NEET पेपर लीक के बाद NTA पर उठे बड़े सवाल, पूरी व्यवस्था आउटसोर्स होने पर घिरी एजेंसी

NEET UG 2026 पेपर लीक मामले के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में शामिल NEET को कराने वाली एजेंसी की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जांच में पेपर लीक के संकेत मिलने के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई है और मामले की जांच अब केंद्रीय एजेंसियों तक पहुंच चुकी है।
आउटसोर्स मॉडल पर चल रहा NTA
जानकारी के मुताबिक NTA में अधिकांश काम आउटसोर्स मॉडल पर आधारित है। एजेंसी का हेड ऑफिस दिल्ली के ओखला इंडस्ट्रियल एस्टेट स्थित किराए की बिल्डिंग में संचालित होता है। यहां तक कि स्टाफ, तकनीकी व्यवस्था और कई प्रशासनिक सेवाएं भी ठेके पर संचालित होने की बात सामने आई है।
NTA का संचालन 10 सदस्यों वाली गवर्निंग बॉडी करती है। इसके अलावा स्थायी नियुक्तियों की संख्या बेहद सीमित बताई जा रही है। पेपर तैयार करने से लेकर परीक्षा संचालन तक कई प्रक्रियाओं में बाहरी विशेषज्ञों और एजेंसियों की मदद ली जाती है।
2019 से NTA करा रहा है NEET
NEET UG परीक्षा की जिम्मेदारी NTA को साल 2019 में दी गई थी। इससे पहले CBSE यह परीक्षा आयोजित करता था। 2019 के बाद से कई बार परीक्षा प्रक्रिया और सुरक्षा को लेकर सवाल उठ चुके हैं। इस बार पेपर लीक की आशंका ने पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर बहस छेड़ दी है।
पेपर सेटिंग से प्रिंटिंग तक बाहरी एजेंसियों की भूमिका
सूत्रों के अनुसार NTA प्रश्नपत्र तैयार करने के लिए विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों और विषय विशेषज्ञों को आमंत्रित करता है। वहीं प्रश्नपत्र प्रिंटिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़े कई काम भी बाहरी एजेंसियों के जरिए कराए जाते हैं। ऐसे में अब यह सवाल उठ रहे हैं कि इतनी संवेदनशील परीक्षा का पूरा ढांचा बाहरी व्यवस्थाओं पर क्यों निर्भर है।
सुरक्षा दावों के बावजूद लीक पर सवाल
NTA का दावा है कि परीक्षा पूरी सुरक्षा व्यवस्था के तहत कराई गई थी। एजेंसी के अनुसार प्रश्नपत्र GPS ट्रैकिंग वाले वाहनों से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाए गए थे और हर स्तर पर सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए गए थे।
इसके बावजूद सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर कथित “गेस पेपर” वायरल होने और कई सवालों के असली परीक्षा से मेल खाने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जांच एजेंसियां जुटीं
राजस्थान SOG समेत कई एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हैं। जांच में “Private Mafia” नाम के व्हाट्सएप ग्रुप और कथित मास्टरमाइंड मनीष यादव का नाम सामने आया है। अब एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि परीक्षा प्रणाली में सेंध आखिर कहां और कैसे लगी।
पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी है। विपक्षी दल भी केंद्र सरकार और NTA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।



