतिक निर्णय और बाजार गतिविधियां आपस में अत्यधिक जुड़ रही हैं।

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