देश में महंगाई ने तोड़ा 42 महीनों का रिकॉर्ड, अप्रैल में थोक महंगाई दर 8.30% पहुंची

देश में महंगाई ने एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी है. अप्रैल 2026 में थोक महंगाई दर (WPI Inflation) बढ़कर 8.30 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो पिछले 42 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है. मार्च महीने में यह दर 3.88 प्रतिशत थी, लेकिन एक ही महीने में इसमें तेज उछाल दर्ज किया गया है.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, ईंधन, बिजली, कच्चे तेल और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की कीमतों में तेजी इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह रही है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर अब घरेलू बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है.
ईंधन और कच्चे तेल ने बढ़ाई चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ग्लोबल ऑयल मार्केट में अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल आ रहा है. इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल, बिजली उत्पादन और ट्रांसपोर्ट लागत पर पड़ रहा है.
थोक महंगाई बढ़ने का मतलब है कि आने वाले दिनों में रोजमर्रा के सामान भी महंगे हो सकते हैं, क्योंकि कंपनियों की उत्पादन लागत तेजी से बढ़ रही है.
रिटेल महंगाई में भी बढ़ोतरी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार खुदरा महंगाई दर (CPI Inflation) भी बढ़कर 3.48 प्रतिशत तक पहुंच गई है. खाने-पीने की चीजों की कीमतों में भी लगातार इजाफा देखा जा रहा है. खाद्य महंगाई दर पिछले महीने के 3.87 प्रतिशत से बढ़कर 4.20 प्रतिशत हो गई है.
आम लोगों पर बढ़ सकता है बोझ
आर्थिक जानकारों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल, गैस सिलेंडर और ट्रांसपोर्ट से जुड़ी सेवाएं और महंगी हो सकती हैं. इसका असर सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ेगा.
बढ़ती महंगाई के बीच अब लोगों की नजर सरकार और Reserve Bank of India की अगली रणनीति पर टिकी हुई है.



